80% छूट का सपना, करोड़ों की ठगी का खेल…..गिरिडीह के ‘बंटी-बबली’ ने गाड़ियों से लेकर मकान तक के नाम पर बिछाया जाल, दंपती समेत 4 गिरफ्तार
पहले कम पैसे में महंगी गाड़ी का लालच… फिर EMI भरने का भरोसा; ऑफिस पर लटका ताला तो खुली करोड़ों की कथित ठगी की परतें
गिरिडीह। कभी 40 प्रतिशत छूट, कभी 60 प्रतिशत और कहीं 80 प्रतिशत तक अनुदान… बाइक हो या एसयूवी, मकान हो या बेटी की शादी—हर जरूरत के लिए एक आकर्षक योजना। दावा ऐसा कि कम पैसे लगाइए और बाकी का इंतजाम संगठन कर देगा। लोगों को भरोसा दिलाया गया कि वाहन खरीदने के बाद बैंक की EMI भी संगठन की ओर से जमा की जाएगी।इसी लालच और भरोसे के बीच बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी मेहनत की कमाई संगठन से जुड़े लोगों के पास जमा कर दी। शुरुआत में कुछ लोगों की किस्तें भी जमा हुईं, जिससे भरोसा और मजबूत हुआ। लेकिन धीरे-धीरे EMI बंद हो गईं। फिर संगठन का कार्यालय बंद हो गया और लोगों को अपने पैसे के साथ-साथ बैंक के कर्ज की चिंता सताने लगी।
अब इस पूरे मामले में गिरिडीह पुलिस ने राधास्वामी संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मुकेश सिन्हा, उनकी पत्नी एवं संगठन की जिला प्रभारी/मीडिया प्रभारी अनीशा सिन्हा, निगरानी पदाधिकारी जितेंद्र सिंह उर्फ सुबोध सिंह और मुकेश सिन्हा के साले सुमित सिन्हा को गिरफ्तार किया है। चारों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच में करीब 10 करोड़ रुपये की कथित ठगी सामने आई है और यह रकम आगे बढ़ सकती है।
कम पैसे में गाड़ी… बाकी EMI हम भरेंगे
पुलिस के मुताबिक कथित तौर पर लोगों को वाहन योजना के जरिए सबसे ज्यादा आकर्षित किया गया। संगठन की ओर से बताया जाता था कि वाहन की कीमत का सिर्फ एक हिस्सा लाभुक को देना होगा और बाकी रकम की व्यवस्था बैंक फाइनेंस के जरिए की जाएगी।
लाभुक से करीब 20 से 60 प्रतिशत तक रकम जमा कराने के बाद उसके नाम पर वाहन फाइनेंस कराया जाता था। सबसे बड़ा भरोसा यह दिया जाता था कि बैंक लोन की मासिक किस्त यानी EMI संगठन की ओर से जमा कराई जाएगी।यही ऑफर लोगों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण बन गया।लोगों ने अपनी जमा पूंजी लगाई, कागजात दिए और वाहन अपने नाम पर फाइनेंस करा लिया। कुछ समय तक भुगतान होने से किसी को संदेह भी नहीं हुआ। लेकिन बाद में किस्तें बंद हो गईं।
EMI बंद… बैंक का नोटिस पहुंचा तो उड़ गए होश
जब संगठन की ओर से EMI का भुगतान बंद हुआ तो फाइनेंस कंपनियों ने वाहन मालिकों से वसूली शुरू कर दी। जिन लोगों को भरोसा था कि संगठन किस्त भरेगा, उन्हीं के घर बैंक और फाइनेंस कंपनियों के नोटिस पहुंचने लगे।यानी लोगों की जमा पूंजी भी फंस गई और वाहन का कर्ज भी उनके सिर आ गया।
जून 2026 में संगठन के कार्यालय पर ताला लगने के बाद सैकड़ों लाभुक परेशान होकर कार्यालय पहुंचे थे। गिरिडीह के साथ बगोदर, डुमरी, सरिया, बेंगाबाद और गांडेय समेत कई इलाकों से लोग वहां पहुंचते रहे, लेकिन कार्यालय बंद मिला।
गाड़ी ही नहीं… मकान और कन्यादान तक का ऑफर
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि कथित खेल सिर्फ वाहन योजना तक सीमित नहीं था।लोगों को आवास योजना, कन्यादान योजना, सुकन्या योजना, डिपॉजिट योजना और दूसरी योजनाओं के नाम पर भी लाभ का लालच दिया जाता था।रिपोर्टों के मुताबिक कई लोगों से रकम लेने के बाद कथित तौर पर बॉन्ड पेपर, चेक और दूसरे दस्तावेज देकर भरोसा कायम किया जाता था। अब पुलिस इन दस्तावेजों और पैसों के लेन-देन की भी जांच कर रही है।
5 लाख देकर गाड़ी का इंतजार करता रहा अमजद
मामले की शिकायत करने वाले नावाटांड़ निवासी अमजद अंसारी ने पुलिस को बताया कि उसने संगठन का प्रचार देखने के बाद मुकेश सिन्हा से संपर्क किया था।आरोप है कि उसे कम कीमत में चारपहिया वाहन दिलाने का भरोसा दिया गया। संगठन के कार्यालय में उसकी मुलाकात मुकेश सिन्हा की पत्नी अनीशा सिन्हा और अन्य आरोपियों से कराई गई।
अमजद के मुताबिक उससे संगठन का सदस्य बनने और वाहन दिलाने के नाम पर 5 लाख रुपये लिए गए। इसके बदले उसे बॉन्ड पेपर भी दिया गया और भरोसा दिलाया गया कि कुछ दिनों में वाहन मिल जाएगा तथा उसे EMI नहीं देनी पड़ेगी।लेकिन वाहन और रकम दोनों का मामला उलझ गया। अमजद ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद जांच आगे बढ़ी।
एक शिकायत से खुलता गया शिकायतों का सिलसिला
अमजद अंसारी ने सिर्फ अपनी ठगी की शिकायत नहीं की, बल्कि अन्य लोगों के साथ हुई कथित धोखाधड़ी की जानकारी भी पुलिस को दी।रिपोर्ट के अनुसार, उसके परिचित फिरोज आलम से वाहन के नाम पर 2.48 लाख रुपये से अधिक और अनिता देवी से घर बनाने के नाम पर 3.76 लाख रुपये लिए जाने का भी आरोप है।
इसके बाद पुलिस के सामने एक के बाद एक शिकायतें आने लगीं। कई कथित पीड़ित पचंबा थाना पहुंचे और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई तथा अपनी रकम वापस कराने की मांग की।
ऑफिस पर ताला लगते ही मचा हड़कंप
जब संगठन की ओर से किस्तों का भुगतान रुक गया और कार्यालय बंद मिला तो लाभुकों का गुस्सा फूट पड़ा।लोग कार्यालय पहुंचे तो वहां ताला लटका मिला। कर्मचारियों के भी गायब होने की खबर सामने आई। इसके बाद लोगों ने पुलिस से शिकायत की और पूरे मामले की जांच की मांग की।पुलिस की कार्रवाई के बाद अब वही मामला गिरफ्तारी तक पहुंच गया है।
पुलिस की नजर अब बैंक खातों और पूरे नेटवर्क पर
डीएसपी आरके राणा के मुताबिक प्रारंभिक जांच में करीब 10 करोड़ रुपये की कथित ठगी सामने आई है। हालांकि पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और रकम बढ़ सकती है।
अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि—
- कितने लोगों से रकम ली गई?
- संगठन के किन-किन खातों में पैसा जमा हुआ?
- कितनी रकम वाहन फाइनेंस में इस्तेमाल हुई?
- कथित तौर पर वसूली गई रकम कहां गई?
- संगठन से जुड़े और कौन-कौन लोग इस नेटवर्क में शामिल हैं?
यानी चार गिरफ्तारियों के बाद भी कहानी खत्म नहीं हुई है। असली सवाल अब करोड़ों रुपये के कथित लेन-देन और पूरे नेटवर्क का है।
पहले भी उठ चुके थे संगठन की कार्यशैली पर सवाल
यह मामला अचानक सामने नहीं आया। 2025 में भी राधास्वामी संगठन की कार्यशैली और लोगों से रकम जुटाने को लेकर शिकायतें सामने आई थीं। एक शिकायत में संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मुकेश सिन्हा और उनकी पत्नी अनीशा सिन्हा पर ग्रामीणों को वाहन और दूसरी योजनाओं का लालच देकर रकम जुटाने के आरोप लगाए गए थे। संगठन की ओर से उस समय आरोपों को खारिज करते हुए खुद को एनजीओ बताया गया था।
संगठन की ओर से पहले यह भी कहा गया था कि वह वाहन बेचने या फाइनेंस करने का काम नहीं करता, बल्कि लोगों की EMI में सहयोग करता है। उस समय संगठन की ओर से हजारों लोगों के वाहन योजना से जुड़े होने की बात कही गई थी।
चुनाव में भी उतरी थीं अनीशा सिन्हा
इस पूरे मामले का एक राजनीतिक पहलू भी है। संगठन की जिला प्रभारी अनीशा सिन्हा ने 2024 का विधानसभा चुनाव गिरिडीह सीट से लड़ा था।उनका मुकाबला झामुमो के सुदिव्य कुमार और भाजपा के निर्भय कुमार शाहाबादी समेत अन्य उम्मीदवारों से था। चुनाव परिणाम में अनीशा सिन्हा को महज 858 वोट मिले थे।
इस बीच अब करोड़ों रुपये की कथित ठगी के मामले में उनकी गिरफ्तारी ने पूरे घटनाक्रम को चर्चा में ला दिया है।
हजारों लोगों तक पहुंचा था नेटवर्क?
ताजा रिपोर्टों में दावा किया गया है कि संगठन की अलग-अलग योजनाओं से झारखंड के हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। हालांकि कितने लोगों से वास्तव में कितनी रकम ली गई, इसका अंतिम आंकड़ा पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
80% छूट का सपना… और कर्ज का पहाड़!
गिरिडीह में सामने आया यह मामला सिर्फ चार लोगों की गिरफ्तारी की कहानी नहीं है। यह उस भरोसे की कहानी है जिसमें लोगों ने कम कीमत में गाड़ी, घर और दूसरी सुविधाएं मिलने का सपना देखा, अपनी मेहनत की कमाई जमा की और बैंक से अपने नाम पर कर्ज लिया।जब तक EMI आती रही, सब कुछ योजना का हिस्सा लगता रहा। लेकिन जैसे ही भुगतान बंद हुआ और कार्यालय पर ताला लगा, लोगों को समझ आया कि जिस योजना को वे अपना सहारा समझ रहे थे, वही उनके लिए आर्थिक संकट बन गई।अब पुलिस के सामने चुनौती है करोड़ों रुपये के कथित लेन-देन की पूरी कड़ी जोड़ना और इस नेटवर्क से जुड़े बाकी लोगों तक पहुंचना।

