JPSC में ‘खेल’ का खुलासा: बिना टेंडर TDPL को परीक्षा का पूरा जिम्मा, CID जांच में चौंकाने वाले तथ्य

*CID जांच में बड़े सवाल: एजेंसी के आवासीय परिसर से मिले 4 कंप्यूटर, FRO मेंस-2026 की उत्तर पुस्तिकाएं बरामद होने का दावा
*14वीं JPSC PT के रिजल्ट से करीब एक महीने पहले उप परीक्षा नियंत्रक के मोबाइल से TDPL कर्मी को भेजी गई थी Answer Key
राँची। झारखण्ड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाले नए तथ्य सामने आ रहे हैं। CID की जांच और पूछताछ में सामने आई जानकारी ने परीक्षा संचालन की पूरी प्रक्रिया को कठघरे में खड़ा कर दिया है।जांच के केंद्र में अब सिर्फ परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियां ही नहीं, बल्कि परीक्षा कराने के लिए अपनाई गई पूरी व्यवस्था, एजेंसी के चयन और संवेदनशील दस्तावेजों की सुरक्षा भी आ गई है।
बिना टेंडर, सिर्फ नॉमिनेशन पर TDPL को ‘एंड-टू-एंड’ काम!
CID की पूछताछ में JPSC की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, आयोग ने TDPL को बिना निविदा के सिर्फ नॉमिनेशन के आधार पर परीक्षा संचालन से जुड़े काम सौंपे थे।सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक संवैधानिक और संवेदनशील संस्था में परीक्षा जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया के लिए एजेंसी चयन की सामान्य प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया? जांच में सामने आया है कि TDPL को परीक्षा संचालन की शुरुआत से लेकर अंत तक की प्रक्रियाओं की जिम्मेदारी दी गई थी। यानी परीक्षा से जुड़े कई अहम चरण एक ही एजेंसी के जिम्मे थे।
यहीं से जांच का सबसे बड़ा सवाल सामने आता है—
जब परीक्षा की पूरी प्रक्रिया का बड़ा हिस्सा एक ही एजेंसी संभाल रही थी, तो उस पर निगरानी और ‘चेक एंड बैलेंस’ की व्यवस्था क्या थी?
CID की जांच में इसी व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं।
एजेंसी के आवासीय परिसर में रखे थे 4 कंप्यूटर..
जांच के दौरान CID ने TDPL के लालपुर स्थित वर्धमान कंपाउंड के आवासीय परिसर की छानबीन की। यहां से जांच एजेंसी को चार कंप्यूटर मिलने की बात सामने आई है।इन कंप्यूटरों की जांच में कथित तौर पर Forest Range Officer (FRO) Mains-2026 परीक्षा के परीक्षार्थियों की लिखित उत्तर पुस्तिकाएं मिलीं।
अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि उत्तर पुस्तिकाएं वहां कैसे पहुंचीं।
बड़ा सवाल यह है—
परीक्षा की संवेदनशील सामग्री आयोग के बाहर एजेंसी के आवासीय परिसर तक पहुंची कैसे?
पूछताछ में TDPL के एक अन्य कर्मी प्रदीप कुमार सिंह ने CID को बताया कि उक्त कंप्यूटर कंपनी के स्टाफ मो. उस्मान और मो. एबाद द्वारा वहां लाए गए थे।जब CID ने इस संबंध में उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता से पूछताछ की तो उनके हवाले से सामने आया कि परीक्षा से संबंधित दस्तावेजों को बाहर भेजने की अनुमति नहीं थी।इसके बावजूद संवेदनशील परीक्षा सामग्री एजेंसी के आवासीय परिसर में रखे जाने की बात जांच में सामने आई है।
रिजल्ट से 37 दिन पहले Answer Key भेजे जाने का दावा!
जांच का सबसे चौंकाने वाला पहलू 14वीं JPSC PT से जुड़ा बताया जा रहा है।
14वीं JPSC PT की परीक्षा 19 अप्रैल को हुई थी और उसका परिणाम 2 जुलाई को जारी हुआ।
लेकिन CID की जांच के अनुसार, उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता के मोबाइल की जांच में सामने आया कि उन्होंने 26 मई को TDPL के कर्मी मो. उस्मान के WhatsApp पर 14वीं JPSC PT की Answer Key भेजी थी।यानी परीक्षा परिणाम जारी होने से करीब 37 दिन पहले Answer Key साझा किए जाने का दावा जांच में सामने आया है।
यहां भी जांच का सवाल बेहद सीधा है—
जब परीक्षा से जुड़े संवेदनशील दस्तावेज साझा करने की अनुमति नहीं थी, तो Answer Key WhatsApp पर क्यों और किस उद्देश्य से भेजी गई?और उससे भी बड़ा सवाल—
क्या यह सिर्फ नियमों का उल्लंघन था या परीक्षा की गोपनीयता से जुड़ी किसी बड़ी चूक की कड़ी?इन सवालों का जवाब अब CID की जांच में तलाशा जा रहा है।
एक एजेंसी, पूरी प्रक्रिया और गोपनीय दस्तावेजों तक पहुंच—CID के सामने कई सवाल
पूरे घटनाक्रम को जोड़कर देखें तो जांच में तीन बड़े बिंदु उभरकर सामने आ रहे हैं—
पहला: TDPL को बिना निविदा, नॉमिनेशन के आधार पर काम दिए जाने का दावा।
दूसरा: परीक्षा संचालन की शुरुआत से अंत तक की जिम्मेदारी एक ही एजेंसी को सौंपे जाने की बात।
तीसरा: एजेंसी के आवासीय परिसर से संवेदनशील परीक्षा सामग्री और कंप्यूटर मिलने तथा Answer Key WhatsApp पर भेजे जाने की जानकारी।
इन घटनाओं ने JPSC की परीक्षा व्यवस्था में गोपनीयता, निगरानी और जवाबदेही के पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब CID जांच के सामने सबसे अहम सवाल यही है कि क्या ये अलग-अलग घटनाएं महज प्रक्रियागत चूक थीं या इनके पीछे परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली कोई सुनियोजित व्यवस्था काम कर रही थी?जांच आगे बढ़ने के साथ इस पूरे मामले में और भी कई परतें खुलने की संभावना है।
