झारखण्ड पुलिस के डीजी से 2 लाख की ठगी, भरोसेमंद कर्मचारी ने कृषि जमीन के नाम पर बनाए जाली दस्तावेज, लालपुर थाने में एफआईआर दर्ज

राँची।झारखण्ड पुलिस के डीजी रेंक के अधिकारी और उनके सहयोगियों से कृषि कार्य के नाम पर लाखों रुपये की ठगी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। ठगी की इस वारदात को किसी बाहरी गिरोह ने नहीं, बल्कि डीजी के ही एक पुराने और बेहद भरोसेमंद कर्मचारी संजीव कुमार (निवासी: गया, बिहार) ने अंजाम दिया है। आरोपी ने पश्चिम बंगाल में लीज और इजारा (कृषि पट्टा) पर जमीन लेने के नाम पर जाली दस्तखत और फर्जी एग्रीमेंट पेपर तैयार कर कुल ₹1,97,402 हड़प लिए और पकड़े जाने के डर से फरार हो गया। इस संबंध में डीजी ने राँची के लालपुर थाना प्रभारी को लिखित आवेदन देकर आरोपी कर्मचारी के खिलाफ नए कानून ‘भारतीय न्याय संहिता’ की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई है।
3 एकड़ जमीन पर खेती के लिए रखा था कर्मचारी, पत्नी के खाते में भेजे जाते थे पैसे
शिकायत के अनुसार, डीजी ने (बोकारो) निवासी रवींद्र सिंह माण्ड और कोलकाता निवासी दिलीप कुमार साव व उनके परिजनों ने खेती करने के उद्देश्य से ग्राम-इटला (शाहपुर), जिला पूर्वी वर्द्धमान (पश्चिम बंगाल) में 3 एकड़ जमीन खरीदी थी। इस जमीन की देखरेख और खेती-बाड़ी का काम संभालने के लिए उन्होंने संजीव कुमार को मासिक वेतन पर बतौर कर्मचारी रखा था। खेती के खर्च के लिए राँची और कोलकाता से मालिकान द्वारा यूपीआई (UPI) के माध्यम से संजीव कुमार की पत्नी सोनी देवी के आईडीबीआई बैंक खाते में पैसे भेजे जाते थे। संजीव कुमार रोजाना के आय-व्यय का पूरा ब्योरा खुद अपनी लिखावट में एक डायरी में दर्ज करता था और मालिकों को भेजता था।
जमीन लीज में ₹34,000 की हेराफेरी, भौतिक सत्यापन में खुला राज
अक्टूबर 2025 में संजीव कुमार ने राँची आकर डीजी को बताया कि इटला गांव के रहने वाले नित्यानंद गायन नामक व्यक्ति अपनी 3 बीघा जमीन 1 वर्ष के लिए ₹84,000 में लीज पर दे रहे हैं। मालिकों की सहमति के बाद संजीव ने अपनी हस्तलिपि के ब्योरे में दिखाया कि उसने जमीन मालिक को तीन किश्तों में पूरे ₹84,000 का भुगतान कर दिया है। कुछ दिनों पूर्व जब डीजी ने अपने स्तर से इसका भौतिक सत्यापन किया गया, तो जमीन मालिक नित्यानंद गायन ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि सौदा ₹84,000 में नहीं, बल्कि मात्र ₹60,000 प्रति वर्ष में हुआ था। इसके एवज में भी आरोपी संजीव कुमार ने उन्हें यूपीआई के जरिए सिर्फ ₹50,000 का भुगतान किया था और ₹10,000 अभी भी बाकी था। आरोपी ने मालिकों से ₹84,000 ऐंठे और मालिक को सिर्फ ₹50,000 देकर सीधे तौर पर ₹34,000 का गबन कर लिया।
फर्जी दस्तखत कर ‘इजारा’ के ₹1,00,000 डकारे, व्हाट्सएप एग्रीमेंट निकला जाली
अप्रैल 2026 में आरोपी संजीव कुमार ने दोबारा एक नया जाल बुना। उसने मालिकों को सूचना दी कि एक व्यक्ति ₹1,00,000 के बदले 2 वर्षों के लिए 3 बीघा जमीन ‘इजारा’ (कृषि एग्रीमेंट) पर देने को तैयार है। मालिकों की हरी झंडी मिलने के बाद संजीव ने दैनिक डायरी में कुल ₹1,00,000 का खर्च दर्शा दिया और बकायदा एक एग्रीमेंट पेपर तैयार कर डीजी रेल को व्हाट्सएप पर भेज दिया। संजीव कुमार के चाल-चरित्र पर संदेह होने पर जब डीजी रेल ने एग्रीमेंट पेपर की जांच कराई, तो पाया कि वह एग्रीमेंट भी नित्यानंद गायन के ही नाम पर बनाया गया था। जब नित्यानंद गायन से पूछा गया, तो उन्होंने साफ किया कि उनका ऐसी किसी ‘इजारा’ जमीन को लेकर कोई करार नहीं हुआ था और उन्हें इस बाबत एक भी रुपया नहीं मिला। एग्रीमेंट पेपर पर दिख रहे उनके हस्ताक्षर पूरी तरह जाली और फर्जी हैं। आरोपी ने छद्म तरीके से जाली दस्तावेज तैयार कर पूरे ₹1,00,000 का गबन कर लिया।
पूर्व के हिसाब के ₹63,402 भी ले भागा, कुल ₹1.97 लाख की धोखाधड़ी
जांच और व्हाट्सएप मैसेजेस के ऑडिट में यह भी साफ हुआ कि आरोपी संजीव कुमार ने पूर्व के कृषि कार्यों के बचे हुए शेष बैलन्स में से ₹63,402 की राशि का भी पूरी तरह से गबन कर लिया है। इस प्रकार आरोपी ने तीनों मामलों को मिलाकर कुल ₹1,97,402 की वित्तीय ठगी की वारदात को अंजाम दिया।
मां की बीमारी का बहाना बना फार्म हाउस से फरार, पुलिस जांच में जुटी
जब आरोपी संजीव कुमार को भनक लगी कि उसकी चोरियां पकड़ी जा चुकी हैं, तो वह 2 जून 2026 को अपनी मां की बीमारी का झूठा बहाना बनाकर इटला (पश्चिम बंगाल) स्थित फार्म हाउस से अचानक लापता हो गया और अपना मोबाइल फोन भी बंद कर लिया। बाद में जब मालिकों ने किसी तरह व्हाट्सएप के जरिए उससे संपर्क साधा, तो उसने रमन हाजरा नामक किसी व्यक्ति से इजारा जमीन लेने की झूठी कहानी गढ़ी। हालांकि, जब डीजी ने अपने दूसरे कर्मचारी गणेश प्रमाणिक से बांग्ला भाषा में लिखे उस एग्रीमेंट को पढ़वाया, तो उसमें रमन हाजरा नहीं बल्कि फिर से नित्यानंद गायन का ही नाम दर्ज था, जिससे धोखाधड़ी पूरी तरह स्थापित हो गई। फिलहाल लालपुर थाना पुलिस मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश में जुट गई है।

