जैप-1 परिसर का चर्चित सिरकटा हत्याकांड: गवाह मुकरे, सूचक ने नहीं देखी घटना; 13 साल बाद आरोपी बरी
-जैप-1 परिसर में सिर काटकर की गई थी इवेंट संचालक की हत्या; गवाह मुकरे, सूचक ने कहा- उसने घटना नहीं देखी
राँची।राँची के डोरंडा थाना क्षेत्र स्थित जैप-1 परिसर में 13 साल पहले हुए चर्चित इवेंट संचालक आलोक आनंद उर्फ लालू के नृशंस सिरकटा हत्याकांड मामले में अदालत का फैसला आ गया है। अपर न्यायिक आयुक्त-XVIII कुलदीप की अदालत ने साक्ष्य के अभाव में आरोपी सन्नी गुरुंग उर्फ सन्नी बहादुर गुरुंग को हत्या (आईपीसी 302/34) और साक्ष्य छुपाने (आईपीसी 201/34) के आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ संदेह से परे अपराध साबित करने में पूरी तरह विफल रहा। न तो परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी जुड़ पाई और न ही गवाहों ने आरोपी की संलिप्तता की पुष्टि की।
क्या था मामला : शादी समारोह से निकला था इवेंट संचालक, धड़ मिला पर सिर गायब
घटना 19-20 मई 2013 की दरमियानी रात की है। हटिया रेलवे ऑफिसर्स क्लब में एक शादी समारोह में ‘रिद्धि-सिद्धि’ इवेंट के संचालक आलोक आनंद उर्फ लालू और उनके सहयोगी रवींद्र कुमार यादव साउंड-लाइट की व्यवस्था संभाल रहे थे। रात करीब 11:30 बजे आलोक अपनी बाइक (JH01AC-1997) से एक घंटे में लौटने की बात कहकर निकले, लेकिन वापस नहीं आए। अगली सुबह डोरंडा स्थित जैप-1 कैंप के टिकू हॉल के पास आलोक आनंद का सिरकटा शव बरामद हुआ। हत्यारों ने पहचान और साक्ष्य छुपाने के उद्देश्य से सिर काटकर गायब कर दिया था। मृतक की पहचान उसके कपड़ों और जेब से मिले कागजातों से हुई थी। मामले में रवींद्र कुमार यादव के फर्दबयान पर डोरंडा थाने में अज्ञात अपराधियों के खिलाफ प्राथमिकी (कांड संख्या 233/2013) दर्ज की गई थी।
9 साल बाद दाखिल हुई थी चार्जशीट, अदालत में ध्वस्त हो गए आरोप
घटना के करीब 9 साल बाद, 24 सितंबर 2022 को पुलिस ने सन्नी गुरुंग के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, जबकि मुख्य संदेही हरि बहादुर गुरुंग व अन्य के खिलाफ जांच जारी रखी गई थी। अदालत में अभियोजन की ओर से तीन गवाह पेश किए गए, लेकिन किसी ने भी सन्नी गुरुंग के खिलाफ ठोस गवाही नहीं दी।
पीडब्ल्यू-1 (महेंद्र बहादुर गुरुंग): तत्कालीन डीजी आवास में पदस्थापित सिपाही महेंद्र बहादुर गुरुंग अदालत में अपने पूर्व के बयान से मुकर गया, जिसके बाद उसे पक्षद्रोही (Hostile) घोषित कर दिया गया।
पीडब्ल्यू-2 (रवींद्र कुमार यादव – सूचक): सूचक ने जिरह में स्वीकार किया कि उसे घटना की सीधी जानकारी नहीं है, उसने घटना को अपनी आंखों से नहीं देखा और न ही वह किसी आरोपी की पहचान कर सकता है।
पीडब्ल्यू-3 (पैली थापा): महिला गवाह ने अदालत में आरोपी सन्नी को केवल पड़ोसी होने के नाते पहचाना। उसने साफ कहा कि घटना के दिन सन्नी गुरुंग मौके पर मौजूद ही नहीं था। उसकी गवाही में केवल ‘हरि’ नामक व्यक्ति द्वारा खून से सने कपड़े बदलने का जिक्र था।
अदालत की सख्त टिप्पणी : बाकी गवाहों को पेश नहीं कर सकी पुलिस
अदालत के फैसले में पुलिस और अभियोजन की गंभीर लापरवाही भी सामने आई। अदालत ने रिकॉर्ड पर दर्ज किया कि बाकी चार्जशीटेड गवाहों को पेश करने के लिए अदालत ने समन और जमानतीय वारंट के बाद डोरंडा थाना प्रभारी, एसएसपी राँची, डीआईजी राँची और यहां तक कि 28 जुलाई 2026 को झारखण्ड के डीजीपी तक को आधिकारिक पत्र भेजा था। गैर-जमानतीय वारंट जारी होने और धारा 311 के तहत दोबारा मौका दिए जाने के बावजूद पुलिस शेष गवाहों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर सकी। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष के पास केवल फर्दबयान पर सूचक के हस्ताक्षर (प्रदर्श-पी-1) के अलावा आरोपी को घटना से जोड़ने वाला कोई दस्तावेजी या परिस्थितिजन्य साक्ष्य नहीं था। अदालत ने आरोपी सन्नी गुरुंग को सभी आरोपों से दोषमुक्त करते हुए उसके बेल बॉन्ड को निरस्त कर दिया।

