जेपीएससी मेधा घोटाला: सीआईडी की बड़ी कार्रवाई, लखनऊ और राँची से 5 और आरोपी गिरफ्तार; कुल गिरफ्तारियां 19 हुईं

राँची। 14वीं झारखण्ड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में हुए बहुचर्चित मेधा घोटाले में अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) ने अपना शिकंजा और कस दिया है। राज्य भर में जारी छात्र आंदोलनों और भारी जनाक्रोश के बीच सीआईडी ने बुधवार को राँची और उत्तर प्रदेश की लखनऊ पुलिस के सहयोग से पांच और आरोपियों को दबोच लिया। इसके साथ ही इस घोटाले में अब तक गिरफ्तार किए गए आरोपियों की कुल संख्या 19 हो गई है।कार्रवाई के दौरान सीआईडी की टीम ने आरोपियों के ठिकानों से कई डिजिटल उपकरण और अहम अभिलेखीय साक्ष्य बरामद कर विधिवत जब्त किए हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि अनुसंधान तेजी से प्रगति पर है और बरामद साक्ष्यों के आधार पर आने वाले दिनों में कुछ और बड़े चेहरों पर गाज गिर सकती है।
ताजा कार्रवाई में दबोचे गए 5 आरोपियों की कुंडली
उमाकांत उरांव (मूल निवासी: जुरिया, लोहरदगा | वर्तमान पता: राहुल नगर, बरियातू): इसने 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में धोखाधड़ी व अनुचित साधनों के जरिए सफलता हासिल की। यह न केवल खुद फर्जीवाड़े से पास हुआ, बल्कि अन्य अभ्यर्थियों को नेटवर्क में जोड़ने के लिए दलाल/एजेंट के रूप में भी काम कर रहा था।
रोशन केरकेट्टा (मूल निवासी: हलहू, नगड़ी, वर्तमान पता: कोकर, राँची): इसने भी फर्जीवाड़े और अनुचित साधनों का इस्तेमाल कर प्रारंभिक परीक्षा पास की।
मनोज कुमार (निवासी: सेक्टर-3, धुर्वा, राँची): अनुचित साधनों और सांठगांठ के जरिए परीक्षा उत्तीर्ण करने का आरोपी।
रक्षक सिंह (निवासी: बख्शी का तालाब, लखनऊ, उत्तर प्रदेश): यह परीक्षा आयोजित कराने वाली आउटसोर्सिंग एजेंसी ‘टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड’ (टीडीपीएल) में अकाउंटेंट के पद पर कार्यरत है। इसने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए परीक्षा में धोखाधड़ी की और खुद भी अनुचित तरीके से परीक्षा पास की।
धर्मेंद्र कुमार (निवासी: आंद्रे हाउस, राँची विश्वविद्यालय परिसर, कोतवाली, राँची): घोटाले में संलिप्तता और साजिश रचने का आरोपी।
अभ्यर्थियों से लेकर एजेंसी और जेपीएससी अफसरों तक फैला नेटवर्क
सीआईडी की अब तक की जांच में स्पष्ट हुआ है कि यह घोटाला बेहद संगठित तरीके से रचा गया था, जिसमें परीक्षा कराने वाली एजेंसी, जेपीएससी के अंदरूनी कर्मचारी, बिचौलिए (दलाल) और अभ्यर्थी एक मजबूत सिंडिकेट की तरह काम कर रहे थे।हाल ही में जेपीएससी के फर्जीवाड़े से पास हुए एक अभ्यर्थी सुमन सौरभ को हजारीबाग पुलिस के सहयोग से गिरफ्तार कर राँची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार भेजा गया था। नए मामलों को मिलाकर अब तक कुल 4 धांधलीबाज अभ्यर्थी सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं।
इसके अलावा, बीते मंगलवार रात गिरफ्तार किए गए तीन प्रमुख दलालों उमेश कुमार, बुद्धेश्वर भगत और रमेश कुमार—को बुधवार को सीआईडी की विशेष अदालत के आदेश पर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। ये दलाल अभ्यर्थियों से भारी रकम और मूल दस्तावेज वसूलते थे। इसके बाद अपने संपर्कों के जरिए यह पैसा और जानकारी टीडीपीएल एजेंसी के निदेशक रामवीर सिंह और मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी तक पहुंचाते थे। टीडीपीएल के शीर्ष अधिकारियों से रिमांड पर हुई कड़ी पूछताछ के बाद ही इन दलालों और लखनऊ कनेक्शन की परतें खुली थीं।
अब तक गिरफ्तार हुए 19 आरोपियों की सूची
इस बहुचर्चित कांड में सीआईडी अब तक तंत्र के हर स्तर से जुड़े लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है:
जेपीएससी प्रशासनिक स्तर: जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता और जेपीएससी कर्मचारी सोनू कुमार।
परीक्षा एजेंसी (टीडीपीएल) के अधिकारी व कर्मी: टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर सह मुख्य अभियुक्त मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी, उसका सहयोगी अरविंद कुमार, अकाउंटेंट रक्षक सिंह, दो तकनीकी प्रोग्रामर (उस्मान व एबाद) तथा तीन अन्य कर्मचारी (हेमंत वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह व संजय कुमार)।
बिचौलिए व दलाल: उमेश कुमार, बुद्धेश्वर भगत और रमेश कुमार।
फर्जी तरीके से चयनित अभ्यर्थी: सुमन सौरभ, उमाकांत उरांव, रोशन केरकेट्टा और मनोज कुमार।
राज्य में छात्रों के बढ़ते गुस्से और पारदर्शी परीक्षा की मांग के बीच सीआईडी की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से हड़कंप मचा हुआ है। जांच अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच जारी है और फर्जीवाड़े के बल पर सूची में जगह बनाने वाले किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।

