आंसुओं के बीच पंचतत्व में विलीन हुए सुदिव्य कुमार सोनू, 12 वर्षीय बेटे ने दी मुखाग्नि
गिरिडीह।झारखण्ड की राजनीति ने रविवार को अपने एक प्रमुख चेहरे को नम आंखों से अंतिम विदाई दी। राज्य सरकार के दिवंगत मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। जब उनके 12 वर्षीय बेटे हर्ष कुमार ने पिता को मुखाग्नि दी, तो वहां मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम हो गईं। कुछ ही पलों में अंतिम संस्कार स्थल पर सन्नाटा, शोक और भावनाओं का ऐसा माहौल बन गया, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल था।
अंतिम यात्रा में साथ चले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन
सुदिव्य कुमार सोनू की अंतिम यात्रा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत सरकार के कई मंत्री, सत्ता पक्ष और विपक्ष के वरिष्ठ नेता तथा बड़ी संख्या में समर्थक शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने स्वयं दिवंगत मंत्री के पार्थिव शरीर को कंधा दिया और उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की।अंतिम यात्रा जिस रास्ते से गुजरी, वहां लोगों की भीड़ उमड़ती चली गई। समर्थक हाथ जोड़कर अपने नेता को अंतिम विदाई देते रहे। कई लोगों की आंखों से आंसू छलक पड़े।
बेटे ने दी पिता को आखिरी विदाई
अंतिम संस्कार का सबसे भावुक क्षण तब आया, जब महज 12 साल के हर्ष कुमार ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। पिता की चिता के सामने खड़े बेटे की तस्वीर ने पूरे माहौल को गमगीन कर दिया। परिवार के लोगों ने भारी मन से अंतिम संस्कार की धार्मिक रस्में पूरी कीं।इस दौरान वहां मौजूद लोगों के बीच गहरा सन्नाटा पसरा रहा। हर कोई अपने प्रिय नेता की अंतिम विदाई का साक्षी बन रहा था।
राजनीतिक मतभेद पीछे छूटे, एकजुट दिखे नेता
सुदिव्य कुमार सोनू की अंतिम विदाई में झारखण्ड की राजनीति का एक अलग ही चेहरा देखने को मिला। सत्ता और विपक्ष के कई नेता एक साथ नजर आए। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अलावा सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने पहुंचकर श्रद्धांजलि दी।नेताओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने यह दिखाया कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन किसी साथी के निधन का दुख सभी को एक मंच पर ला सकता है।
हजारों लोगों की भीड़ ने कहा—अलविदा सोनू भैया
अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए हजारों लोग पहुंचे। समर्थक और आम नागरिक घंटों तक अपने नेता के अंतिम दर्शन के लिए इंतजार करते रहे। किसी ने हाथ जोड़कर श्रद्धांजलि दी तो किसी की आंखें आंसुओं से भर आईं।पूरे इलाके में शोक का माहौल रहा। लोगों के बीच बस एक ही चर्चा थी।एक ऐसा नेता चला गया, जिसने अपने राजनीतिक सफर में लोगों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई थी।

सुदिव्य कुमार सोनू के निधन को झारखण्ड की राजनीति के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है। उनके अचानक चले जाने से सरकार ने एक महत्वपूर्ण सहयोगी खोया है, वहीं समर्थकों और राजनीतिक साथियों के बीच भी गहरा शोक है।रविवार को जब सुदिव्य कुमार सोनू पंचतत्व में विलीन हुए, तब उनके अंतिम दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब उनकी लोकप्रियता की गवाही दे रहा था। जीवन का सफर भले ही थम गया, लेकिन लोगों के बीच छोड़ी गई उनकी यादें और राजनीतिक विरासत लंबे समय तक चर्चा में रहेंगी।

