21 दिन में उजड़ गया परिवार: बेटे के गम से उबर नहीं पाए पिता, तेज रफ्तार बस ने ली जान
राँची।कहते हैं कुछ जख्म वक्त भी नहीं भर पाता। राजधानी राँची के मिशन गली निवासी 66 वर्षीय सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी नवलकिशोर पासवान के परिवार के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। बड़े बेटे की मौत का दर्द अभी ताजा ही था कि महज 21 दिन बाद सड़क हादसे ने परिवार के मुखिया को भी छीन लिया। अब घर में मातम और सन्नाटा दोनों पसरे हैं।
गुरुवार सुबह करीब सात बजे कचहरी रोड स्थित राम मंदिर के पास तेज रफ्तार बस ने बाइक सवार नवलकिशोर पासवान को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर लगते ही वह सड़क पर गिर पड़े और बस चालक वाहन रोकने के बजाय उन्हें कुचलते हुए मौके से फरार हो गया। हादसे में उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दुर्घटना इतनी भयावह थी कि आसपास मौजूद लोग दहल उठे। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेज दिया। फरार बस चालक की तलाश में पुलिस ने नाकेबंदी कर बस को जब्त कर लिया है, जबकि आरोपी चालक की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है।
बेटे के निधन के बाद टूट चुके थे नवलकिशोर
परिजनों ने बताया कि चार जून को बड़े बेटे मनीष कुमार की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई थी। बेटे के जाने के बाद नवलकिशोर पासवान गहरे सदमे में थे और मानसिक रूप से काफी परेशान रहने लगे थे। परिवार इस दुख से उबर भी नहीं पाया था कि अब सड़क हादसे ने एक और बड़ा झटका दे दिया।
सब्जी खरीदकर लौटते समय हुआ हादसा
पुलिस के अनुसार नवलकिशोर पासवान सीएमपीडीआई के पास से सब्जी खरीदकर घर लौट रहे थे। इसी दौरान राम मंदिर के समीप तेज रफ्तार बस ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। मृतक के बेटे सुशांत कुमार की शिकायत पर कांके थाना में मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है।
बस जब्त, चालक की तलाश तेज
जांच में पता चला है कि दुर्घटनाग्रस्त बस डोरंडा के पारस टोली निवासी मोहम्मद अदल के नाम से निबंधित है। पुलिस बस को जब्त कर दस्तावेजों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि चालक की पहचान हो चुकी है और जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
हादसे के बाद फूटा लोगों का गुस्सा
दुर्घटना के बाद बड़ी संख्या में स्थानीय लोग घटनास्थल पर जुट गए, जिससे कुछ समय के लिए यातायात बाधित हो गया। लोगों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि कचहरी रोड पर तेज रफ्तार बसों का आतंक लंबे समय से जारी है। स्थानीय नागरिकों ने संवेदनशील इलाकों में सख्त ट्रैफिक निगरानी, स्पीड लिमिट का पालन और लापरवाह चालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

