कोलकाता दुर्गापूजा पंडाल में भीषण भगदड़, 18 लोगों की मौत की खबर; कई घायल, मची अफरातफरी
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिन दुर्गापूजा पंडाल में शनिवार को सप्तमी की देर शाम दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। पंडाल में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच अफरातफरी और भगदड़ मचने से 18 लोगों की मौत होने की खबर आई है, जबकि कई अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद घटनास्थल पर हड़कंप मच गया। घायलों को तत्काल इलाज के लिए नजदीकी मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया गया, जहां कुछ की हालत नाजुक बताई जा रही है।
भारी भीड़ के बीच मची अफरातफरी
जानकारी के अनुसार, दुर्गापूजा के अवसर पर चोरबागान सार्वजनिन पूजा पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और दर्शक पहुंचे थे। सप्तमी की शाम पंडाल में भीड़ बढ़ने के बीच बारिश के दौरान अचानक अफरातफरी की स्थिति उत्पन्न हो गई। इसके बाद भगदड़ मचने से कई लोग इसकी चपेट में आ गए। हादसे के बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाने और प्रभावित लोगों की सहायता करने की जरूरत पड़ी।हालांकि, भगदड़ किस वजह से शुरू हुई, भीड़ के दबाव की स्थिति कैसे बनी और हादसे के दौरान कितने लोग घायल हुए, इसकी विस्तृत जानकारी की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
सरकार ने जारी किया हेल्पलाइन नंबर
हादसे के बाद प्रभावित लोगों और उनके परिजनों की सहायता के लिए पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से विशेष टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 18003455678 जारी किए जाने की जानकारी दी गई है। आपातकालीन सहायता अथवा घटना से संबंधित जानकारी के लिए इस नंबर पर संपर्क करने की अपील की गई है।
इस वर्ष चोरबागान सार्वजनिन दुर्गोत्सव समिति की ओर से ‘आर्ब’ यानी ‘ध्वनि से परे’ थीम पर आधारित 360-डिग्री अवधारणा वाला अनूठा पूजा पंडाल तैयार किया गया था। पंडाल की खास सजावट और थीम लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई थी। इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और दर्शक पहुंच रहे थे।
दुर्गापूजा के दौरान कोलकाता के विभिन्न पंडालों में भारी भीड़ उमड़ती है। ऐसे में भीड़ का सुरक्षित प्रबंधन और श्रद्धालुओं की आवाजाही नियंत्रित रखना बेहद जरूरी होता है।
इस घटना के बाद पंडाल में भीड़ नियंत्रण, प्रवेश और निकास की व्यवस्था तथा आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के इंतजामों को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, हादसे के वास्तविक कारणों और जिम्मेदारी को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले प्रशासनिक जांच और आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना जरूरी है।

