झारखण्ड से नक्सलियों-उग्रवादियों का सूपड़ा साफ होने के कगार पर: झारखण्ड पुलिस की नई सूची में अब बचे महज 18 इनामी फिरार, खात्मे की उलटी गिनती शुरू

 

-एक करोड़ के इनामी असीम मंडल और 25 लाख के इनामी टीपीसी चीफ ब्रजेश गंझू समेत शीर्ष कमांडरों पर सुरक्षा एजेंसियों का शिकंजा कसा, अंतिम प्रहार की तैयारी तेज

राँची। झारखण्ड में वामपंथी उग्रवाद और प्रतिबंधित नक्सली संगठनों के खिलाफ सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे अभियानों को बड़ी सफलता मिली है। झारखण्ड पुलिस द्वारा जारी 21 अगस्त 2026 तक के अधिकृत और अद्यतन आंकड़ों के अनुसार, राज्य में अब विभिन्न उग्रवादी संगठनों के कुल 18 इनामी फिरार नक्सली और उग्रवादी ही बचे हैं। राज्य सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के लगातार बढ़ते दबाव, अभियान और आत्मसमर्पण नीति के कारण नक्सलियों का नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। अब बचे हुए इन 18 इनामी उग्रवादियों के खात्मे के लिए सुरक्षा बलों ने अपने खुफिया तंत्र को सक्रिय करते हुए अंतिम और निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी है।

पुलिस द्वारा जारी इस सूची में सबसे शीर्ष नाम 1 करोड़ रुपये के इनामी भाकपा (माओवादी) के सेंट्रल कमेटी मेंबर असीम मंडल उर्फ आकाश का है, जो मूल रूप से पश्चिम बंगाल का रहने वाला है। इसके अलावा 25 लाख रुपये का इनामी टीपीसी सुप्रीमो ब्रजेश सिंह गंझू और 15-15 लाख रुपये के इनामी माओवादी रीजनल कमेटी मेंबर रामप्रसाद मार्डी व नितेश यादव भी इस फेहरिस्त में शामिल हैं।

सूची के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि बचे हुए कुल 18 इनामी नक्सलियों में से अधिकांश भाकपा माओवादी संगठन से जुड़े हैं, जबकि कुछ अन्य उग्रवादी पीएलएफआई और टीपीसी जैसे संगठनों के कैडर हैं। इनमें से 10 लाख रुपये के इनामी जोनल कमांडरों में आरिफ जी, मनोहर गंझू, गोदराय यादव, पुष्पा महतो और मीता शामिल हैं। वहीं 5 लाख रुपये के इनामी सब-जोनल कमांडरों में समीर महतो, पंकज कोरवा और राजू भुईयां का नाम दर्ज है। इसके अतिरिक्त मालती मुर्मू, बलराम लोहरा, बासु पूर्ति, सामुएल बुढ़, चोगो पूर्ति और सुद्रेश गंझू जैसे 1 से 2 लाख रुपये के इनामी एरिया कमांडर व कैडर भी पुलिस की हिट लिस्ट में शामिल हैं।

नक्सलियों के खिलाफ जंग अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। जिन सुदूरवर्ती और सारंडा, लातेहार तथा चतरा के बीहड़ इलाकों में कभी इन उग्रवादियों का वर्चस्व हुआ करता था, वहां अब नए सुरक्षा कैंप स्थापित कर दिए गए हैं। पुलिस और केंद्रीय बल लगातार सघन सर्च अभियान चला रहे हैं। अधिकारियों का दावा है कि या तो ये बचे हुए 18 उग्रवादी आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट आएं, अन्यथा सुरक्षा बलों की अंतिम कार्रवाई में इनका सफाया होना तय है।

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