CDPO नियुक्ति विवाद पर बाबूलाल मरांडी का बड़ा हमला, बोले- जांच का दायरा सीमित क्यों?
राँची। झारखण्ड में JPSC-JSSC से जुड़ी नियुक्तियों को लेकर जारी विवाद के बीच नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने CDPO नियुक्ति मामले को लेकर सरकार और जांच एजेंसी पर तीखे सवाल खड़े किए हैं। सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में उन्होंने सीधे पूछा कि क्या अजिता भट्टाचार्य इतनी ताकतवर और भ्रष्ट थीं कि सामान्य वर्ग की सीटें बिना किसी राजनीतिक संरक्षण के बेच दी गईं?
बाबूलाल मरांडी ने सवाल उठाया कि अजिता भट्टाचार्य के PA के माध्यम से कथित तौर पर वसूले गए पैसे आखिर कहां और किन लोगों के जरिए निवेश किए गए? उन्होंने यह भी पूछा कि क्या मुख्यमंत्री इस पूरे घटनाक्रम से अनजान थे। अगर मुख्यमंत्री को इसकी जानकारी थी, तो इतने दिनों से चुप्पी क्यों साधे हुए हैं?
‘जांच का दायरा सीमित रखा जा रहा’
नेता प्रतिपक्ष ने CID की जांच पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि जांच का दायरा जानबूझकर सीमित रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि इतने खुलासों के बाद भी अब तक अजिता भट्टाचार्य की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री के करीबी मित्र विनोद सिंह से पूछताछ नहीं हुई, मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू से पूछताछ नहीं हुई और संदिग्ध झामुमो नेताओं से भी पूछताछ नहीं की गई। बाबूलाल के मुताबिक, जब तक जांच इन सभी कड़ियों तक नहीं पहुंचेगी, तब तक पूरे मामले की सच्चाई सामने नहीं आ सकती।
बाबूलाल मरांडी ने CID की निष्पक्ष जांच को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि CID के ADG मनोज कौशिक स्वयं एक इंटरव्यू पैनल में शामिल रहे हैं, ऐसे में CID से निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती।उन्होंने पूरे मामले की जांच CBI से कराने की मांग दोहराते हुए कहा कि भाजपा CBI जांच के लिए हर लड़ाई लड़ेगी और झारखण्ड के युवाओं को उनका हक और न्याय दिलाकर रहेगी।
बाबूलाल मरांडी का यह बयान ऐसे समय आया है जब JPSC-JSSC नियुक्तियों को लेकर छात्रों और राजनीतिक दलों के बीच लगातार सवाल उठ रहे हैं। अब उनके ताजा बयान के बाद CDPO नियुक्ति प्रकरण में जांच के दायरे और कथित राजनीतिक संरक्षण को लेकर सियासी बहस और तेज होने के आसार हैं।

