सात फेरे, सात महीने..और फिर चिता;दहेज की आग में बुझ गई नेहा की जिंदगी..

पलामू। शादी के समय लिए गए सात फेरों में जीवनभर साथ निभाने का वादा किया गया था, लेकिन महज सात महीने बाद वही रिश्ता नेहा कुमारी के लिए मौत का कारण बन गया। पलामू जिले के तरहसी थाना क्षेत्र के कसमार गांव से सामने आया यह मामला एक बार फिर दहेज प्रथा की भयावह सच्चाई को सामने लाता है। यहां एक नवविवाहिता की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि मायके पक्ष ने ससुराल वालों पर पेट्रोल छिड़ककर जिंदा जलाने का गंभीर आरोप लगाया है।

दहेज बना रिश्ते का सबसे बड़ा दुश्मन

मृतका के पिता बल्लू राम, जो चतरा के रहने वाले हैं, ने पुलिस को दिए आवेदन में बताया कि नेहा की शादी 25 नवंबर 2025 को कसमार निवासी पवन कुमार के साथ हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी। परिवार का आरोप है कि शादी के कुछ ही दिनों बाद दहेज की मांग को लेकर नेहा को लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना दी जाने लगी।शादी के समय डेढ़ लाख रुपए दहेज देने की बात तय हुई थी, जिसमें से 80 हजार रुपए दिए जा चुके थे और 70 हजार रुपए बकाया था। परिजनों का आरोप है कि शादी के बाद से ही नेहा को दहेज के बकाया रुपयों के लिए लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था।

परिजनों के अनुसार, 10 मई 2026 की शाम पति पवन कुमार और ससुर महेंद्र राम ने कथित रूप से नेहा पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। गंभीर रूप से झुलसी नेहा को पहले मेदिनीनगर और फिर राँची के रिम्स में भर्ती कराया गया, जहां करीब डेढ़ महीने तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद 26 जून की सुबह उसने दम तोड़ दिया।

यह सिर्फ एक हत्या नहीं, समाज के सामने खड़ा बड़ा सवाल

यदि परिजनों के आरोप जांच में सही साबित होते हैं, तो यह घटना केवल एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि उस सामाजिक मानसिकता का आईना है, जहां आज भी कई बेटियों का मूल्य दहेज से तय किया जाता है। शादी, जो दो परिवारों का पवित्र बंधन मानी जाती है, कई मामलों में आर्थिक सौदे में बदल जाती है और इसकी सबसे बड़ी कीमत बेटियों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है।

राष्ट्रीय स्तर पर हर वर्ष दहेज प्रताड़ना और दहेज हत्या के हजारों मामले दर्ज होते हैं। कानून सख्त होने के बावजूद लालच और सामाजिक दबाव ऐसी घटनाओं को पूरी तरह रोक नहीं पाए हैं। यह मामला भी उसी कड़वी हकीकत की याद दिलाता है कि केवल कानून नहीं, बल्कि समाज की सोच में बदलाव भी उतना ही जरूरी है।

इधर,मृतका के पिता ने तरहसी थाना में लिखित शिकायत देकर पति, ससुर और अन्य आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने आवेदन के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है।यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो आरोपियों पर दहेज हत्या, क्रूरता और हत्या से संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल पुलिस घटनास्थल, चिकित्सीय रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की पड़ताल कर रही है।

एक बेटी की मौत, कई सवाल

नेहा अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी मौत कई सवाल छोड़ गई है-क्या आज भी दहेज बेटियों की जिंदगी से बड़ा है? क्या कानून का डर खत्म हो गया है? और आखिर कब तक शादी के कुछ महीनों बाद बेटियों की अर्थियां मायके लौटती रहेंगी?

फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है। जांच पूरी होने के बाद ही घटना की परिस्थितियां और आरोपों की सत्यता स्पष्ट हो सकेगी, लेकिन इतना तय है कि यह घटना दहेज जैसी सामाजिक कुरीति और उससे जुड़े गंभीर अपराध पर फिर से बहस छेड़ गई है।

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