मौत बनकर गिरी पेड़ की डाल, बाइक सवार युवक की मौके पर मौत, साथी गंभीर

राँची। अनगड़ा में रविवार शाम एक दर्दनाक हादसे ने सड़क किनारे खड़े खतरनाक पेड़ों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। राँची-मुरी मुख्य मार्ग पर पुरनापानी के पास अचानक सड़क किनारे पेड़ की एक विशाल डाल चलती बाइक पर जा गिरी। डाल की चपेट में आने से बाइक सवार 19 वर्षीय बरजुराम बेदिया की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसका साथी अमित बेदिया गंभीर रूप से घायल हो गया।

हादसा रविवार शाम करीब चार बजे हुआ। दोनों युवक जोन्हा की ओर से बाइक पर सवार होकर आ रहे थे। इसी दौरान पुरनापानी के समीप सड़क किनारे मौजूद पेड़ की भारी डाल अचानक टूटकर बाइक पर जा गिरी। अचानक हुए हादसे से युवकों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने गंभीर रूप से घायल अमित बेदिया को तत्काल अनगड़ा सीएचसी पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे बेहतर इलाज के लिए रिम्स रेफर कर दिया।वहीं, बरजुराम की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। हादसे की खबर मिलते ही उसके गांव टाटी मातकमडीह में मातम पसर गया।हादसे के बाद ग्रामीणों में वन विभाग और पथ निर्माण विभाग के खिलाफ नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि अनगड़ा से सिल्ली के बीच सड़क के किनारे कई सूखे और जर्जर पेड़ खड़े हैं, जो कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं।

ग्रामीणों के मुताबिक, मई और जून में भी आंधी के दौरान इसी मार्ग पर तीन पेड़ सड़क पर गिर चुके हैं। इसके बावजूद सड़क किनारे खड़े असुरक्षित पेड़ों को हटाने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।ग्रामीणों का आरोप है कि अगर समय रहते इन खतरनाक पेड़ों और उनकी कमजोर डालियों को हटाया गया होता, तो रविवार का हादसा टाला जा सकता था।

ग्रामीणों ने बताया कि सड़क किनारे मौजूद सूखे और असुरक्षित पेड़ों को हटाने का मुद्दा पहले भी उठ चुका है। विधायक अमित कुमार ने भी वन विभाग और पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों को ऐसे पेड़ों को चिन्हित कर हटाने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद कई खतरनाक पेड़ अब भी सड़क किनारे खड़े हैं।
रविवार की घटना के बाद ग्रामीणों ने मांग की है कि अनगड़ा-सिल्ली मार्ग पर सड़क किनारे मौजूद सभी सूखे, जर्जर और खतरनाक पेड़ों का तत्काल सर्वे कराया जाए और उन्हें हटाया जाए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी दर्दनाक घटना का सामना न करना पड़े।एक युवक की जान चली गई, दूसरा अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा है। हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सड़क किनारे खड़े इन ‘मौत के पेड़ों’ को हटाने के लिए आखिर किसी और हादसे का इंतजार क्यों?

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