जिनका कोई नहीं था, उनके लिए मुक्ति संस्था बनी अपना: 43 लावारिस शवों का किया सामूहिक अंतिम संस्कार
राँची। जिन 43 शवों का कोई अपना नहीं था, जिनकी पहचान तक नहीं हो सकी, रविवार को उन्हें भी पूरे विधि-विधान और सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। मुक्ति संस्था की ओर से रिम्स के मोर्चरी गृह में रखे 43 अज्ञात शवों को निकालकर जुमार नदी के तट पर ले जाया गया, जहां सामूहिक रूप से उनका अंतिम संस्कार किया गया।संस्था के सदस्यों ने अज्ञात शवों को विधिवत पैक कर जुमार नदी तट तक पहुंचाया। वहां संस्था के अध्यक्ष प्रवीण लोहिया ने सभी अज्ञात शवों को मुखाग्नि दी। इस दौरान माहौल बेहद भावुक रहा। अंतिम अरदास परमजीत सिंह टिंकू ने किया।
मुक्ति संस्था के अध्यक्ष प्रवीण लोहिया ने बताया कि संस्था का प्रयास है कि जिस व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका कोई अपना अंतिम संस्कार करने वाला नहीं है, उसे भी सम्मानजनक अंतिम विदाई मिले। उन्होंने बताया कि संस्था की ओर से अब तक कुल 2271 अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार किया जा चुका है।
यह पहल उन लोगों के लिए सामाजिक जिम्मेदारी की मिसाल है, जिनकी जिंदगी की पहचान भले ही समाज में खो गई हो, लेकिन मृत्यु के बाद उन्हें सम्मान देने की जिम्मेदारी किसी ने अपने कंधों पर उठा रखी है।
अंतिम संस्कार में संस्था के रवि अग्रवाल, संजय गोयल, परमजीत सिंह टिंकू, आशीष भाटिया, आरके गांधी, सीताराम कौशिक, अमित किशोर, राजा गोयनका, सौरभ बथवाल, अरविंद सिंह, सुमित अग्रवाल, राहुल जायसवाल, राहुल चौधरी, गौरीशंकर शर्मा, अरुण कुटरियार, सुनील अग्रवाल, संदीप पपनेजा और सुदर्शन अग्रवाल समेत अन्य सदस्य मौजूद रहे।
मुक्ति संस्था की यह पहल एक संदेश भी देती है,’रिश्ते और पहचान खत्म हो जाने के बाद भी इंसान की गरिमा खत्म नहीं होती’।

