हुंडरू से लोध फॉल तक: बारिश में खूबसूरत नजारे के बीच छिपा है बड़ा खतरा

राँची। झारखण्ड में मानसून अपने पूरे तेवर में है। 18 अगस्त को कई इलाकों में भारी से अत्यंत भारी बारिश हो रही है जबकि 19 अगस्त को भी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। ऐसे में राज्य के मशहूर झरने, नदियां और जलाशय जहां पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं, वहीं अचानक बढ़ता जलस्तर और तेज बहाव परेशानी का कारण भी बन सकता है।हुंडरू फॉल, दशम फॉल, जोन्हा फॉल, पंचघाघ, हिरनी फॉल, लोध फॉल और नेतरहाट जैसे पर्यटन स्थलों पर बारिश के बाद नजारा बेहद मनमोहक हो जाता है। लेकिन यही मौसम इन जगहों को जोखिम भरा भी बना देता है।
झरने के आसपास सिर्फ उस समय के पानी के बहाव को देखकर खतरे का अंदाजा लगाना ठीक नहीं है। ऊपरी इलाकों में हुई बारिश का असर कुछ देर बाद नीचे दिखाई दे सकता है। अचानक पानी बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित जगह तक लौटने का समय भी कम मिल सकता है।
बारिश में चट्टानों पर काई और पानी की वजह से फिसलन बढ़ जाती है। झरने के किनारे पहुंचना, पानी में उतरना या फिसलन भरी चट्टानों पर खड़े होकर फोटो और सेल्फी लेना जानलेवा साबित हो सकता है। निर्धारित सुरक्षित स्थान से ही नजारे का आनंद लेना बेहतर है।
बारिश के दिनों में नदी का बहाव पल-पल बदल सकता है। ऊपर से पानी शांत नजर आने के बावजूद अंदर तेज धारा हो सकती है। इसलिए नहाने, नदी पार करने या तेज बहाव वाले हिस्से में जाने से बचें। बच्चों और बुजुर्गों पर विशेष नजर रखें।
जलाशयों में लगातार पानी आने से जलस्तर बढ़ सकता है। डैम के गेट, प्रतिबंधित इलाकों और जलाशय के किनारे जाने की कोशिश न करें। प्रशासन या संबंधित विभाग की ओर से किसी क्षेत्र में प्रवेश पर रोक या चेतावनी हो तो उसे गंभीरता से लें।
अगर पर्यटन स्थल पर अचानक तेज बारिश, गरज-चमक या तेज हवा शुरू हो जाए तो रोमांच के लिए वहां रुकना जोखिम भरा हो सकता है। सुरक्षित स्थान की ओर लौटना ही समझदारी है।
बारिश झारखंड के झरनों को खूबसूरत जरूर बनाती है, लेकिन इस मौसम में प्रकृति का मिजाज कभी भी बदल सकता है। इसलिए नजारा देखने जाएं, खतरे को चुनौती देने नहीं।

