अब ड्रग्स पर सबसे बड़ा वार: झारखण्ड में स्वतंत्र होगी एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स, 3 साल की रणनीति बनेगी..

 

राँची।झारखण्ड में अब नक्सलवाद के साथ-साथ ड्रग्स तस्करी के खिलाफ भी निर्णायक लड़ाई की तैयारी शुरू हो गई है। नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित नार्को कोऑर्डिनेशन सेंटर (एनकॉर्ड) की 10वीं शीर्ष स्तरीय बैठक में राज्यों को स्पष्ट संदेश दिया गया कि ड्रग्स के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना अब सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। इसी क्रम में झारखण्ड की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एटीएफ) को स्वतंत्र इकाई के रूप में विकसित करने और उसे अधिक संसाधनों से लैस करने का निर्णय लिया गया।

बैठक में झारखण्ड पुलिस महानिदेशक तदाशा मिश्र, एटीएफ प्रमुख अशीम विक्रांत मिंज, एनसीबी के जोनल डायरेक्टर आकाश सिंगला सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक के दौरान राज्य में ड्रग्स तस्करी के खिलाफ चल रहे अभियान की समीक्षा भी की गई।

ड्रग्स माफियाओं के खिलाफ अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए झारखण्ड एटीएफ का व्यापक पुनर्गठन किया जाएगा। इसे स्वतंत्र इकाई के रूप में कार्य करने की जिम्मेदारी दी जाएगी और पुलिस बल सहित आवश्यक मानव संसाधन बढ़ाए जाएंगे, ताकि कार्रवाई और खुफिया तंत्र दोनों को मजबूत किया जा सके।

बैठक में निर्देश दिया गया कि राज्य अगले तीन वर्षों के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करे। इस रोडमैप का उद्देश्य ड्रग्स तस्करी की पूरी श्रृंखला को तोड़ना, युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाना और संगठित अपराध पर प्रभावी प्रहार करना होगा।

ड्रग्स मामलों में अब कार्रवाई केवल बरामदगी और गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी। बड़े नेटवर्क की आर्थिक जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की मदद ली जाएगी, जबकि विदेश भाग चुके तस्करों को कानून के दायरे में लाने के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) का सहयोग लिया जाएगा।

बैठक में झारखण्ड पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत राज्य में की गई कार्रवाई का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। अधिकारियों ने बताया कि नशीले पदार्थों के कारोबार में शामिल अपराधियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है और आने वाले समय में इसे और अधिक तेज किया जाएगा।बैठक का संदेश साफ रहा—झारखण्ड में अब ड्रग्स तस्करी के खिलाफ अभियान को नई गति, नई संरचना और दीर्घकालिक रणनीति के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।

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