राँची से पैतृक गांव पहुंचा सीआरपीएफ जवान का पार्थिव शरीर, नम आंखों से दी अंतिम विदाई; बेटे ने दी मुखाग्नि

राँची। तिरिल स्थित सीआरपीएफ कैंप में ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले 48 वर्षीय सीआरपीएफ जवान भुवनेश्वर पाल को सोमवार को उनके पैतृक गांव इमलिया टीकर में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गयी। घटना के दूसरे दिन सुबह उनका पार्थिव शरीर हुसैनाबाद थाना क्षेत्र स्थित पैतृक गांव पहुंचा। पार्थिव शरीर के पहुंचते ही पूरे गांव में मातम पसर गया और अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।

सीआरपीएफ जवान का पार्थिव शरीर पहले रामबीघा स्थित आवास लाया गया। यहां परिजनों, रिश्तेदारों, ग्रामीणों और शुभचिंतकों ने नम आंखों से अंतिम दर्शन किया। इसके बाद सीआरपीएफ के अधिकारी और जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया।

गार्ड ऑफ ऑनर के बाद अंतिम यात्रा रामबीघा स्थित आवास से निकली और देवरी सोन नदी स्थित मुक्तिधाम पहुंची। अंतिम यात्रा में सीआरपीएफ के जवानों के साथ हुसैनाबाद पुलिस अधिकारी, जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। मुक्तिधाम में उनके पुत्र सचिन पाल ने मुखाग्नि दी।

ड्यूटी के दौरान सर्विस राइफल से खुद को मारी गोली
बताया गया कि रविवार सुबह करीब 7:30 बजे राँची के तिरिल स्थित सीआरपीएफ कैंप में ड्यूटी के दौरान भुवनेश्वर पाल ने अपनी सर्विस राइफल से खुद को गोली मार ली थी। घटना के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।

भुवनेश्वर पाल के निधन की खबर मिलते ही उनके परिवार और गांव में शोक की लहर दौड़ गयी। उनके पीछे पत्नी, दो बेटियां और एक बेटा हैं। ग्रामीणों के अनुसार भुवनेश्वर मिलनसार और खुशमिजाज स्वभाव के व्यक्ति थे। उनके इस कदम से ग्रामीण भी स्तब्ध हैं।

परिजनों ने अधिकारियों पर लगाया मानसिक दबाव का आरोप
इधर, मृतक जवान के बेटे सचिन पाल और बेटी अलका प्रिया ने कुछ वरिष्ठ सीआरपीएफ अधिकारियों पर पिता को कथित रूप से मानसिक दबाव में रखने का आरोप लगाया है। परिजनों का दावा है कि काम को लेकर वह काफी परेशान थे।बेटी अलका प्रिया के अनुसार, 26 सितंबर को फोन पर बातचीत के दौरान उनके पिता ने बताया था कि वरिष्ठ अधिकारी सीके चक्रवर्ती ने उन्हें डांट-फटकार लगायी थी। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि डीआईजी स्तर के अधिकारी की ओर से काम को लेकर दबाव बनाया जा रहा था और नौकरी छोड़ने तक की बात कही गयी थी।

परिजनों का आरोप है कि भुवनेश्वर पाल को मेस ड्यूटी में लगाया गया था, जिसे लेकर भी वह परेशान रहते थे। परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और घटना के पीछे की वास्तविक वजह सामने लाने की मांग की है।हालांकि, वरिष्ठ अधिकारियों पर लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। घटना के वास्तविक कारण और आरोपों की सच्चाई जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

बड़ी संख्या में लोग अंतिम विदाई में हुए शामिल
अंतिम यात्रा में सीआरपीएफ के अधिकारी-जवानों के अलावा हुसैनाबाद थाना प्रभारी सह पुलिस निरीक्षक चंदन कुमार, वार्ड पार्षद राजेंद्र पाल, धर्मेंद्र पाल, अशोक पाल, कृष्णा बैठा, पूर्व मुखिया अरविंद पासवान, समाजसेवी इम्तियाज आलम, वकील सिद्दीकी, प्रणव सुमन और रविशंकर समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण और सामाजिक लोग मौजूद रहे।भुवनेश्वर पाल की अंतिम विदाई के दौरान माहौल गमगीन रहा। परिवार और ग्रामीणों ने नम आंखों से अपने प्रियजन को अंतिम विदाई दी।

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