समस्तीपुर में देर रात डबल मर्डर से सनसनी: कुख्यात प्रभात चौधरी और साथी सन्नी की गोलियों से भूनकर हत्या, गैंगवार और शराब तस्करी की रंजिश की आशंका

समस्तीपुर। बिहार के समस्तीपुर जिले में मंगलवार की देर रात अपराधियों ने एक सनसनीखेज वारदात को अंजाम देते हुए कुख्यात अपराधी प्रभात चौधरी और उसके साथी सन्नी कुमार की ताबड़तोड़ गोलीबारी कर हत्या कर दी। चकमेहसी थाना क्षेत्र के नामापुर-दरियापुर स्थित बागमती नदी पुल के समीप हुई इस डबल मर्डर की घटना से पूरे इलाके में दहशत फैल गई। पुलिस शुरुआती जांच में गैंगवार, अवैध शराब कारोबार और पुराने वर्चस्व की लड़ाई को हत्या की संभावित वजह मानकर जांच कर रही है।
फोन कर बुलाया, फिर घात लगाकर बरसाईं गोलियां
मिली जानकारी के अनुसार, नीमा चकहैदर निवासी प्रभात चौधरी को मंगलवार शाम किसी का फोन आया था। इसके बाद वह अपने तीन सहयोगियों के साथ स्कॉर्पियो से नामापुर-दरियापुर की ओर निकला। परिजनों का आरोप है कि उसे पहले से रची गई साजिश के तहत मिलने के बहाने बुलाया गया था।जैसे ही प्रभात की गाड़ी बागमती नदी पुल के पास पहुंची, पहले से घात लगाए बैठे करीब आठ से दस हथियारबंद बदमाशों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। हमले में प्रभात चौधरी के सिर में और बेलसंडी निवासी उसके साथी सन्नी कुमार की पीठ में गोली लगी। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। वारदात के बाद हमलावर अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए, जबकि प्रभात के साथ मौजूद अन्य लोग जान बचाकर भाग निकले।

परिवार ने लगाया साजिश का आरोप
मृतक प्रभात के पिता संजय चौधरी ने बताया कि उनका बेटा शाम करीब सात बजे घर से निकला था। उनका कहना है कि प्रभात को सुनियोजित तरीके से फोन कर घटनास्थल पर बुलाया गया और फिर उसकी हत्या कर दी गई। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
पहले भी हो चुका था जानलेवा हमला
प्रभात चौधरी पर यह पहला हमला नहीं था। वर्ष 2023 में समस्तीपुर कोर्ट परिसर में गवाही के दौरान भी उस पर जानलेवा फायरिंग हुई थी। उस मामले में पुलिस जांच के बाद एक राजनीतिक व्यक्ति को मास्टरमाइंड बताते हुए गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। घटना में लापरवाही बरतने के आरोप में दो पुलिस अधिकारियों को भी निलंबित किया गया था। एक साल पहले ही प्रभात जेल से बाहर आया था।
अपराध की दुनिया में था सक्रिय
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार प्रभात चौधरी पर अवैध शराब तस्करी, आर्म्स एक्ट समेत कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे। पुलिस का मानना है कि अवैध शराब के कारोबार में पैसों के लेनदेन, पुराने विवाद या इलाके में वर्चस्व की लड़ाई के कारण इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया हो सकता है। यह भी जानकारी सामने आई है कि प्रभात के गैंग से अलग होकर कुछ लोगों ने अपना अलग गिरोह बना लिया था, जिसके बाद से दोनों पक्षों के बीच तनाव बना हुआ था।
पुलिस कई बिंदुओं पर कर रही जांच
घटना की सूचना मिलते ही चकमेहसी थाना पुलिस और वरीय अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है तथा हमलावरों की पहचान के लिए विशेष टीम गठित की गई है।
चकमेहसी थानाध्यक्ष जितेंद्र सहनी ने कहा कि हत्या के पीछे की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है और सभी पहलुओं पर जांच जारी है।
वहीं सदर डीएसपी-2 संजय कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि प्रभात चौधरी का अपना गिरोह था, जिससे अलग होकर कुछ लोगों ने नया गैंग बना लिया था। पुलिस इस एंगल के साथ-साथ शराब तस्करी और पुरानी रंजिश से जुड़े सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच कर रही है। अधिकारियों का दावा है कि आरोपियों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी की जाएगी।

