देवघऱ: JPSC परीक्षा रद्द होते ही बदली श्रावणी मेला की तस्वीर, 70 कर्मियों ने छोड़ी ड्यूटी

देवघर। 11वीं से 13वीं JPSC से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले का असर अब बाबाधाम के श्रावणी मेला की व्यवस्थाओं पर भी दिखाई देने लगा है। परीक्षा के जरिए सरकारी सेवा में आए करीब 70 अधिकारी-कर्मचारी इस बार मेला ड्यूटी में लगाए गए थे। अधिसूचना जारी होने के बाद इनमें से कई ने अपनी ड्यूटी छोड़ दी और अपने गृह क्षेत्र अथवा रांची के लिए रवाना हो गए।

मेला ड्यूटी में तैनात अमित आनंद भी ऐसे अधिकारियों में शामिल हैं। सरकार के निर्णय की जानकारी मिलते ही उन्होंने अपने वरीय अधिकारियों को इसकी सूचना दी और मजिस्ट्रेट के रूप में मिली जिम्मेदारी से अलग हो गए। इसी तरह ओपी-5 में मजिस्ट्रेट की जिम्मेदारी संभाल रहे हरे राम ने भी ड्यूटी छोड़ दी।

रातोंरात बदला मेला ड्यूटी का समीकरण
मंगलवार देर रात JPSC की 11वीं से 13वीं परीक्षाओं को रद्द किए जाने की घोषणा के बाद मेला ड्यूटी में तैनात संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों के बीच हलचल तेज हो गई। इन परीक्षाओं के जरिए नियुक्त हुए कर्मियों के भविष्य को लेकर अचानक बनी स्थिति का सीधा असर देवघर की मेला ड्यूटी पर पड़ा।जिला प्रशासन के अनुसार, श्रावणी मेला में ऐसे लगभग 70 अधिकारी-कर्मचारी तैनात थे। निर्णय के बाद कई लोगों ने प्रशासन को इसकी जानकारी दी और अपनी जिम्मेदारियों से हट गए।

खाली हुई जिम्मेदारियां, अब नए अधिकारियों पर भरोसा
देवघर के उपायुक्त सौरभ कुमार भुवानिया ने कहा कि उच्च स्तर पर लिए गए निर्णय के बाद कुछ अधिकारी-कर्मचारियों ने मेला ड्यूटी से खुद को अलग किया है। उनकी जगह उन अधिकारियों और कर्मचारियों को जिम्मेदारी दी जाएगी, जो अभी मेला ड्यूटी में शामिल नहीं हैं।प्रशासन का दावा है कि इससे मेला व्यवस्था प्रभावित नहीं होने दी जाएगी। खासकर अंतिम सोमवारी को देखते हुए अतिरिक्त मानव संसाधन लगाने की तैयारी की जा रही है।

तीन सोमवारी निकल गईं, अब अंतिम परीक्षा
डीसी ने कहा कि प्रशासन के लिए राहत की बात यह है कि सरकार का निर्णय तीन सोमवारी गुजरने के बाद आया है। अब श्रावणी मेला की केवल चौथी और अंतिम सोमवारी बाकी है। ऐसे में अंतिम सोमवारी के दौरान व्यवस्था को संभालने के लिए प्रशासन दो से तीन गुना अधिक मेहनत करेगा।

पुलिस व्यवस्था संभालेगी सुरक्षा का मोर्चा
मेला व्यवस्था से जुड़े समाजसेवी सरोज सिंह के मुताबिक अधिकारियों के हटने से प्रशासनिक स्तर पर दबाव जरूर बढ़ सकता है, लेकिन श्रद्धालुओं की सुरक्षा में पुलिस बल की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इसलिए सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है।उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर स्थानीय लोग भी प्रशासन के साथ खड़े रहेंगे और मेला व्यवस्था को सुचारू रखने में हरसंभव सहयोग करेंगे।

चौथी सोमवारी से पहले प्रशासन की असली चुनौती
अब सबसे बड़ी चुनौती उन पदों को तत्काल भरने की है, जिन अधिकारियों-कर्मचारियों ने JPSC परीक्षा रद्द होने के बाद मेला ड्यूटी छोड़ी है। अंतिम सोमवारी पर आमतौर पर श्रद्धालुओं की भीड़ और प्रशासनिक दबाव बढ़ जाता है। ऐसे में नए अधिकारियों की तैनाती, जिम्मेदारियों का बंटवारा और मौके पर बेहतर समन्वय जिला प्रशासन के लिए अग्निपरीक्षा साबित हो सकता है।हालांकि प्रशासन ने साफ किया है कि अंतिम सोमवारी के लिए तैयारी पूरी है और श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए उपलब्ध संसाधनों के साथ पूरी ताकत झोंकी जाएगी।

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