निशा भगत आत्महत्या मामले में बड़ा एक्शन, पिता के आवेदन पर पिठोरिया थाने में FIR दर्ज; अजय तिर्की और ज्योत्सना केरकेट्टा समेत तीन के खिलाफ गंभीर आरोप
राँची। निशा भगत की मौत के मामले में आखिरकार पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है। मृतका के पिता हांदू भगत के आवेदन पर पिठोरिया थाना में मामला दर्ज किया गया है। पिता ने अपनी बेटी की मौत को सामान्य आत्महत्या नहीं, बल्कि कथित रूप से मानसिक प्रताड़ना, दबाव और सुनियोजित साजिश का परिणाम बताया है। उन्होंने प्राथमिकी में अजय तिर्की, ज्योत्सना केरकेट्टा और एक अज्ञात व्यक्ति को आरोपी बनाया है। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 और 61(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
पिता का आरोप- बेटी को मानसिक और शारीरिक रूप से किया गया प्रताड़ित
FIR में दर्ज आवेदन के अनुसार, शिकायतकर्ता आनंदु भगत, पिता स्वर्गीय गंदुरा भगत, गुमला जिले के घाघ गांव, जोराटांड़ के निवासी हैं। उन्होंने पुलिस को दिए आवेदन में बताया है कि उनकी पुत्री निशा भगत को कथित तौर पर मानसिक, सामाजिक और शारीरिक रूप से लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था।
पिता का आरोप है कि उनकी बेटी को झूठे मुकदमे में फंसाकर इतना दबाव बनाया गया कि वह मानसिक रूप से टूट गई। आवेदन में सोशल मीडिया के माध्यम से चरित्र हनन किए जाने और बदनामी का भी आरोप लगाया गया है। पिता ने दावा किया है कि लगातार प्रताड़ना और दबाव के कारण उनकी बेटी ने आत्महत्या कर ली।
पिठोरिया थाना प्रभारी और पुलिसकर्मियों की भूमिका पर भी उठाए सवाल
पिता ने अपने आवेदन में केवल निजी व्यक्तियों को ही नहीं, बल्कि पिठोरिया थाना प्रभारी सतीश पाण्डेय और अन्य पुलिस पदाधिकारियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।
आवेदन में आरोप लगाया गया है कि जमीन के विवाद और जमीन संबंधी दलाली के मामले को लेकर उनकी बेटी को परेशान किया जाता था। पिता ने अजय तिर्की और ज्योत्सना केरकेट्टा सहित संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने आवेदन में कहा है कि उनकी बेटी की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिए।
FIR में तीन आरोपियों का नाम, डीएसपी को मिली जांच की जिम्मेदारी
FIR के आरोपी वाले कॉलम में अजय तिर्की, ज्योत्सना केरकेट्टा और एक अज्ञात व्यक्ति का नाम दर्ज है। वहीं, मामले की जांच के लिए डीएसपी अमर कुमार पाण्डेय को अनुसंधान की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
प्राथमिकी में लगाई गई धाराएं इस प्रकार हैं:
धारा 108 BNS: आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित अपराध। दोष सिद्ध होने पर अधिकतम 10 वर्ष तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है।
*धारा 61(2) BNS: आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित प्रावधान।
अब जांच में खुलेंगे प्रताड़ना और कथित साजिश के राज
निशा भगत की मौत के बाद से ही इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग उठ रही थी। अब पिता के आवेदन पर FIR दर्ज होने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। पुलिस के सामने अब यह पता लगाने की चुनौती है कि निशा को वास्तव में किस तरह प्रताड़ित किया गया था, सोशल मीडिया पर उसके चरित्र को लेकर क्या गतिविधियां हुई थीं और आत्महत्या से पहले किन लोगों की क्या भूमिका रही थी।
इसके अलावा पिता की ओर से लगाए गए पुलिस पदाधिकारियों पर आरोपों की भी निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल प्राथमिकी दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया गया है। आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

