एक सफर खुशियां बांटने का था, लेकिन लौटीं सिर्फ आठ अर्थियां… रामगढ़ सड़क हादसे ने उजाड़ दिए कई परिवार
रामगढ़।झारखण्ड के रामगढ़ जिले में 25 जून की रात आठ लोगों का एक दल बिहार के मुजफ्फरपुर के लिए रवाना हुआ था। पेशे से सभी ताशा वादक थे और किसी के घर होने वाले खुशी के समारोह में अपनी कला से रौनक बिखेरने जा रहे थे। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। रामगढ जिले में लारी-बरलौंग के पास कोयला लदे ट्रक ने उनकी सवारी गाड़ी को इतनी जोरदार टक्कर मारी कि आठों लोगों की जिंदगी हमेशा के लिए थम गई।
हादसा इतना भीषण था कि सात लोगों ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया, जबकि एक घायल की इलाज के दौरान मौत हो गई। शुक्रवार को रामगढ़ सदर अस्पताल का पोस्टमार्टम हाउस सिर्फ शवों का नहीं, बल्कि टूटे सपनों, बिखरे परिवारों और बेसहारा हुए अपनों का दर्द समेटे नजर आया।
दो महीने पहले सजी थी नई गृहस्थी, अब रह गईं सिर्फ यादें
हजारीबाग के कटहरवा गांव निवासी 25 वर्षीय हेमंत कुमार महतो ने महज दो महीने पहले ही शादी की थी। घर से निकलते वक्त उन्होंने परिजनों से कहा था कि कार्यक्रम से लौटकर मुलाकात होगी, लेकिन यह उनकी आखिरी विदाई साबित हुई। बेटे की मौत की खबर सुनते ही मां बेसुध हो गईं, जबकि नई-नवेली पत्नी की दुनिया पल भर में उजड़ गई।
तीन महीने के मासूम से छिन गया पिता का साया
31 वर्षीय अनोद कुमार अपने परिवार की रोजी-रोटी के लिए ताशा बजाते थे। घर पर पत्नी, चार साल की बेटी और तीन महीने का बेटा उनका इंतजार कर रहे थे। किसी ने नहीं सोचा था कि जो पिता कुछ दिनों में लौटने का वादा कर गया था, अब उसका बेटा उसे सिर्फ तस्वीरों में ही देख पाएगा।
भविष्य के सपने अधूरे रह गए
करीब दो साल पहले शादी करने वाले पवन करमाली अपनी पत्नी के साथ नए जीवन के सपने बुन रहे थे। परिवार बढ़ाने की उम्मीदें थीं, लेकिन एक सड़क हादसे ने उन सभी सपनों को हमेशा के लिए खत्म कर दिया। उनकी कोई संतान नहीं थी। अब घर में सिर्फ उनकी यादें बची हैं।
दादा को था पोते की वापसी का इंतजार
22 वर्षीय डेविड करमाली की शादी नहीं हुई थी। परिवार को उससे बड़ी उम्मीदें थीं। दादा बढ़न राम करमाली बताते हैं कि कुछ घंटे पहले ही पोते से मुलाकात हुई थी। बाद में गांव वालों ने हादसे की खबर दी। दिहाड़ी मजदूर पिता और छोटी बहन के लिए डेविड एक बड़ा सहारा था, जो अब हमेशा के लिए छिन गया।
दोपहर में भाई की मदद की, रात में मौत की खबर आई
मनीष कुमार ने दोपहर में छोटे भाई की पढ़ाई के लिए ऑनलाइन पैसे भेजे थे। रात में फिर फोन आया, लेकिन इस बार खबर थी कि मनीष अब इस दुनिया में नहीं रहे। अब घर में बुजुर्ग माता-पिता के साथ सिर्फ छोटा भाई रह गया है।
हर घर में मातम, हर आंख में सवाल
इस हादसे में अनोद कुमार, डेविड करमाली, पप्पू करमाली, पवन करमाली, अशोक डोम, शक्ति डोम, हेमंत कुमार महतो और मनीष कुमार की जान चली गई। आठ मौतों ने कई परिवारों की जिंदगी बदल दी। कहीं सुहाग उजड़ गया, कहीं बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया, तो कहीं माता-पिता ने अपने जवान बेटे खो दिए।
मुआवजे की मांग, आंदोलन की चेतावनी
घटना के बाद रामगढ़ सदर अस्पताल में राजनीतिक नेताओं का भी जमावड़ा लगा। रामगढ़ विधायक ममता देवी ने पीड़ित परिवारों को न्याय और सरकारी मुआवजा दिलाने का भरोसा दिया। वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी हादसे पर गहरी संवेदना व्यक्त की और पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता दिलाने का आश्वासन दिया।
फिलहाल, परिजन और ग्रामीण प्रशासन से मुआवजे की मांग पर अड़े हैं। उनका कहना है कि यदि जल्द उचित निर्णय नहीं लिया गया तो हादसा स्थल पर शव रखकर एनएच-23 को जाम किया जाएगा।यह हादसा सिर्फ आठ लोगों की मौत नहीं, बल्कि उन परिवारों की जिंदगी में हमेशा के लिए छा गया अंधेरा है, जिनके घरों के चिराग एक ही पल में बुझ गए।

