JSSC-CGL में नया खुलासा:ब्लैकलिस्ट कंपनी को कैसे मिला परीक्षा का ठेका…CID ने खोली जांच की नई परत

 

राँची। झारखण्ड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की सीजीएल परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। सीआईडी की विशेष जांच टीम (SIT) का फोकस अब परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी आईसीएन (ICN) पर है। जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि जिस कंपनी को पहले ही केंद्रीय एजेंसियों और राज्य बोर्डों ने ब्लैकलिस्ट कर दिया था, उसी कंपनी की भूमिका JSSC-CGL परीक्षा में कैसे तय हुई। अब सीआईडी इसी कड़ी की तह तक पहुंचने में जुटी है।

दिल्ली से गिरफ्तार आईसीएन के कर्मचारी सोमांश प्रकाश और राहुल कुमार से पांच दिन की रिमांड के तीसरे दिन भी लगातार पूछताछ हुई। जांचकर्ता यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आईसीएन की परीक्षा संचालन में वास्तविक भूमिका क्या थी और परीक्षा कराने वाली एजेंसी मेसर्स वेबेल टेक्नोलॉजी के साथ उसका किस तरह का करार हुआ था।

सबसे बड़ा सवाल: ब्लैकलिस्ट होने के बाद भी कैसे मिला काम?

सीआईडी के सामने सबसे अहम सवाल यही है कि जब आईसीएन पहले से ही विवादों में घिरी और कई स्तरों पर ब्लैकलिस्ट घोषित कंपनी थी, तब उसे JSSC-CGL जैसी अहम परीक्षा की प्रक्रिया में जगह कैसे मिली। जांच एजेंसी अब टेंडर प्रक्रिया से लेकर एजेंसी के चयन तक हर पहलू की पड़ताल कर रही है।

बिहार में करोड़ों रुपये गबन का मामला

आईसीएन का विवादों से पुराना नाता रहा है। वर्ष 2019 में पटना के शास्त्रीनगर थाना में कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी और अमानत में खयानत (धारा 409 और 420) के तहत प्राथमिकी दर्ज हुई थी।आरोप था कि बिहार पुलिस सिपाही भर्ती (CSBC, विज्ञापन संख्या 02/2018) के दौरान कंपनी ने अभ्यर्थियों से फॉर्म शुल्क के रूप में वसूले गए 14.06 करोड़ रुपये बोर्ड के खाते में जमा नहीं किए। इस मामले के बाद कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया।

हाईकोर्ट और गृह मंत्रालय ने भी लगाई मुहर

सिर्फ बिहार बोर्ड ही नहीं, पटना हाईकोर्ट ने भी 2021 में कंपनी की ब्लैकलिस्टिंग को सही ठहराया था। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय के पुलिस फाइनेंस-V विंग ने 13 फरवरी 2024 के आदेश से आईसीएन को मंत्रालय और उसके सभी अधीनस्थ विभागों से एक वर्ष के लिए काली सूची में डाल दिया था।

अब जांच की दिशा बदली

सीआईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इतनी गंभीर कार्रवाई झेल चुकी कंपनी की JSSC-CGL परीक्षा में आखिर एंट्री कैसे हुई। एजेंसी के चयन, अनुबंध और परीक्षा संचालन में उसकी भूमिका से जुड़े दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। माना जा रहा है कि इस जांच से भर्ती प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं की कई और परतें खुल सकती हैं।

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