सील तोड़कर तरंगनी लिकर्स फैक्ट्री से 20 हजार लीटर स्प्रिट और DVR गायब, पूर्व MLC सुबोध राय समेत कई पर FIR

 

राँची।जिले के ओरमांझी थाना क्षेत्र के उकरीद गांव स्थित तरंगनी लिकर्स फैक्ट्री में उत्पाद विभाग की कार्रवाई के बाद अब एक नया और गंभीर मामला सामने आया है। जिस फैक्ट्री को अवैध शराब की बरामदगी के बाद सरकारी स्तर पर सील किया गया था, उसी परिसर की सील टूटने, ताले गायब मिलने और बड़ी मात्रा में सामान के गायब होने की पुष्टि जांच के दौरान हुई है। सबसे अहम बात यह है कि फैक्ट्री से करीब 20 हजार लीटर स्प्रिट, सीसीटीवी का DVR और अन्य सामान गायब मिले हैं।

मामले को लेकर उत्पाद विभाग ने फैक्ट्री के निदेशक एवं बिहार के पूर्व एमएलसी सुबोध कुमार राय समेत अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ ओरमांझी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी सील लगे परिसर में किसने प्रवेश किया, सील कब और कैसे तोड़ी गई तथा वहां रखे सामान को बाहर ले जाने में किन लोगों की भूमिका रही।

उत्पाद विभाग और राँची पुलिस की टीम सोमवार को मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में फैक्ट्री का निरीक्षण करने पहुंची थी। नियमानुसार मुख्य गेट पर लगी सील खोलकर जब टीम अंदर पहुंची तो परिसर की स्थिति देखकर अधिकारी भी चौंक गए।जांच में पीछे स्थित ब्लेंडिंग हॉल का शटर करीब दो फीट खुला मिला। शटर पर लगाया गया सीलबंद ताला भी मौके से गायब था। इसके अलावा बॉटलिंग हॉल और कार्यालय के बीच मौजूद दरवाजे का ताला टूटा हुआ पाया गया।जांच टीम ने जब अलग-अलग हिस्सों का निरीक्षण किया तो कई स्थानों पर छेड़छाड़ के निशान मिले। इससे प्रथमदृष्टया आशंका जताई गई कि फैक्ट्री को सील किए जाने के बाद किसी ने अंदर प्रवेश कर महत्वपूर्ण सामान और साक्ष्यों को हटाया।

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल करीब 20 हजार लीटर स्प्रिट के गायब होने को लेकर है। इतनी बड़ी मात्रा में स्प्रिट का फैक्ट्री परिसर से गायब होना जांच एजेंसियों के लिए गंभीर विषय बन गया है।पुलिस अब फैक्ट्री के स्टॉक रजिस्टर, उत्पाद विभाग के रिकॉर्ड, सील किए जाने के समय तैयार की गई सूची और बाद में हुई जांच के रिकॉर्ड का मिलान कर सकती है। इससे यह पता लगाने की कोशिश होगी कि सील लगाए जाने के समय परिसर में कितना स्टॉक मौजूद था और जांच के समय उसमें कितनी कमी पाई गई।

CCTV का DVR भी गायब, जांच में सबसे अहम कड़ी
फैक्ट्री में लगे सीसीटीवी कैमरों का DVR गायब मिलना इस मामले को और गंभीर बना रहा है। सील लगे परिसर में किसी के प्रवेश और वहां से सामान बाहर ले जाने की स्थिति में सीसीटीवी फुटेज पुलिस के लिए सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकता था।
DVR के गायब होने के बाद जांचकर्ताओं के सामने यह सवाल है कि क्या इसे जानबूझकर हटाया गया, ताकि फैक्ट्री के अंदर आने-जाने वालों की पहचान न हो सके। हालांकि, यह फिलहाल जांच का विषय है और पुलिस की विस्तृत जांच के बाद ही इसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

लैब और कार्यालय के ताले भी टूटे
जांच के दौरान फैक्ट्री की लैब का लॉक भी टूटा मिला। इसी लैब में ईएएल रखे जाने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा रेडिको खेतान लिमिटेड के कार्यालय का ताला भी टूटा पाया गया।
एक ही परिसर में ब्लेंडिंग हॉल, लैब और कार्यालय सहित कई जगहों पर ताले टूटे मिलने से जांच एजेंसियों का शक और गहरा गया है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या सभी जगहों पर एक ही समय में प्रवेश किया गया या अलग-अलग समय पर परिसर में गतिविधियां हुईं।

परिसर में बिखरी मिली तैयार शराब की पेटियां
जांच के दौरान फैक्ट्री परिसर में कुछ तैयार शराब की पेटियां बिखरी हुई भी मिलीं। इससे जांचकर्ताओं को आशंका है कि सील टूटने के बाद परिसर में किसी प्रकार की गतिविधि हुई होगी।
हालांकि, शराब की पेटियां किस हालत में और किस उद्देश्य से वहां बिखरी मिलीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। पुलिस बरामद और गायब स्टॉक का विस्तृत मिलान कर रही है।

30 जून की छापेमारी के बाद फैक्ट्री हुई थी सील
तरंगनी लिकर्स फैक्ट्री पहले से ही उत्पाद विभाग की कार्रवाई के कारण जांच के घेरे में है। 30 जून 2026 को उत्पाद विभाग की टीम ने फैक्ट्री में छापेमारी की थी। इस दौरान बड़ी मात्रा में ऐसी शराब बरामद होने का दावा किया गया था, जिस पर दिल्ली और पंजाब से संबंधित स्टीकर लगे थे।उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार छापेमारी में 303 पेटी अवैध विदेशी शराब और 70 पेटी बीयर बरामद की गई थी। आरोप यह था कि फैक्ट्री को झारखंड के लिए शराब की बॉटलिंग की अनुमति थी, जबकि बरामद शराब पर दूसरे राज्यों में बिक्री से संबंधित स्टीकर मिले थे।इस कार्रवाई के बाद फैक्ट्री को सील कर दिया गया था और मामले में कई लोगों की गिरफ्तारी भी हुई थी। पूर्व एमएलसी सुबोध राय, उनके चालक देवेंद्र भगत और कर्मचारी रविकांत राय की गिरफ्तारी की रिपोर्ट भी सामने आई थी।

अब सील टूटने की जांच ने बढ़ाई चिंता
अवैध शराब बरामदगी की जांच अभी पूरी तरह खत्म भी नहीं हुई थी कि सील टूटने और सामान गायब होने का मामला सामने आ गया। ऐसे में अब पुलिस के सामने दो महत्वपूर्ण पहलू हैं।
पहला, फैक्ट्री में सील लगने के बाद कौन-कौन लोग अंदर पहुंचे?
दूसरा, करीब 20 हजार लीटर स्प्रिट, DVR और अन्य सामान परिसर से कैसे बाहर निकाला गया?इन सवालों के जवाब के लिए पुलिस फैक्ट्री में मौजूद रिकॉर्ड, स्टॉक का हिसाब, कर्मचारियों से पूछताछ, सील लगाने की प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों के बयान और उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर सकती है।

पहले भी मांगा जा चुका है जवाब, लाइसेंस पर भी फैसला संभव
तरंगनी लिकर्स मामले में प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई चल रही है। जुलाई में सामने आई रिपोर्ट के अनुसार अवैध शराब बरामदगी मामले में पूर्व एमएलसी सुबोध राय, रेडिको खेतान और संबंधित उत्पाद दारोगा समेत आरोपित पक्षों से जवाब मांगा गया था। सभी संबंधित पक्षों द्वारा अपना जवाब सौंपे जाने के बाद रांची उपायुक्त स्तर पर उन जवाबों की समीक्षा की जानी थी। इसके बाद लाइसेंस रद्द करने समेत अन्य कार्रवाई पर निर्णय की संभावना जताई गई थी।अब सील टूटने और स्टॉक गायब होने की प्राथमिकी ने मामले को एक नया मोड़ दे दिया है।

 

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