हाईकोर्ट से अभ्यर्थियों को बड़ी राहत: रद्द की गई नियुक्तियों पर फिलहाल नहीं पड़ेगा असर, सरकार को 48 घंटे में देना होगा जवाब

 

राँची। झारखण्ड में सरकारी नौकरी की परीक्षाओं को लेकर जारी विवाद के बीच हाईकोर्ट ने अभ्यर्थियों और नवनियुक्त कर्मियों को फिलहाल बड़ी राहत दी है। अदालत ने JPSC की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा, JSSC-CGL, CDPO और FSO समेत उन परीक्षाओं के परिणाम और नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के आदेश पर लगी रोक को जारी रखने का निर्देश दिया है, जिनके आधार पर नियुक्तियां हो चुकी हैं।इस आदेश के बाद फिलहाल इन नियुक्तियों पर सरकार के रद्द करने संबंधी फैसले का असर नहीं पड़ेगा। मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी।

चार सप्ताह का समय मांगने पर कोर्ट ने कहा- मामला भविष्य से जुड़ा है

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा। कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि मामला बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों और कर्मचारियों के भविष्य से जुड़ा है, इसलिए जवाब दाखिल करने में इतना लंबा समय उचित नहीं है।हाईकोर्ट ने सरकार को 48 घंटे के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

7 सितंबर तक मांगा गया था जवाब
इससे पहले हुई सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को 7 सितंबर तक शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया था। हालांकि, तय समय तक सरकार की ओर से जवाब दाखिल नहीं किया गया। दूसरी ओर, कुछ मामलों में JPSC की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल के माध्यम से शपथ पत्र दाखिल किया जा चुका है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव रंजन, अधिवक्ता श्रेय मिश्रा, इंद्रजीत सिन्हा और अमृतांश वत्स समेत अन्य अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा। राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहिताश्य राय ने अदालत में पक्ष रखा।

22 परीक्षाएं रद्द करने के बाद बढ़ा विवाद
दरअसल, CID जांच में सामने आए तथ्यों के बाद राज्य सरकार ने 18 अगस्त की देर रात TDPL से जुड़े मामलों वाली परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की थी। साथ ही वर्ष 2014 से आयोजित नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित गड़बड़ियों की जांच कराने का निर्णय लिया गया था।इसके बाद कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग की ओर से अधिसूचना जारी की गई। इसमें 22 परीक्षाओं को रद्द, 6 परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित और 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखने की बात कही गई थी।अब हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद उन परीक्षाओं के जरिए नौकरी पा चुके अभ्यर्थियों की नजर अगली सुनवाई पर टिकी है।

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