दिवाली से ठीक पहले पूर्व विधायक अंबा प्रसाद के सरकारी आवास पर प्रशासन का बड़ा एक्शन, मजिस्ट्रेट दल-बल के साथ पहुंचे; गैरमौजूदगी में खाली कराया जा रहा F-44 बंगला
राँची। झारखण्ड की राजनीति में एक बार फिर पूर्व विधायक अंबा प्रसाद का सरकारी आवास चर्चा में आ गया है। दिवाली से ठीक पहले जिला प्रशासन की टीम दल-बल के साथ एचईसी परिसर स्थित उनके सरकारी आवास F-44 को खाली कराने पहुंच गई। खास बात यह रही कि जिस वक्त प्रशासन ने आवास खाली कराने की कार्रवाई शुरू की, उस समय न तो पूर्व विधायक अंबा प्रसाद वहां मौजूद थीं और न ही उनके परिवार का कोई सदस्य। प्रशासन ने केयरटेकर की मौजूदगी में आवास खाली कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी। इस कार्रवाई ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
दरअसल, एचईसी परिसर स्थित आवास F-44 पूर्व में विधायक के तौर पर अंबा प्रसाद को आवंटित किया गया था। लेकिन उनका विधायक कार्यकाल समाप्त होने के बाद पिछले वर्ष ही इस आवास का आवंटन एक आईएएस अधिकारी के नाम पर कर दिया गया था। इसके बावजूद पूर्व विधायक का परिवार आवास खाली नहीं कर पाया था। जिला प्रशासन का कहना है कि आवास खाली कराने को लेकर पूर्व विधायक को कई बार नोटिस दिया गया था, लेकिन निर्धारित समय में आवास खाली नहीं किया गया।
अंतिम नोटिस के बाद प्रशासन ने शुरू की कार्रवाई
आवास खाली कराने पहुंचे जिला प्रशासन के मजिस्ट्रेट मो. जफर हसनात ने बताया कि F-44 आवास पहले अंबा प्रसाद को विधायक के रूप में आवंटित था। बाद में इसे एक आईएएस अधिकारी के नाम पर आवंटित कर दिया गया। इसके बाद से ही पूर्व विधायक को आवास खाली करने के लिए कई बार नोटिस जारी किया गया था।
मजिस्ट्रेट के मुताबिक, अंतिम नोटिस 2 नवंबर 2026 को दिया गया था। इसकी सूचना व्हाट्सऐप के माध्यम से भी पूर्व विधायक तक पहुंचाई गई थी। हालांकि, उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद जिला प्रशासन ने आवास खाली कराने की कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया।
मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट किया कि प्रशासन की ओर से शुरू की गई कार्रवाई को उसी दिन पूरा करने का लक्ष्य है। आवास पर पूर्व विधायक या उनके परिवार का कोई सदस्य मौजूद नहीं होने के कारण केयरटेकर की उपस्थिति में सामान खाली कराया जा रहा है।
अंबा प्रसाद ने उठाए कार्रवाई की टाइमिंग और प्रक्रिया पर सवाल
इधर, प्रशासन की कार्रवाई पर कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राँची में कई पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री अब भी सरकारी आवासों में रह रहे हैं, तो फिर उनके ही आवास को खाली कराने की इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई जा रही है?
अंबा प्रसाद ने कहा कि दिवाली जैसे बड़े त्योहार से ठीक एक दिन पहले आवास खाली कराने की कार्रवाई शुरू करना उचित नहीं है। उन्होंने सबसे बड़ा सवाल अपनी और अपने परिवार की गैरमौजूदगी में मकान खाली कराने को लेकर उठाया। उनका कहना है कि जब वह या उनके परिवार का कोई सदस्य आवास पर मौजूद नहीं है, तो प्रशासन को इस तरह की कार्रवाई करने की क्या जरूरत थी?
पूर्व विधायक ने यह भी दावा किया कि उन्हें प्रशासन की ओर से आवास खाली करने का कोई नोटिस नहीं मिला है। जबकि दूसरी ओर मजिस्ट्रेट का कहना है कि कई बार नोटिस दिया गया और अंतिम नोटिस की सूचना व्हाट्सऐप पर भी भेजी गई थी।
अब आमने-सामने प्रशासन और पूर्व विधायक के दावे
इस पूरे मामले में अब प्रशासन और पूर्व विधायक के दावों में विरोधाभास सामने आ गया है। एक तरफ प्रशासन नोटिस जारी करने और उसकी सूचना व्हाट्सऐप के जरिए देने की बात कह रहा है, वहीं अंबा प्रसाद नोटिस नहीं मिलने का दावा कर रही हैं। उन्होंने कहा है कि राँची पहुंचने के बाद वह मीडिया के सामने इस कार्रवाई को लेकर अपनी पूरी बात रखेंगी।
अंबा प्रसाद ने कहा कि इस घर से उनका विशेष लगाव है।वह किसी भी स्थिति में दीपावली इसी आवास में मनायेंगी।जरूरत पड़ी तो टेंट लगाकर रहेंगी, लेकिन घर छोड़कर नहीं जायेंगी।
फिलहाल, एचईसी परिसर का F-44 आवास खाली कराने की कार्रवाई ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। अब देखना होगा कि राँची पहुंचने के बाद अंबा प्रसाद इस मामले में क्या खुलासा करती हैं और प्रशासन की कार्रवाई को लेकर आगे क्या कदम उठाती हैं।

