बंद रेलवे क्वार्टर का खुला राज.. 2021 से लापता चिरेका कर्मी का मिला नरकंकाल, DNA जांच से खुलेगा रहस्य
जामताड़ा/चित्तरंजन। चित्तरंजन रेलनगरी में बंद पड़े एक रेलवे क्वार्टर से नरकंकाल मिलने के बाद सनसनी फैल गई है। स्ट्रीट नंबर 11 स्थित क्वार्टर नंबर 11बी के अंदर पूजा स्थल के पास मानव कंकाल मिलने से पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि यह नरकंकाल वर्ष 2021 से लापता चिरेका कर्मी प्रकाश चंद्र राउत राय (59) का हो सकता है। हालांकि, पुलिस ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
प्रकाश चंद्र राउत राय इसी क्वार्टर में अकेले रहते थे और वर्ष 2021 से उनका कोई पता नहीं था। उनके लापता होने को लेकर वर्ष 2023 में गुमशुदगी की डायरी भी दर्ज कराई गई थी। अब वर्षों बाद उसी आवास के भीतर मानव कंकाल मिलने से पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है।
बताया गया कि प्रकाश चंद्र राउत राय के भतीजे सुप्रतिप राउत राय समेत परिवार के लोग क्वार्टर सरेंडर करने की प्रक्रिया के सिलसिले में 26 सितंबर से वहां रह रहे थे। सोमवार को क्वार्टर में रखी बाइक को हटाने के दौरान नीचे कुछ हड्डियां दिखाई दीं। संदेह होने पर परिवार ने तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दी।
सूचना मिलते ही चित्तरंजन थाना पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे इलाके को सुरक्षित कर जांच शुरू कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एडीसीपी जावेद हुसैन और चित्तरंजन थाना के आईसी शेख इस्माइल अली भी घटनास्थल पर पहुंचे। फोरेंसिक टीम ने मौके की बारीकी से जांच की और कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए।
पुलिस अब बरामद नरकंकाल की पहचान सुनिश्चित करने में जुटी है। इसके लिए अवशेषों को पोस्टमार्टम और डीएनए जांच के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई है। डीएनए रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बरामद कंकाल लापता चिरेका कर्मी प्रकाश चंद्र राउत राय का है या किसी अन्य व्यक्ति का।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि नरकंकाल प्रकाश चंद्र राउत राय का ही है, तो उनकी मौत किन परिस्थितियों में हुई? वर्षों तक उसी क्वार्टर के भीतर शव के अवशेष पड़े रहे और किसी को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी? फिलहाल इन सवालों का जवाब पुलिस की जांच और फोरेंसिक रिपोर्ट से मिलने की उम्मीद है। पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की जांच कर रही है।

