मुंबई पुलिस की दबिश से पहले ही फरार हुआ साइबर ठगी का आरोपी, बेंगाबाद में घंटों चली छापेमारी

गिरिडीह।मुंबई में 2.47 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले की जांच करते हुए मुंबई पुलिस की टीम गिरिडीह के बेंगाबाद पहुंची, लेकिन जिस आरोपी की तलाश में पुलिस आई थी, वह पहले ही फरार हो चुका था। स्थानीय पुलिस की मदद से कई ठिकानों पर लगातार छापेमारी की गई, लेकिन आरोपी का कोई सुराग नहीं मिल सका। अब मुंबई पुलिस ने आरोपी की तस्वीर जारी कर जल्द गिरफ्तारी का दावा किया है।
पुलिस द्वारा जारी आरोपी की तस्वीर
मुंबई के ट्रॉम्बे थाना के अधिकारी सूरज खेतल के अनुसार, बेंगाबाद थाना क्षेत्र के छोटकी खरगडीहा स्थित डोंगो गांव निवासी राजा सलीम अंसारी के खिलाफ 22 जनवरी 2026 को ट्रॉम्बे थाने में मामला दर्ज किया गया था। आरोप है कि उसने महानगर गैस (एमजीएनएल) के नाम पर एक एपीके फाइल भेजकर 61 वर्षीय महिला जयलक्ष्मी हनुमंत दिग्पुल्ली के मोबाइल में उसे डाउनलोड कराया। फाइल इंस्टॉल होते ही साइबर अपराधियों ने उनके बैंक खाते से 2,47,367 रुपये उड़ा लिए।
साइबर ठगी की जांच के दौरान तकनीकी साक्ष्यों ने पुलिस को गिरिडीह के बेंगाबाद तक पहुंचाया। जांच में राजा सलीम अंसारी की संलिप्तता सामने आने के बाद ट्रॉम्बे पुलिस स्थानीय पुलिस के साथ उसके घर पहुंची, लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही आरोपी फरार हो गया।
जानकारी के मुताबिक आरोपी सफेद रंग की स्कॉर्पियो (जेएच-02 बीए-8335) से मौके से भाग निकला। मुंबई पुलिस ने उसका पीछा भी किया, लेकिन वह पुलिस को चकमा देकर निकलने में सफल रहा। इसके बाद कई संभावित ठिकानों पर दिन-रात छापेमारी की गई, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी।
आरोपी के फरार होने के बाद पुलिस ने उसके परिजनों से पूछताछ कर उसे वापस बुलाने का प्रयास किया, लेकिन अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। अंततः मुंबई पुलिस की टीम खाली हाथ लौट गई। हालांकि जांच अधिकारी ने साफ कहा कि आरोपी अधिक दिनों तक कानून से बच नहीं पाएगा और उसकी गिरफ्तारी के प्रयास लगातार जारी रहेंगे।
गिरिडीह का बेंगाबाद क्षेत्र लगातार साइबर अपराध के मामलों को लेकर सुर्खियों में है। पिछले कुछ वर्षों में कई राज्यों की पुलिस यहां छापेमारी कर चुकी है और कई साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी भी हुई है। गिरिडीह पुलिस भी लगातार अभियान चला रही है, लेकिन इसके बावजूद साइबर ठगी के नेटवर्क पर पूरी तरह लगाम नहीं लग सकी है। ऐसे में इस संगठित साइबर गिरोह के नेटवर्क को ध्वस्त करना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

