खाकी की कलाई पर सजी राखी, बच्चों के चेहरों पर खिली मुस्कान….राँची पुलिस ने मनाया रक्षाबंधन
राँची। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर राँची पुलिस का मानवीय और संवेदनशील चेहरा देखने को मिला। आमतौर पर कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण की जिम्मेदारी निभाने वाली पुलिस इस बार बच्चों के बीच पहुंची और उनके साथ परिवार के सदस्य की तरह रक्षाबंधन का पर्व मनाया। राँची के पंडरा स्थित बालाश्रय और चुटिया स्थित प्रेमाश्रय में पुलिस अधिकारियों ने बच्चों के साथ समय बिताकर उन्हें स्नेह, सुरक्षा और अपनत्व का एहसास कराया।
राँची के वरीय पुलिस अधीक्षक राकेश रंजन के नेतृत्व में पुलिस अधीक्षक नगर, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण, पुलिस अधीक्षक यातायात, कोतवाली एएसपी और चुटिया थाना प्रभारी समेत अन्य पुलिस पदाधिकारी दोनों आश्रम पहुंचे। यहां बच्चों ने पुलिस अधिकारियों की कलाई पर राखियां बांधीं। बच्चों ने पुलिस अधिकारियों को अपना भाई और संरक्षक मानते हुए उनके प्रति स्नेह और विश्वास प्रकट किया।

बच्चों के साथ बैठकर भोजन किया,जाना पढ़ाई और भविष्य का सपना
रक्षाबंधन के कार्यक्रम को सिर्फ औपचारिकता तक सीमित नहीं रखा गया। पुलिस अधिकारियों ने बच्चों के साथ बैठकर भोजन किया और काफी समय उनके बीच बिताया। इस दौरान अधिकारियों ने बच्चों से उनकी पढ़ाई, पसंद-नापसंद, रुचियों और भविष्य की इच्छाओं के बारे में बातचीत की।पुलिस अधिकारियों ने बच्चों को उपहार भी भेंट किए और उनका उत्साह बढ़ाया। अधिकारियों के साथ घुल-मिलकर बच्चों के चेहरे पर भी खुशी साफ नजर आई। पुलिस अधिकारियों के साथ बच्चों का यह आत्मीय संवाद पूरे कार्यक्रम को भावुक और यादगार बना गया।
त्योहारों के जरिए मजबूत हो रहा पुलिस-पब्लिक का रिश्ता
राँची पुलिस का यह आयोजन सामाजिक पुलिसिंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देखा जा रहा है। पुलिस का काम सिर्फ अपराधियों पर कार्रवाई करना या कानून-व्यवस्था बनाए रखना ही नहीं है, बल्कि समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के साथ खड़ा होना भी उसकी जिम्मेदारी है।
रक्षाबंधन जैसे त्योहारों के माध्यम से पुलिस और आम लोगों के बीच की दूरी कम करने तथा विश्वास का रिश्ता मजबूत करने का प्रयास किया गया। आश्रम के बच्चों के साथ त्योहार मनाकर पुलिस अधिकारियों ने यह संदेश देने की कोशिश की कि समाज का कोई भी बच्चा खुद को अकेला न समझे और जरूरत के समय पुलिस उसके साथ खड़ी है।
‘हर बच्चे को मिले स्नेह, सुरक्षा और सम्मान’
कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों ने कहा कि समाज के प्रत्येक बच्चे को स्नेह, सुरक्षा और सम्मान मिलना चाहिए। ऐसे आयोजन बच्चों के मनोबल को बढ़ाने के साथ-साथ पुलिस और समाज के बीच विश्वास एवं संवेदनशीलता को मजबूत करते हैं।
अधिकारियों ने कहा कि त्योहार केवल परंपराओं को निभाने का अवसर नहीं होते, बल्कि समाज के उन लोगों तक खुशियां पहुंचाने का माध्यम भी हैं, जिन्हें अपनत्व और साथ की सबसे अधिक जरूरत होती है। रक्षाबंधन के मौके पर आश्रम के बच्चों के साथ समय बिताना इसी सामाजिक जिम्मेदारी की भावना का हिस्सा है।
कानून की रखवाली के साथ रिश्तों की भी रखवाली
राँची पुलिस के इस आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि खाकी सिर्फ सख्ती और कानून का प्रतीक नहीं है। पुलिस जरूरत पड़ने पर समाज के लोगों के सुख-दुख में सहभागी बनकर उनके साथ खड़ी हो सकती है। बालाश्रय और प्रेमाश्रय के बच्चों के लिए यह रक्षाबंधन इसलिए भी खास रहा, क्योंकि उन्हें पुलिस अधिकारियों में भाई और संरक्षक दोनों का भाव नजर आया।
कार्यक्रम के अंत में बच्चों को उपहार देकर उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी गईं। रक्षाबंधन का यह आयोजन बच्चों के लिए एक यादगार अनुभव बन गया। इस अवसर पर स्थानीय थाना के पुलिस पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
राँची पुलिस की यह पहल सामाजिक पुलिसिंग की उस सोच को मजबूत करती है, जिसमें पुलिस और जनता के बीच सिर्फ कानून का नहीं, बल्कि विश्वास, संवेदना और सहयोग का रिश्ता भी कायम हो।

