मुठभेड़ में घायल अपराधी का बड़ा खुलासा: सिलीगुड़ी में करोड़ों की ज्वेलरी लूट की साजिश, CCTV फुटेज मिटने का इंतजार कर रहा था शातिर शूटर शंकर डे!

 

धनबाद। झारखण्ड के धनबाद में पुलिस मुठभेड़ में घायल कुख्यात अपराधी शंकर डे ने पूछताछ में एक ऐसी साजिश का खुलासा किया है, जिसने पुलिस को भी चौंका दिया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, शंकर डे पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में एक ज्वेलरी कारोबारी को निशाना बनाने की तैयारी में था। इसके लिए उसने करीब एक महीने तक सिलीगुड़ी में डेरा जमाकर कारोबारी की रेकी की थी। कारोबारी की गतिविधियों से लेकर आने-जाने के रास्तों तक की जानकारी जुटा ली गई थी। अब वह सिर्फ एक महीने पुरानी सीसीटीवी फुटेज के डिलीट होने का इंतजार कर रहा था, ताकि कथित तौर पर वारदात को अंजाम देने के बाद पुलिस के हाथ कोई अहम सुराग नहीं लगे।

घायल अपराधी शंकर डे

एक महीने तक रेकी, फिर वारदात को अंजाम देने की तैयारी
पुलिस सूत्रों के अनुसार, शंकर डे ने पूछताछ में बताया कि वह अपने साथियों के साथ पिछले करीब एक महीने से सिलीगुड़ी में सक्रिय था। इस दौरान अलग-अलग जगहों पर घूमकर ज्वेलरी कारोबारी की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। रेकी के दौरान कई स्थानों के सीसीटीवी कैमरों में उसका चेहरा कैद हो गया था। कथित तौर पर इसी वजह से गिरोह वारदात को अंजाम देने से पहले फुटेज के डिलीट होने का इंतजार कर रहा था।

अपराध की दुनिया में पुलिस की निगरानी से बचने के लिए किस तरह पहले से योजना बनाई जाती है, शंकर से पूछताछ में सामने आया यह मामला उसकी एक बानगी है। कारोबारी की रेकी, गतिविधियों की जानकारी जुटाना और सीसीटीवी फुटेज को लेकर इंतजार करना, कथित साजिश के अलग-अलग चरण थे।

सिलीगुड़ी से धनबाद पहुंचा, गिरोह का नेटवर्क मजबूत करने में जुटा था

बताया जा रहा है कि सिलीगुड़ी में कथित वारदात की तैयारी के बीच शंकर डे पांच-छह दिन पहले धनबाद पहुंचा था। यहां वह अपने आपराधिक नेटवर्क को मजबूत करने और अलग-अलग इलाकों के अपराधियों को जोड़कर गिरोह तैयार करने में जुटा था। इसी दौरान मंगलवार की रात टुंडी के मनियाडीह इलाके में पुलिस के साथ मुठभेड़ में वह घायल हो गया।पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि सिलीगुड़ी में प्रस्तावित वारदात की योजना में उसके साथ कौन-कौन शामिल थे। इसके अलावा धनबाद पहुंचने के बाद उसने किन अपराधियों से संपर्क किया और गिरोह में किसकी क्या भूमिका थी, इसकी भी जांच की जा रही है।

बिंदू सिंह गिरोह का शार्प शूटर, कई राज्यों में आपराधिक गतिविधियों का आरोप

पुलिस के अनुसार, दुर्गापुर के कृष्णपल्ली निवासी शंकर डे बिहार के कुख्यात गैंगस्टर बिंदू सिंह के गिरोह का शार्प शूटर रहा है। बिंदू सिंह की मौत हो चुकी है। शंकर पर धनबाद के अलावा पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश में कई आपराधिक घटनाओं में शामिल होने का आरोप है। धनबाद में कई मामलों में नाम आने के बावजूद वह लंबे समय तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा।पुलिस की पूछताछ में बनारस में सुपारी लेकर हत्या करने की बात भी सामने आने की जानकारी दी गई है। वहीं, बिहारी लाल चौधरी की हत्या, आटा चक्की कर्मचारी उमेश यादव की छिनतई के दौरान हत्या, कृषि बाजार में छिनतई और टुंडी में सीएसपी लूट जैसी घटनाओं में भी उसकी कथित संलिप्तता की जांच की जा रही है।

शराब पिलाने के बहाने बुलाया, फिर जंगल में कर दी हत्या
पूछताछ में गोंदूडीह निवासी राम प्रताप प्रसाद की हत्या से जुड़ा मामला भी सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, राम प्रताप घर से दुर्गापुर में रिश्तेदार के यहां जाने की बात कहकर निकला था। उसके मोबाइल पर आखिरी कॉल शंकर डे का आया था। इसी सुराग के आधार पर पुलिस शंकर तक पहुंची।पुलिस के अनुसार, शंकर ने पूछताछ में बताया कि लूट के पैसों को लेकर दोनों के बीच विवाद था। इसी विवाद के बाद उसने राम प्रताप को शराब पिलाने के बहाने बुलाया। दोनों ने साथ में शराब पी, जिसके बाद शंकर उसे मनियाडीह के जंगल में ले गया। वहां गोली मारकर उसकी हत्या कर दी और शव जंगल में फेंक दिया। शुरुआत में मृतक की पहचान नहीं हो सकी थी। बाद में मोबाइल पर आए अंतिम कॉल के आधार पर पुलिस ने मामले की कड़ियां जोड़ीं।

अब गिरोह के दूसरे सदस्यों की तलाश
मनियाडीह में मुठभेड़ के बाद घायल शंकर डे से पुलिस लगातार पूछताछ कर रही है। जांचकर्ताओं को उम्मीद है कि उसके खुलासों से धनबाद समेत दूसरे राज्यों में हुई आपराधिक घटनाओं की गुत्थी सुलझाने में मदद मिलेगी। पुलिस सिलीगुड़ी में ज्वेलरी कारोबारी को निशाना बनाने की कथित योजना, शंकर के नेटवर्क और उसके साथियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है। अब यह पता लगाने की कोशिश है कि इस कथित साजिश में कौन-कौन शामिल था और गिरोह ने आगे किन वारदातों को अंजाम देने की योजना बनाई थी।

 

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