मासूम को अगवा कर राँची से भाग निकला गैंग, लेकिन ‘डॉन’ की 110 रुपये वाली गलती ने बिगाड़ दिया पूरा खेल….

राँची। राँची रेलवे स्टेशन से चार साल के मासूम विवान कुमार के अपहरण की वारदात ने पुलिस के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी थी। 24 सितंबर की सुबह स्टेशन परिसर के बाहर से बच्चा गायब हुआ और अपहरणकर्ता उसे लेकर देखते ही देखते राँची से बाहर निकल गए। लेकिन पुलिस ने भी पीछा नहीं छोड़ा। करीब 100 से अधिक CCTV फुटेज खंगालने, तकनीकी जांच और एक छोटे से ऑनलाइन ट्रांजेक्शन ने पुलिस को उस कड़ी तक पहुंचा दिया, जिसके बाद राँची से धनबाद और फिर साहिबगंज तक पुलिस की कार्रवाई तेज हो गई।पुलिस के अनुसार, इस पूरे ऑपरेशन में मुख्य सरगना रोहित मुखर्जी उर्फ डॉन समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक किशोर को निरुद्ध किया गया है। साहिबगंज के तीनपहाड़ इलाके से विवान को सकुशल बरामद कर लिया गया।

स्टेशन से टोटो, फिर खादगढ़ा बस स्टैंड… और राँची से फरार

पुलिस पूछताछ में सामने आई जानकारी के अनुसार, बच्चा उठाने के बाद आरोपी सीधे रेलवे स्टेशन के आसपास नहीं रुके। पुलिस की नजर से बचने के लिए वे टोटो से खादगढ़ा बस स्टैंड पहुंचे। इसके बाद बस से राँची से बाहर निकल गए।जानकारी के मुताबिक, गिरोह ने रास्ता ऐसा चुना कि पुलिस अगर रेलवे स्टेशन और उसके आसपास बच्चे की तलाश करती रहे, तो तब तक वे काफी दूर निकल जाएं।इसके बाद गिरोह के मुख्य सरगना रोहित मुखर्जी उर्फ डॉन धनबाद में उतर गया, जबकि अन्य आरोपी मासूम को लेकर साहिबगंज की ओर निकल गए।

राँची में डेरा डालकर पहुंचे थे बच्चा चोरी करने?

पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मुख्य सरगना समेत गिरोह के कुछ सदस्य राँची में किसी इलाके में डेरा लेकर रह रहे थे। आशंका है कि उनका मकसद पहले से ही बच्चे को अगवा करना था और वारदात के बाद तुरंत शहर छोड़ देना था।बताया जा रहा है कि वारदात को अंजाम देने के बाद जिस जगह पर आरोपी ठहरे थे, उसे भी खाली कर दिया गया, ताकि पुलिस वहां पहुंचकर उनका सुराग न तलाश सके।हालांकि, पुलिस की तकनीकी जांच ने आरोपियों की यह योजना बिगाड़ दी।

100 से ज्यादा CCTV ने जोड़ी कड़ियां

विवान के गायब होने के बाद एसएसपी राकेश रंजन ने मामले को प्राथमिकता पर लेते हुए विशेष टीम बनाई। वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर गठित SIT ने स्टेशन परिसर और आसपास के रास्तों के CCTV फुटेज खंगालने शुरू किए।पुलिस ने 100 से ज्यादा कैमरों की फुटेज को खंगाला। एक-एक संदिग्ध गतिविधि और रास्ते को ट्रैक किया गया। इसी दौरान पुलिस को वारदात से पहले का एक महत्वपूर्ण फुटेज मिला, जिसमें मुख्य आरोपी रोहित मुखर्जी उर्फ डॉन के फूड प्लाजा के पास दिखाई देने की जानकारी सामने आई।यहीं से जांच को एक अहम सुराग मिला।

खाने के बाद की सिर्फ 110 रुपये की ऑनलाइन पेमेंट बनी सबसे बड़ा सुराग

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, स्टेशन के पास फूड वैन पर कुछ खाने के बाद रोहित मुखर्जी उर्फ डॉन ने ऑनलाइन करीब 110 रुपये का भुगतान किया था।आरोपी के लिए यह महज एक छोटा सा ट्रांजेक्शन था, लेकिन पुलिस की तकनीकी जांच में यही भुगतान उसकी पहचान तक पहुंचने वाली महत्वपूर्ण कड़ी बन गया।CCTV से मिले हुलिए और गतिविधियों के बीच तकनीकी टीम ने मोबाइल नंबर और डिजिटल ट्रांजेक्शन से जुड़े इनपुट को जोड़ना शुरू किया। जैसे-जैसे मोबाइल और लोकेशन से जुड़ी कड़ियां मिलती गईं, पुलिस को यकीन होता गया कि वह मुख्य आरोपी तक पहुंच रही है।बरामद बच्चा चुटिया थाना प्रभारी सह इंस्पेक्टर पूनम कुजूर के साथ

जिस ऑनलाइन पेमेंट को आरोपी ने शायद मामूली समझकर किया था, वही जांच में उसके खिलाफ अहम डिजिटल सुराग बन गया।

चुटिया थाना प्रभारी को सुराग मिलते ही धनबाद के लिए दौड़ी पुलिस

तकनीकी जांच में रोहित मुखर्जी उर्फ डॉन के धनबाद में होने की जानकारी सामने आने के बाद राँची पुलिस ने बिना समय गंवाए धनबाद पुलिस और आरपीएफ से संपर्क किया।इसके बाद कार्रवाई कई टीमों में बंट गई। राँची पुलिस, धनबाद पुलिस, साहिबगंज पुलिस तथा राँची-धनबाद आरपीएफ के बीच समन्वय बनाकर आरोपियों की तलाश शुरू की गई।27 सितंबर को धनबाद रेलवे स्टेशन से संदिग्ध रोहित मुखर्जी उर्फ डॉन को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में पुलिस के अनुसार उसने अपनी संलिप्तता स्वीकार की और अन्य सहयोगियों के नाम बताए।

डॉन की निशानदेही पर साहिबगंज पहुंची टीम

रोहित से पूछताछ के बाद पुलिस को पता चला कि बच्चा साहिबगंज के तीनपहाड़ इलाके में है। इसके बाद साहिबगंज पुलिस के सहयोग से टीम ने कार्रवाई की और तीनपहाड़ स्थित बिट्टु के नानी घर से विवान को सकुशल बरामद कर लिया।बच्चे की बरामदगी के साथ ही परिवार और पुलिस ने राहत की सांस ली।

एक साथ कई शहरों में चला ऑपरेशन

इस पूरे ऑपरेशन में राँची से लेकर धनबाद और साहिबगंज तक पुलिस की टीमें सक्रिय रहीं। पुलिस ने मामले में रोहित मुखर्जी उर्फ डॉन, बिट्टु कुमार सिंह, छोटु कुमार, तसबीर शेख और जमादार शेख को गिरफ्तार किया है। वहीं एक किशोर को निरुद्ध किया गया है।पुलिस ने आरोपियों के पास से पांच मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं।

सिर्फ अपहरण नहीं, मोबाइल चोरी के गिरोह का भी खुलासा

पुलिस की पूछताछ में इस मामले के पीछे एक बड़े गिरोह की गतिविधियों की जानकारी सामने आने का दावा किया गया है।पुलिस के अनुसार, रोहित मुखर्जी उर्फ डॉन गिरोह का मुख्य सरगना है। आरोप है कि गिरोह चोरी के मामलों में जेल भेजे गए बच्चों को जमानत दिलाने में सहयोग करता था और लावारिस बच्चों को अपने गिरोह में शामिल कर अलग-अलग शहरों के भीड़भाड़ वाले इलाकों में मोबाइल चोरी करवाता था।पुलिस के अनुसार, चोरी के मोबाइलों को बांग्लादेश में खपाने की बात भी जांच में सामने आई है। इस पहलू पर पुलिस आगे की जांच कर रही है।

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24 सितंबर से शुरू हुई तलाश, 27 सितंबर को मिला मासूम

24 सितंबर को चुटिया थाना क्षेत्र में विवान के अपहरण की प्राथमिकी दर्ज हुई थी। घटना की गंभीरता को देखते हुए SSP राँची ने SIT गठित की। इसके बाद CCTV और तकनीकी जांच के सहारे पुलिस लगातार आरोपियों के पीछे लगी रही।27 सितंबर को धनबाद से मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी और फिर उसकी निशानदेही पर साहिबगंज के तीनपहाड़ से विवान की सकुशल बरामदगी ने पूरे ऑपरेशन को निर्णायक मोड़ दिया।अब पुलिस गिरोह के नेटवर्क, राँची में उनके ठिकाने, बच्चों की कथित तस्करी/चोरी से जुड़े अन्य मामलों और बांग्लादेश तक मोबाइल पहुंचाने के नेटवर्क की भी जांच कर रही है।

इस पूरी कार्रवाई में राँची के 100 से ज्यादा CCTV कैमरों की फुटेज, तकनीकी सर्विलांस और कथित 110 रुपये के डिजिटल पेमेंट से निकली कड़ी अहम साबित हुई और आखिरकार चार साल का विवान अपने परिवार के पास सकुशल लौट आया।

 

नोट; कैसे डॉन ने बनाया गिरोह और करोड़ो की संपति…गिरोह में कितने बच्चे,कितने पुरुष और कितने महिलाएं शामिल हैं पढ़ेंगे दूसरी खबर में ..

 

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