रिश्तों का कत्ल: जब रक्षक ही बन जाए भक्षक, तो समाज किधर जाएगा?

​रगोड्डा/कटिहार।कुछ दिन पहले रेल पुलिस ने जमुई में पदस्थापित जूनियर इंजीनियर देव कुमार गुंजन की हत्या का जो सनसनीखेज खुलासा किया, उसने न सिर्फ कानून व्यवस्था को बल्कि हमारे पूरे सामाजिक ताने-बाने को झकझोर कर रख दिया है। गोड्डा के रहने वाले एक होनहार अधिकारी की जान किसी बाहरी दुश्मन ने नहीं, बल्कि सात फेरे लेकर जीवन भर साथ निभाने का वादा करने वाली उसकी पत्नी ने ही ले ली। महज एक कथित प्रेम प्रसंग और अपनी हसरतों को पूरा करने के लिए चार लाख रुपये की सुपारी देकर चलती ट्रेन में इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिलाया गया। कटिहार रेल एसपी हरिशंकर कुमार के अनुसार, मृतक की पत्नी अस्मिता कुमारी (जो खुद सुपौल में MVI जैसे जिम्मेदार पद पर हैं) ने अपने कथित प्रेमी अजीत कुमार और शूटर राजू कुमार के साथ मिलकर इस पूरी साजिश को रचा था।आज ये तीनों सलाखों के पीछे हैं, लेकिन यह घटना अपने पीछे कई अनुत्तरित और कड़वे सवाल छोड़ गई है।

​यह घटना कोई पहली या आखिरी नहीं है। आए दिन ऐसी खबरें सामने आती हैं जहां अवैध संबंधों, पैसों की हवस या आपसी अहंकार के कारण सबसे पवित्र माने जाने वाले ‘पति-पत्नी’ के रिश्ते का बेरहमी से कत्ल कर दिया जाता है। आखिर एक पढ़ा-लिखा, सभ्य और समाज का प्रतिष्ठित हिस्सा माना जाने वाला वर्ग इस कदर नैतिक पतन का शिकार क्यों हो रहा है?

​आज के दौर में हम आर्थिक और पेशेवर रूप से जितने सक्षम हो रहे हैं, नैतिक और भावनात्मक रूप से उतने ही कमजोर होते जा रहे हैं। जब जीवन में ‘संस्कार’ और ‘ठहराव’ की जगह ‘अंधाधुंध महत्वाकांक्षा’ और ‘क्षणिक सुख’ ले लेते हैं, तो इंसान सही और गलत का अंतर भूल जाता है। वैवाहिक जीवन की नींव आपसी विश्वास, त्याग और संवाद पर टिकी होती है। जब शादी को एक पवित्र बंधन न मानकर केवल एक ‘समझौता’ या ‘सामाजिक औपचारिकता’ मान लिया जाता है, तो उसमें दरार आना तय है। साथी से खुलकर बात करने के बजाय लोग बाहर विकल्प तलाशने लगते हैं, जो अंततः ऐसे हिंसक अपराधों में तब्दील हो जाता है। इसके अलावा आज की पीढ़ी में धैर्य की भारी कमी देखी जा रही है। अगर किसी रिश्ते में तालमेल नहीं बैठ रहा है, तो कानूनी और सामाजिक रास्ते खुले हैं। लेकिन कानून का डर और समाज की परवाह किए बिना सीधे ‘रास्ते से हटा देने’ की मानसिकता यह दर्शाती है कि समाज में असहिष्णुता और आक्रामकता किस कदर हावी हो चुकी है। सोचने वाली बात यह है कि जब समाज के उच्च शिक्षित और जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग इस तरह की मानसिकता का शिकार हो रहे हैं, तो हम आने वाली पीढ़ी को क्या संदेश दे रहे हैं?

​अगर पूरे मामले पर नजर डालें तो मूल रूप से गोड्डा के हरिपुर गरबन्ना निवासी देव कुमार गुंजन जमुई के विद्युत विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे। 11 जून को वह अपनी पत्नी से मिलने सुपौल जा रहे थे, तभी मानसी-सहरसा रेलखंड पर बदला घाट के पास जनसाधारण एक्सप्रेस में अपराधियों ने उन्हें गोली मार दी। इलाज के दौरान पटना में उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद बरौनी रेल SDPO के नेतृत्व में गठित SIT ने तकनीकी एवं वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जांच करते हुए इस पूरे मामले का खुलासा किया। पुलिस के अनुसार, सुपौल में MVI के पद पर कार्यरत अस्मिता कुमारी का नालंदा में पदस्थापित ग्रेड-वन टेक्नीशियन अजीत कुमार के साथ कथित प्रेम संबंध था। दोनों एक साथ रहना चाहते थे और इसमें देव कुमार गुंजन बाधा बन रहे थे। इसी कारण दोनों ने जहानाबाद के शूटर राजू कुमार उर्फ धीरज को चार लाख रुपये की सुपारी देकर हत्या की जिम्मेदारी सौंपी, जिसने चलती ट्रेन में इस वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

​यह हत्याकांड सिर्फ एक क्राइम फाइल का हिस्सा नहीं है, बल्कि हमारे समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। रिश्तों में बढ़ती दूरियां, असीमित हसरतें और नैतिक मूल्यों का लगातार गिरता ग्राफ हमें एक ऐसे अंधेरे मुहाने पर लाकर खड़ा कर रहा है, जहां कोई भी सुरक्षित नहीं है। अगर अब भी हम अपने परिवार, संस्कारों और आपसी रिश्तों को सहेजना नहीं शुरू करेंगे, तो ‘घर’ और ‘अपनों’ शब्द से भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा।

error: Content is protected !!