तीर्थयात्री बनकर कर्नाटक पुलिस ने बिछाया जाल, वैशाली से पकड़े गए 93 लाख लूट और हत्याकांड के आरोपी…

–तीर्थयात्रियों का भेष धरकर कर्नाटक पुलिस ने चलाया ऑपरेशन, वैशाली से दबोचे गए दोनों आरोपी; सोनारी के परदेशीपाड़ा में छापेमारी, बाइक की टंकी से कारतूस और दस्तावेज बरामद

जमशेदपुर। कर्नाटक के बीदर में दिनदहाड़े हुई 93 लाख रुपये की सनसनीखेज ATM कैश लूट और हत्या के मामले में करीब 19 महीने बाद पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। कर्नाटक पुलिस ने इस वारदात के दो प्रमुख आरोपियों को बिहार के वैशाली जिले से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आलोक कुमार उर्फ अंबानी और अमन सिंह के रूप में हुई है। दोनों मूल रूप से बिहार के वैशाली जिले के रहने वाले बताए जा रहे हैं।गिरफ्तारी के बाद मंगलवार सुबह कर्नाटक पुलिस की टीम दोनों आरोपियों को लेकर जमशेदपुर पहुंची और सोनारी थाना क्षेत्र के परदेशीपाड़ा में छापेमारी की। पुलिस की कार्रवाई के दौरान एक बाइक की टंकी से दो जिंदा कारतूस तथा कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए। पुलिस सूत्रों के मुताबिक दोनों आरोपियों के पास से दो पिस्तौल भी जब्त की गई हैं।

20 दिनों तक चला गुप्त ऑपरेशन
आरोपियों तक पहुंचना कर्नाटक पुलिस के लिए आसान नहीं था। पुलिस ने कथित तौर पर करीब 20 दिनों तक बेहद गोपनीय तरीके से अभियान चलाया। अपनी पहचान और गतिविधियों को छिपाने के लिए पुलिसकर्मियों ने धार्मिक तीर्थयात्रियों का भेष धारण कर आरोपियों की गतिविधियों पर नजर रखी।जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि बीदर की वारदात के बाद आरोपी लगातार अपना ठिकाना बदलते रहे। इसी क्रम में उनका संपर्क और ठिकाना बिहार तथा फिर जमशेदपुर से जुड़ता गया। वैशाली में गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ की तो जमशेदपुर के सोनारी स्थित परदेशीपाड़ा में उनके ठिकाने का पता चला।

परिवार के साथ किराये के मकानों में रह रहे थे
पुलिस जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपी सोनारी के परदेशीपाड़ा इलाके में अलग-अलग किराये के मकानों में रह रहे थे। खास बात यह है कि दोनों यहां अपने परिवार के साथ रह रहे थे, जिससे स्थानीय स्तर पर उनकी गतिविधियों पर ज्यादा संदेह नहीं हुआ।पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि जमशेदपुर में रहने के दौरान दोनों किन लोगों के संपर्क में थे और क्या उन्होंने यहां भी किसी आपराधिक गतिविधि को अंजाम दिया था। पुलिस यह भी खंगाल रही है कि दोनों को शहर में ठिकाना दिलाने, आर्थिक मदद करने या उनके अपराध से जुड़े नेटवर्क को संचालित करने में किसी स्थानीय व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।

बाइक की टंकी से मिले कारतूस ने बढ़ाया जांच का दायरा
सोनारी के परदेशीपाड़ा में तलाशी के दौरान पुलिस को बाइक की टंकी से दो जिंदा कारतूस मिलने को अहम सुराग माना जा रहा है। इसके अलावा कई दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। दो पिस्तौल जब्त किए जाने की बात भी सामने आई है।अब जांच एजेंसियां बरामद हथियारों और कारतूसों की फॉरेंसिक जांच के साथ यह पता लगाने का प्रयास करेंगी कि इनका इस्तेमाल बीदर की वारदात में हुआ था या किसी अन्य आपराधिक घटना में। हथियारों की बैलिस्टिक जांच से इस मामले की जांच को महत्वपूर्ण दिशा मिल सकती है।

16 जनवरी 2025 को बीदर में मचा था हड़कंप
यह पूरी वारदात 16 जनवरी 2025 को कर्नाटक के बीदर शहर में शुरू हुई थी। SBI के ATM में नकदी डालने के लिए कैश मैनेजमेंट कंपनी की टीम पहुंची थी। इसी दौरान हथियारबंद बदमाशों ने हमला कर दिया।पुलिस के अनुसार हमलावरों ने कर्मचारियों पर मिर्च पाउडर फेंका और फिर गोलियां चला दीं। हमले में कैश कस्टोडियन गिरी वेंकटेश की मौत हो गई, जबकि उनके साथी शिवकुमार गंभीर रूप से घायल हुए। इसके बाद अपराधी करीब 93 लाख रुपये से भरा कैश बॉक्स लेकर फरार हो गए।घटना बीदर के शिवाजी चौक इलाके में SBI की मुख्य शाखा के पास हुई थी। घटनास्थल शहर के व्यस्त इलाके में होने के कारण वारदात के बाद भारी दहशत फैल गई थी।

CCTV में दिखा था वारदात के बाद का पूरा घटनाक्रम
मामले की जांच में CCTV फुटेज पुलिस के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक फुटेज में हमलावरों को कैश बॉक्स लेकर भागते हुए देखा गया था। भारी बॉक्स के कारण उन्हें भागने में परेशानी भी हुई और एक समय नकदी का बॉक्स गिर गया था। स्थानीय लोगों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन हथियारबंद अपराधी मौके से भागने में सफल रहे।वारदात के बाद कर्नाटक पुलिस ने कई टीमें गठित कर आरोपियों की तलाश शुरू की। फरवरी 2025 में पुलिस ने सार्वजनिक रूप से दो संदिग्धों की पहचान अमन कुमार और आलोक कुमार उर्फ अशुतोष/अंबानी के रूप में बताई थी और दोनों की तलाश में लोगों से सहयोग भी मांगा था।

बीदर के बाद हैदराबाद में भी वारदात का आरोप
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को कथित तौर पर आरोपियों के हैदराबाद कनेक्शन का भी पता चला। रिपोर्ट के अनुसार बीदर की घटना के बाद आरोपी हैदराबाद पहुंचे थे और वहां भी एक घटना में उनकी संलिप्तता सामने आई थी। एक रिपोर्ट में बताया गया था कि चोरी की रकम से जुड़े संदेह के दौरान हैदराबाद में एक ट्रैवल एजेंसी मैनेजर पर गोली चलाने की घटना भी सामने आई थी।
इससे जांचकर्ताओं को यह संदेह मजबूत हुआ कि बीदर की घटना कोई अकेली वारदात नहीं थी, बल्कि आरोपी एक बड़े अंतरराज्यीय आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं।

मिर्जापुर और अन्य राज्यों की घटनाओं से भी जुड़ रही कड़ियां
पुलिस की जांच में आरोपियों का नाम उत्तर प्रदेश और तेलंगाना की कई आपराधिक घटनाओं से जुड़ने की बात सामने आई है। ऐसे में अब जांच का फोकस केवल बीदर की 93 लाख रुपये की लूट तक सीमित नहीं है।जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि गिरोह में और कितने सदस्य हैं, वारदात के लिए रेकी कौन करता था, हथियार और वाहन कौन उपलब्ध कराता था तथा लूटी गई रकम को ठिकाने लगाने का नेटवर्क किस तरह काम करता था।

19 महीने बाद गिरफ्तारी, अब खुलेगा पूरा नेटवर्क
बीदर की घटना के बाद आरोपी करीब डेढ़ साल से अधिक समय तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहे। इस दौरान उनके अलग-अलग राज्यों में ठिकाने बदलने और पहचान छिपाकर रहने की बात सामने आई है। यही वजह है कि उनकी गिरफ्तारी को कर्नाटक पुलिस की जांच में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।अब दोनों आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पुलिस लूट की रकम, हथियारों की सप्लाई, फरार सहयोगियों, फर्जी पहचान/दस्तावेज और अलग-अलग राज्यों में बनाए गए ठिकानों के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश करेगी।

जांच का एक अहम सवाल यह भी है कि बिहार के वैशाली के रहने वाले आरोपियों ने जमशेदपुर को अपना ठिकाना क्यों बनाया। परिवार के साथ किराये के मकानों में रहना और सामान्य जीवन जीने का प्रयास इस बात की ओर संकेत कर सकता है कि आरोपी अपनी पहचान छिपाकर लंबे समय तक यहां रहने की योजना में थे। हालांकि, इस पहलू पर पुलिस की आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी।फिलहाल सोनारी के परदेशीपाड़ा से बरामद हथियार, कारतूस और दस्तावेज जांच के महत्वपूर्ण साक्ष्य माने जा रहे हैं। इनकी जांच से बीदर की वारदात के साथ-साथ दूसरे राज्यों में हुई घटनाओं से दोनों आरोपियों की कथित भूमिका जोड़ने में पुलिस को मदद मिल सकती है।

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