सीवान: बारूद के ढेर पर बसा था आलमपुर… पटाखा विस्फोट में 5 की मौत, थानाध्यक्ष-चौकीदार सस्पेंड, जांच तेज

 

सीवान। बिहार के सीवान जिले के आलमपुर गांव में शुक्रवार देर शाम हुए भीषण पटाखा विस्फोट ने पांच लोगों की जान ले ली। धमाका इतना जबरदस्त था कि मकान का अगला हिस्सा ढहकर सड़क पर बिखर गया। आग लगने के बाद करीब दो घंटे तक रुक-रुककर धमाके होते रहे। आसपास के लोग दहशत में घरों से बाहर निकल आए। घटनास्थल का मंजर इतना भयावह था कि राहत एवं बचाव कार्य में जुटी टीमों को भी काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

लेकिन इस दर्दनाक हादसे के बाद सवाल सिर्फ यह नहीं है कि विस्फोट कैसे हुआ, बल्कि यह भी है कि घनी आबादी के बीच पटाखा निर्माण और भंडारण की गतिविधियां किन परिस्थितियों में चल रही थीं? क्या सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा था? लाइसेंस वैध था या नहीं,और अगर पहले से इस कारोबार की जानकारी थी, तो समय रहते जांच और कार्रवाई क्यों नहीं हुई।सीवान के आलमपुर में हुआ विस्फोट अब प्रशासनिक निगरानी और जवाबदेही की भी बड़ी परीक्षा बन गया है।

एक धमाका और उजड़ गए कई परिवार
शुक्रवार, 23 अक्टूबर की शाम करीब 5:30 बजे आलमपुर गांव में पटाखों में आग लगने के बाद जोरदार विस्फोट हुआ। घटना जामो बाजार थाना क्षेत्र की बताई गई है। जिस मकान में पटाखे रखे गए थे, वहां आग फैलने के साथ एक के बाद एक धमाके होने लगे। विस्फोट की तीव्रता इतनी अधिक थी कि मकान का अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर सड़क पर जा गिरा।स्थानीय लोगों के अनुसार, धमाकों की आवाज दूर तक सुनाई दी। शुरुआती विस्फोट के बाद भी काफी देर तक पटाखे फटते रहे, जिससे घटनास्थल पर पहुंचने वाले लोगों और राहतकर्मियों के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी रही।
सीवान के जिलाधिकारी विजय प्रकाश मीणा और पुलिस अधीक्षक भारत सोनी घटनास्थल पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य की निगरानी की। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में मलबे की तलाशी ली गई। चिकित्सा दल और फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की टीम को भी जांच में लगाया गया।पुलिस अधीक्षक ने पांच लोगों की मौत की पुष्टि की।

मृतकों में मकान मालिक, दो युवतियां और आठ साल का मासूम शामिल

आलमपुर में हुए भीषण विस्फोट ने कई परिवारों को उजाड़ दिया। इस हादसे में जान गंवाने वालों में मकान मालिक अमीरुद्दीन मियां (65), दो युवतियां, एक आठ वर्षीय मासूम बच्चा और एक अन्य व्यक्ति शामिल हैं।मृतकों की पहचान स्वर्गीय इस्लाम मियां के पुत्र अमीरुद्दीन मियां, स्वर्गीय अयाद अहमद की 13 वर्षीय पुत्री खुशबू सिद्दीकी, आजाद अहमद की 23 वर्षीय पुत्री मुस्कान सिद्दीकी, फिरोज अहमद के आठ वर्षीय पुत्र अरसद सिद्दीकी और बड़हरिया थाना क्षेत्र के सदरपुर निवासी स्वर्गीय शंकर सिंह के 35 वर्षीय पुत्र राजकुमार सिंह के रूप में हुई है।मृतकों की सूची में एक मासूम बच्चे और कम उम्र की दो युवतियों के नाम सामने आने के बाद हादसे की भयावहता का अंदाजा लगाया जा सकता है। जिन घरों में कुछ समय पहले तक खुशियां थीं, वहां अब मातम पसरा है। मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे इलाके में शोक और दहशत का माहौल बना हुआ है।

रात 10 बजे रोका गया रेस्क्यू ऑपरेशन, मलबे में तलाश की चुनौती

विस्फोट की तीव्रता से मकान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। भवन के और ढहने का खतरा, रुक-रुककर हो रहे धमाकों और अंधेरे के कारण राहत एवं बचाव अभियान चलाना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने शुक्रवार रात करीब 10 बजे तक पांच शव बरामद करने के बाद बचाव अभियान रोक दिया।मलबे में परिवार के अन्य सदस्यों के दबे होने की आशंका को देखते हुए शनिवार को दोबारा तलाशी अभियान चलाने की तैयारी की गई। इसके लिए जेसीबी की मदद से मलबा हटाकर संभावित रूप से फंसे लोगों की तलाश की जा रही है।

डीआईजी, डीएम और एसपी ने संभाला मोर्चा
घटना की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी नीलेश कुमार, जिलाधिकारी विजय प्रकाश मीणा और पुलिस अधीक्षक भारत सोनी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। अधिकारियों ने राहत एवं बचाव कार्य की निगरानी की और स्थिति का जायजा लिया।घटनास्थल पर पुलिस, प्रशासन और बचाव दलों की मौजूदगी के बीच सबसे बड़ी प्राथमिकता मलबे में दबे लोगों की तलाश, शवों को सुरक्षित बाहर निकालना और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करना रही। रात में बचाव अभियान स्थगित होने के बाद अधिकारी मुख्यालय लौट गए।

14 एंबुलेंस, पांच से अधिक दमकल गाड़ियां और सैकड़ों पुलिसकर्मी तैनात
हादसे की भयावहता को देखते हुए राहत एवं बचाव कार्य के लिए बड़े पैमाने पर संसाधन लगाए गए। घटनास्थल पर करीब 14 एंबुलेंस, पांच से अधिक दमकल गाड़ियां, तीन मोर्चरी वाहन और सैकड़ों पुलिसकर्मियों की तैनाती की जानकारी सामने आई।
सिविल सर्जन डॉ. श्रीनिवास प्रसाद के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम भी मौके पर मौजूद रही, ताकि किसी घायल को तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके। दमकलकर्मियों ने आग और उससे जुड़े खतरों से निपटने में भूमिका निभाई, जबकि पुलिस एवं प्रशासनिक टीमें घटनास्थल पर राहत और सुरक्षा व्यवस्था संभालती रहीं।इतने बड़े पैमाने पर संसाधन लगाए जाने के बावजूद क्षतिग्रस्त मकान, मलबे और संभावित विस्फोटक सामग्री के कारण बचाव अभियान में काफी सावधानी बरतनी पड़ी।

अमीरुद्दीन मियां के मकान में रखा था पटाखों का भंडार
रिपोर्टों के अनुसार, विस्फोट आलमपुर निवासी मोहम्मद अमीरुद्दीन मियां के मकान में हुआ। उन्हें पटाखा कारोबारी बताया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वहां पटाखे बनाने और भंडारण का काम होता था तथा शादी-विवाह सहित अन्य आयोजनों के लिए पटाखों की आपूर्ति की जाती थी। इस कारोबार से करीब 20 वर्षों से जुड़े होने और पहले लाइसेंस रहने की बात भी सामने आई है। हालांकि, कारोबार से संबंधित अनुमति की वास्तविक स्थिति, उसकी वैधता और निर्धारित शर्तों के अनुपालन की पुष्टि प्रशासनिक जांच से ही होगी।

यहां सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि यदि पटाखा निर्माण और भंडारण के लिए अनुमति थी, तो क्या संबंधित परिसर में उसी प्रकार का काम किया जा रहा था, जिसकी अनुमति मिली थी? क्या भंडारण की मात्रा निर्धारित सीमा के अनुरूप थी? और क्या मकान का स्थान तथा वहां की सुरक्षा व्यवस्था नियमों के मुताबिक थी?लाइसेंस होने की बात अपने आप में सुरक्षा मानकों के पालन का प्रमाण नहीं है। इन सभी बिंदुओं की जांच जरूरी है।

गांव में पटाखा निर्माण की चर्चा, निगरानी पर उठे सवाल
आलमपुर में पटाखा कारोबार को लेकर स्थानीय स्तर पर पहले से गतिविधियां होने की बात सामने आई है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में गांव के कई घरों में पटाखे बनाने की चर्चा का भी उल्लेख है। यदि जांच में इसकी पुष्टि होती है, तो प्रशासन के सामने केवल एक मकान तक सीमित रहने के बजाय पूरे क्षेत्र में पटाखा निर्माण और भंडारण की स्थिति का पता लगाने की चुनौती होगी।

घनी आबादी वाले इलाके में विस्फोटक सामग्री का असुरक्षित भंडारण आसपास रहने वाले लोगों की जान को भी खतरे में डाल सकता है। ऐसी स्थिति में यह जानना आवश्यक है कि कारोबार किस स्तर पर चल रहा था, कितनी मात्रा में पटाखे रखे गए थे और क्या सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त थे।हालांकि, स्थानीय स्तर पर पुलिस की कथित जानकारी या किसी व्यक्ति को संरक्षण दिए जाने संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए किसी अधिकारी या व्यक्ति की मिलीभगत को जांच से पहले तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा। जांच में सामने आने वाले साक्ष्य ही जिम्मेदारी तय करेंगे।

थानाध्यक्ष और चौकीदार निलंबित, एसआईटी करेगी जांच
हादसे के बाद सीवान के पुलिस अधीक्षक भारत सोनी ने जामो बाजार थाने के थानाध्यक्ष धीरज कुमार और स्थानीय चौकीदार चंद्रिका मांझी को कथित लापरवाही के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। घटना की विस्तृत जांच के लिए महाराजगंज के एसडीपीओ अमन कुमार के नेतृत्व में विशेष जांच टीम (SIT) गठित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है और महाराजगंज के सर्किल इंस्पेक्टर को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पुलिस और फॉरेंसिक टीम विस्फोट के कारणों, घटनास्थल पर मौजूद सामग्री और सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों की जांच कर रही हैं।

प्रशासन की ओर से यह भी पता लगाया जाना है कि संबंधित इकाई के पास आवश्यक लाइसेंस था या नहीं, लाइसेंस वैध था या उसकी अवधि समाप्त हो चुकी थी और क्या पटाखों के निर्माण एवं भंडारण के दौरान निर्धारित नियमों का पालन किया जा रहा था।
थानाध्यक्ष और चौकीदार का निलंबन शुरुआती प्रशासनिक कार्रवाई है। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि पूरे मामले की जिम्मेदारी केवल इन्हीं पर थी। वास्तविक जवाबदेही जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर तय होनी चाहिए।

रिपोर्टों के अनुसार, संबंधित क्षेत्र में पटाखा कारोबार से जुड़े लाइसेंस के सत्यापन के निर्देश पहले दिए गए थे। पुलिस अधीक्षक के हवाले से यह भी बताया गया कि स्थानीय थानाध्यक्ष से लाइसेंस की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई थी, लेकिन रिपोर्ट संतोषजनक नहीं पाई गई। हादसा केवल तत्काल हुई दुर्घटना थी या इसके पीछे ऐसी सुरक्षा संबंधी कमियां भी थीं, जिन्हें समय रहते दूर किया जा सकता था।

फॉरेंसिक जांच से खुलेगा विस्फोट का राज
घटनास्थल पर फॉरेंसिक टीम ने जांच शुरू की। पुलिस और प्रशासन की टीमों ने मलबे तथा आसपास के क्षेत्र की जांच की। विस्फोट की वास्तविक वजह, आग लगने की परिस्थितियां और वहां मौजूद विस्फोटक सामग्री की प्रकृति का पता वैज्ञानिक जांच से लगाया जाएगा।जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि आग सबसे पहले कहां लगी, वहां किस प्रकार के पटाखे या रासायनिक पदार्थ रखे गए थे और क्या भंडारण के दौरान सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हुआ था। इसके साथ ही पटाखों के स्रोत, खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेजों और संबंधित अनुमति की भी जांच जरूरी है।

आलमपुर की घटना ने एक बार फिर पटाखा निर्माण और भंडारण की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पांच लोगों की मौत केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि उन सुरक्षा व्यवस्थाओं की भी जांच का विषय है, जिनका उद्देश्य ऐसे हादसों को रोकना है।

आलमपुर का विस्फोट एक चेतावनी है। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित कारोबारियों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, पूरे क्षेत्र में पटाखा निर्माण और विस्फोटक सामग्री के भंडारण की जांच कर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

 

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