निर्माण स्थल पर बड़ा हादसा: 30 मीटर की ऊंचाई पर काम कर रहे मजदूर का सेफ्टी बेल्ट टूटा, नीचे गिरकर दर्दनाक मौत
राँची।खलारी के केडीएच में निर्माणाधीन कोल हैंडलिंग प्लांट (साइलो) एक बार फिर मजदूर की मौत का गवाह बना। शनिवार की सुबह करीब 30 मीटर की ऊंचाई पर काम कर रहे एक मजदूर का सेफ्टी बेल्ट अचानक टूट गया। देखते ही देखते मजदूर नीचे आ गिरा और गंभीर रूप से घायल हो गया। आनन-फानन में उसे सीसीएल केंद्रीय अस्पताल, डकरा पहुंचाया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। इस हादसे में जान गंवाने वाले मजदूर की पहचान बिहार के औरंगाबाद जिले के बारूण थाना क्षेत्र स्थित महत्ता गांव निवासी रामस्वरूप चौहान (पिता मुरली चौहान) के रूप में हुई है।
जानकारी के अनुसार, सीसीएल के एनके एरिया अंतर्गत केडीएच में कोल हैंडलिंग प्लांट (साइलो) का निर्माण कार्य मधुकोन प्रोजेक्ट्स लिमिटेड नामक आउटसोर्सिंग कंपनी करा रही है। रामस्वरूप चौहान इसी कंपनी में मजदूर के रूप में कार्यरत था। शनिवार सुबह वह साइलो निर्माण के तहत फैब्रिकेशन एवं इरेक्शन का काम कर रहा था। इसी दौरान वह लगभग 30 मीटर की ऊंचाई पर पहुंचकर काम कर रहा था। बताया जाता है कि इसी दौरान उसके शरीर में लगा सेफ्टी बेल्ट टूट गया। सुरक्षा का सहारा छूटते ही वह सीधे नीचे जा गिरा। ऊंचाई से गिरने के कारण उसे गंभीर चोटें आईं। सहकर्मियों ने तत्काल उसे अस्पताल पहुंचाया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
रामस्वरूप चौहान मूल रूप से बिहार के औरंगाबाद जिले का रहने वाला था। वह खलारी के मोहननगर, डकरा स्थित अपने ससुराल में रहकर मधुकोन प्रोजेक्ट्स लिमिटेड में काम करता था। परिवार की आजीविका मजदूरी पर निर्भर थी। उसके तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं। पिता की अचानक मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जिस व्यक्ति की कमाई से घर चलता था, उसकी एक दुर्घटना में मौत ने पूरे परिवार के सामने भविष्य की चिंता खड़ी कर दी है।
इस हादसे ने केडीएच में चल रहे साइलो निर्माण कार्य के दौरान मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था को एक बार फिर कठघरे में खड़ा कर दिया है। गौरतलब है कि इसी निर्माण कार्य के दौरान पूर्व में भी एक मजदूर की दुर्घटना में मौत हो चुकी है। इसके बावजूद दोबारा ऐसी घटना सामने आना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि करीब 30 मीटर की ऊंचाई पर काम करने वाले मजदूर को उपलब्ध कराया गया सेफ्टी बेल्ट आखिर कैसे टूट गया। क्या काम शुरू करने से पहले सुरक्षा उपकरणों की गुणवत्ता और उनकी स्थिति की जांच की गई थी। क्या ऊंचाई पर काम करने वाले मजदूरों के लिए निर्धारित सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन कराया जा रहा था?

