सारंडा में फिर नक्सलियों की साजिश नाकाम: जहां मारे गये थे 17 नक्सली, उसी इलाके में जमीन के नीचे मिले दो शक्तिशाली आईईडी; सुरक्षा बलों ने किया निष्क्रिय

 

चाईबासा/गुवा। पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा जंगल में नक्सलियों की एक और संभावित बड़ी साजिश को सुरक्षा बलों ने नाकाम कर दिया है। कुछ महीने पहले जिस इलाके में सुरक्षा बलों के साथ भीषण मुठभेड़ में 17 नक्सली मारे गये थे, उसी मुठभेड़ स्थल के आसपास अब जमीन के भीतर छिपाकर रखे गये दो शक्तिशाली आईईडी लैंडमाइन बरामद हुए हैं। समय रहते विस्फोटकों का पता चलने से सुरक्षा बलों के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों और जंगल से गुजरने वाले लोगों पर मंडरा रहा बड़ा खतरा टल गया।जानकारी के अनुसार, किरीबुरु क्षेत्र के बहदा गांव के समीप कोयना नदी के किनारे पगडंडी मार्ग के ऊंचे हिस्से में जमीन के भीतर दोनों आईईडी छिपाकर रखे गये थे। सारंडा के जंगलों में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सीआरपीएफ की 193वीं बटालियन और झारखंड पुलिस की संयुक्त टीम सर्च ऑपरेशन चला रही थी। इस अभियान में छोटानागरा थाना प्रभारी गौतम कुमार भी शामिल थे। इसी दौरान सुरक्षा बलों को एक स्थान पर संदिग्ध गतिविधि और जमीन की स्थिति देखकर संदेह हुआ। इसके बाद इलाके की सावधानीपूर्वक जांच की गई, जिसमें जमीन के नीचे छिपाकर रखे गये दो शक्तिशाली विस्फोटकों का पता चला।

विस्फोटकों की बरामदगी के बाद सुरक्षा बलों ने तत्काल सुरक्षा घेरा तैयार किया और बम निरोधक टीम को मौके पर बुलाया। निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए विशेषज्ञ टीम ने दोनों आईईडी लैंडमाइन को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय कर दिया। जंगल के बीच पगडंडी मार्ग पर छिपाकर रखे गये इन विस्फोटकों की बरामदगी को सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। यदि कोई व्यक्ति या सुरक्षा बल का जवान अनजाने में इनके संपर्क में आ जाता तो गंभीर हादसा हो सकता था।

17 नक्सलियों के मारे जाने वाले मुठभेड़ स्थल से महज 2-3 किमी दूर मिले विस्फोटक

इस बरामदगी का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि जिस स्थान से दोनों शक्तिशाली आईईडी मिले हैं, वह कुछ महीने पहले हुए बड़े नक्सल विरोधी अभियान के मुठभेड़ स्थल से महज दो से तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। उस भीषण मुठभेड़ में एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली अनल दा और 50 लाख रुपये के इनामी अनमोल दा समेत कुल 17 नक्सली मारे गये थे। उस कार्रवाई के बाद सारंडा के इस इलाके में नक्सली नेटवर्क को बड़ा झटका लगा था। अब उसी इलाके में जमीन के भीतर छिपाकर रखे गये दो शक्तिशाली विस्फोटकों का मिलना सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर विषय है।

सुरक्षा बलों के साथ ग्रामीणों के लिए भी बना हुआ था खतरा
सारंडा का जंगल दुर्गम और घनी वनस्पतियों वाला इलाका है। यहां कई ऐसे पगडंडी मार्ग हैं, जिनका इस्तेमाल ग्रामीण आवागमन, जंगल से जुड़े कामकाज और सुरक्षा बलों के अभियान के दौरान होता है। ऐसे रास्तों के किनारे जमीन में छिपाकर रखे गये आईईडी किसी भी समय बड़े हादसे की वजह बन सकते हैं। इनसे सुरक्षा बलों के जवानों के अलावा स्थानीय ग्रामीणों, मवेशियों और वन्यजीवों की जान को भी खतरा रहता है।

फिलहाल सुरक्षा बल सारंडा के जंगलों में नक्सल विरोधी अभियान और सर्च ऑपरेशन लगातार जारी रखे हुए हैं। संवेदनशील इलाकों में संदिग्ध स्थानों की जांच की जा रही है, ताकि जमीन के भीतर छिपाये गये अन्य विस्फोटकों का पता लगाया जा सके। दो आईईडी की बरामदगी ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि 17 नक्सलियों के मारे जाने के बाद भी इस क्षेत्र में सुरक्षा बलों को पूरी सतर्कता के साथ अभियान चलाने की जरूरत है।

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