झारखण्ड में अपराधियों पर खाकी का कहर…20 महीने में करीब 20 मुठभेड़, 3 ढेर, 20 से ज्यादा घायल; गैंगस्टरों से शूटरों तक हड़कंप

 

राँची। झारखण्ड में अपराधियों और गैंगस्टरों के खिलाफ पुलिस का एक्शन अब और आक्रामक नजर आ रहा है। रंगदारी, हत्या, अपहरण ,चेन स्नैचिंग और सुपारी किलिंग जैसे संगीन अपराधों में शामिल बदमाशों पर शिकंजा कसने के लिए पुलिस लगातार अभियान चला रही है। धनबाद से राँची, जमशेदपुर से पलामू और रामगढ़ से हजारीबाग तक पुलिस की कार्रवाई ने अपराध जगत में हलचल मचा दी है। कहीं कुख्यात अपराधियों के पैर में गोली लगी, तो कहीं गैंगस्टरों के शूटर पुलिस की जवाबी कार्रवाई में घायल होकर सलाखों के पीछे पहुंचे। कुछ मुठभेड़ों में अपराधियों की मौत भी हुई।

11 जनवरी 2025 से 14 अक्टूबर 2026 तक की अवधि में करीब 20 मुठभेड़ों का दावा किया गया है। इनमें तीन अपराधियों की मौत और 20 से अधिक के घायल होने की बात सामने आई है। हालांकि, अलग-अलग घटनाओं के आंकड़ों और वर्गीकरण का आधिकारिक मिलान जरूरी है।

धनबाद में गैंगस्टरों पर ताबड़तोड़ एक्शन
धनबाद में अपराधियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लगातार सुर्खियों में रही है। 14 अक्टूबर 2026 को राम प्रताप हत्याकांड के आरोपी और मोस्ट वांटेड शंकर डे उर्फ पिंकू डे को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, उसने पुलिस की पिस्टल छीनकर भागने की कोशिश की, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी।इससे पहले 24 सितंबर को ईस्ट बसुरिया थाना क्षेत्र में भूली मोड़ फायरिंग मामले के आरोपियों को घेरने के दौरान मुठभेड़ हुई। इस कार्रवाई में चंदन ठाकुर समेत दो अपराधियों के घायल होने की जानकारी सामने आई। वहीं, 17 अगस्त को बरंडा थाना क्षेत्र में प्रिंस खान गिरोह के गुर्गों के साथ मुठभेड़ में इरफान आलम और नन्हे अंसारी को गोली लगी।8 मार्च को भूईंफोड़ पहाड़ की तलहटी में धनबाद पब्लिक स्कूल के पास रंगदारी वसूलने पहुंचे शूटर सुधीश ओझा को भी पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान पैर में गोली लगने के बाद गिरफ्तार किया था। 16 मार्च को भागाबांध ओपी क्षेत्र में कुबेर उर्फ अमन सिंह से जुड़ी मुठभेड़ की घटना भी सामने आई।

जमशेदपुर में चार मुठभेड़, शूटरों के पैर में लगी गोली
लौहनगरी जमशेदपुर में भी अपराधियों के खिलाफ पुलिस ने सख्त रुख अपनाया। 26 सितंबर को बिंदल मॉल के उडिपी रेस्टोरेंट में हुई गोलीबारी के मामले में गिरफ्तार मुख्य शूटर मोहन यादव और अजीत मंडल को 7 अक्टूबर को हथियार बरामदगी के लिए घटनास्थल ले जाया गया था। इसी दौरान पुलिस के अनुसार दोनों ने भागने की कोशिश की, जिसके बाद हुई जवाबी कार्रवाई में उनके पैर में गोली लगी।9 जुलाई को स्मृति पार्क क्षेत्र में राहुल हत्याकांड के आरोपी सब्बे को हथियार बरामदगी के लिए ले जाने के दौरान मुठभेड़ हुई। पुलिस के मुताबिक, उसने लोडेड हथियार से फायरिंग कर भागने की कोशिश की थी। जवाबी कार्रवाई में वह घायल हो गया। 15 जून को चेन स्नैचिंग के आरोपी हरपाल सिंह उर्फ गबरू के साथ पुलिस की मुठभेड़ हुई। वहीं, 30 जनवरी को कैरव गांधी अपहरण कांड के आरोपियों गुड्डू सिंह, मोहम्मद इमरान और रमीज राजा के साथ हथियार बरामदगी के दौरान मुठभेड़ की घटना सामने आई।

राँची में भी पुलिस का शिकंजा, प्रिंस खान गिरोह के शूटर निशाने पर

राजधानी राँची में भी अपराधियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई तेज रही। 8 मार्च को एयरपोर्ट थाना क्षेत्र के टीटोस रेस्टोरेंट के वेटर की हत्या के मामले में राँची और धनबाद पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाया। पुलिस के अनुसार, प्रिंस खान गिरोह के तीन शूटर पकड़े गए। इनमें दो को गोली लगी, जबकि तीसरा भागने के दौरान घायल हुआ। 24 अप्रैल को जमीन कारोबारी की हत्या के मामले में फरार आरोपी सत्यम पाठक ने पुलिस की घेराबंदी तोड़कर भागने की कोशिश की। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी और उसे हथियार के साथ गिरफ्तार कर लिया गया।18 जून को निवारणपुर स्थित आरएसएस कार्यालय पर पेट्रोल बम हमले के आरोपी सैफ को पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश के दौरान गोली लगी। वहीं, 4 अक्टूबर को बीआईटी थाना क्षेत्र के चुट्टू गांव में चेन स्नेचिंग से जुड़े कोड़ा गैंग के बदमाश रंगीला के पैर में गोली लगी।वहीं अक्टूबर 2025 में दो एनकाउंटर हुई।जिसमें रातू थाना क्षेत्र में दो घायल और तुपुदाना क्षेत्र में एक अपराधी मुठभेड़ में घायल हुआ था।

 

 

पलामू में गैंगवार से जुड़े आरोपियों पर कार्रवाई
पलामू में 3 अप्रैल को समीर खलीफा हत्याकांड के मुख्य आरोपी फैज खान को पुलिस मुठभेड़ में गोली लगी, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर अस्पताल में भर्ती कराया गया। 6 अगस्त को मेदिनीनगर सदर थाना क्षेत्र के बजराहा-बैरिया के पास कोयल नदी किनारे हुई मुठभेड़ में कुख्यात सुमित चंद्रवंशी घायल हुआ।
इससे पहले 11 मार्च 2025 को गैंगस्टर अमन साहू को रायपुर से झारखण्ड लाने के दौरान पुलिस मुठभेड़ हुई थी, जिसमें उसकी मौत हो गई थी। पुलिस के अनुसार, उसने भागने की कोशिश की थी।

रामगढ़ में राहुल दुबे और प्रिंस खान गिरोह पर दबिश
रामगढ़ जिले में भी पुलिस और अपराधियों के बीच कई मुठभेड़ की घटनाएं सामने आईं। 6 अप्रैल को भुरकुंडा में राहुल दुबे गिरोह के सक्रिय सदस्य सन्नी सिंह के साथ मुठभेड़ हुई। वह घायल हुआ और उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने मौके से दो देसी पिस्तौल, मोबाइल और अन्य सामान बरामद किए। 6 जुलाई को भुरकुंडा ओपी क्षेत्र के रिवर साइड स्थित सेंट्रल स्कूल के जर्जर भवन में पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ हुई। इस दौरान प्रिंस खान गिरोह का शूटर शिवराज राम उर्फ शिवा गंभीर रूप से घायल हुआ।वहीं, 11 जनवरी 2025 को हजारीबाग के झामुमो नेता संतोष सिंह हत्याकांड के आरोपी राहुल तुरी को रामगढ़ के कुज्जू में पुलिस मुठभेड़ के दौरान मार गिराया गया था।

हजारीबाग में नक्सलियों से लेकर गैंगस्टरों तक पर कार्रवाई
हजारीबाग में पुलिस की कार्रवाई केवल आपराधिक गिरोहों तक सीमित नहीं रही। 29 अगस्त को दनुआघाटी में मुठभेड़ के दौरान एक अफीम तस्कर घायल हुआ। 22 अगस्त को गिद्दी थाना क्षेत्र के पास राहुल दुबे गिरोह के बादल कुमार और मोहित कुमार को गोली लगने के बाद गिरफ्तार किया गया। 29-30 जुलाई को बड़कागांव-हजारीबाग मुख्य मार्ग के चक्रवार घाटी और आसपास के जंगलों में प्रिंस खान गिरोह के बदमाशों से मुठभेड़ हुई। इसमें शूटर सैयद मोहम्मद जीशान घायल हुआ और गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि उसके दो साथी भाग निकले।

सबसे बड़ी नक्सल विरोधी कार्रवाइयों में 16 अप्रैल को हजारीबाग-चतरा सीमा के खापिया वन क्षेत्र में हुई मुठभेड़ शामिल रही। झारखण्ड पुलिस और जगुआर की संयुक्त कार्रवाई में 15 लाख रुपये के इनामी रीजनल कमेटी सदस्य सुभाष महतो उर्फ सहदेव महतो समेत चार हार्डकोर नक्सली मारे गए।

चतरा और जामताड़ा में भी मुठभेड़
25 अगस्त को चतरा जिले के टंडवा-पिपरवार थाना क्षेत्र के बसरिया जंगल में राहुल दुबे गिरोह के साथ पुलिस की मुठभेड़ हुई। इसमें गिरोह के शूटर विकास कुमार के पैर में गोली लगी।
वहीं, 3 अगस्त को जामताड़ा में जेल से लाने के दौरान कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की पुलिस मुठभेड़ में मौत होने की जानकारी दी गई है।

अपराधियों के लिए साफ संदेश
लगातार हो रही मुठभेड़ों और गिरफ्तारियों से साफ है कि झारखण्ड पुलिस हत्या, रंगदारी, अपहरण और गैंगवार से जुड़े मामलों में सक्रिय अपराधियों पर दबाव बढ़ा रही है। हालांकि, हर मुठभेड़ में पुलिस की कार्रवाई, हथियार बरामदगी और गोली चलने की परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं। इसलिए इन घटनाओं की जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड का मिलान भी उतना ही महत्वपूर्ण है।झारखण्ड में अपराधियों के खिलाफ पुलिस का सख्त अभियान चर्चा में है।

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