पुलिस के विरोध के बीच विधायक जयराम महतो की सफाई, वायरल ऑडियो को बताया एडिटेड

 

धनबाद। डुमरी विधायक जयराम महतो और बरवाअड्डा थाना प्रभारी के बीच कथित फोन बातचीत को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पुलिस बनाम विधायक के टकराव में बदलता दिख रहा है। झारखण्ड पुलिस एसोसिएशन की धनबाद शाखा ने विधायक के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए सार्वजनिक माफी और कार्रवाई की मांग की है। एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि विधायक ने थाना प्रभारी और पुलिसकर्मियों के साथ बातचीत के दौरान गाली-गलौज और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया। कार्रवाई नहीं होने पर पुलिसकर्मियों ने आंदोलन की चेतावनी भी दी है।

वहीं, पुलिस एसोसिएशन के आरोपों के बाद विधायक जयराम महतो ने भी अपना पक्ष सामने रखा है। उन्होंने वायरल ऑडियो की प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि रिकॉर्डिंग के साथ छेड़छाड़ की गई है। विधायक का कहना है कि बातचीत के कई हिस्सों को एडिट किया गया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए भी ऑडियो में बदलाव किए जाने की आशंका है।

झाखण्ड पुलिस एसोसिएशन की धनबाद शाखा की ओर से जारी दो पन्नों की प्रेस विज्ञप्ति में विधायक के कथित व्यवहार पर गंभीर आपत्ति जताई गई है। एसोसिएशन के मुताबिक, 21 अगस्त की रात विधायक और बरवाअड्डा थाना प्रभारी के बीच फोन पर बातचीत हुई थी। आरोप है कि इस दौरान थाना प्रभारी के साथ अभद्र भाषा और गाली-गलौज की गई।एसोसिएशन का दावा है कि बातचीत में सरकार बदलने के बाद पुलिस अधिकारियों को सबक सिखाने और झारखंड के जिस थाने में रहने की बात कही गई, उस तरह की बातें भी की गईं। एसोसिएशन ने इसे पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों के सम्मान तथा मनोबल से जुड़ा गंभीर मामला बताया है।पुलिस एसोसिएशन ने सरकार से विधायक के खिलाफ कार्रवाई और सार्वजनिक रूप से माफी की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि 24 घंटे के भीतर मामले में ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आगे आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।

विधायक बोले-ऑडियो पूरा नहीं, कई हिस्से हटाए गए
विधायक जयराम महतो ने सफाई देते हुए कहा कि वायरल ऑडियो को पूरी बातचीत बताकर पेश किया जा रहा है, जबकि ऐसा नहीं है। उनके मुताबिक, बातचीत के कई हिस्से रिकॉर्डिंग से गायब हैं और उनकी कही गई बातों को भी एडिट किया गया है।
हालांकि, विधायक ने यह स्वीकार किया कि उन्होंने थाना प्रभारी से सख्त लहजे में बात की थी। उनका कहना है कि जनता से जुड़े मामलों में अधिकारियों से जवाब मांगना और जरूरत पड़ने पर कड़े शब्दों में अपनी बात रखना जनप्रतिनिधि के दायित्व का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं को लेकर वह पहले भी एसपी, डीएसपी और इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों को फटकार लगा चुके हैं। विधायक के मुताबिक, यदि किसी अधिकारी से लगातार शिकायतें मिलती हैं और जनता की समस्या का समाधान नहीं होता है तो जनप्रतिनिधि के तौर पर सवाल उठाना उनका अधिकार और जिम्मेदारी दोनों है।

अगर इतना गुस्सा था तो थाना प्रभारी ने फोन क्यों नहीं काटा?’
वायरल ऑडियो को लेकर विधायक ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि बातचीत के दौरान वह लगातार इतने गुस्से में और अभद्र भाषा में बात कर रहे थे, तो थाना प्रभारी ने फोन क्यों नहीं काटा। उनका तर्क है कि आमतौर पर ऐसी स्थिति में सामने वाला व्यक्ति बातचीत समाप्त कर देता है।विधायक का दावा है कि बातचीत में थाना प्रभारी की ओर से कही गई कई बातें भी ऑडियो से हटा दी गई हैं और केवल चुनिंदा अंश को सामने लाकर पूरे मामले को अलग रूप देने की कोशिश की गई है।

थाना प्रभारी पर भी विधायक ने लगाए आरोप
जयराम महतो ने बरवाअड्डा थाना प्रभारी पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने बालू से जुड़े मामलों में कथित अवैध वसूली और पैसे थाना प्रभारी तक पहुंचने का आरोप लगाया। इसके अलावा विधायक ने एक महिला पुलिसकर्मी के साथ थाना प्रभारी के कथित संबंधों को लेकर भी आरोप लगाए हैं।हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में विधायक की ओर से फिलहाल कोई सार्वजनिक दस्तावेज या स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं रखा गया है। ऐसे आरोपों की पुष्टि आधिकारिक जांच या संबंधित पक्ष के बयान के बाद ही हो सकेगी।

व्हाट्सएप कॉल रिकॉर्डिंग सार्वजनिक करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी

विधायक ने व्हाट्सएप कॉल की रिकॉर्डिंग को सार्वजनिक किए जाने पर भी सवाल उठाया है। उन्होंने इसे निजी बातचीत की गोपनीयता से जुड़ा मामला बताते हुए कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है।उनका कहना है कि निजी बातचीत को रिकॉर्ड कर सार्वजनिक करना गंभीर विषय है और वह निजता के कथित उल्लंघन को लेकर कानूनी कदम उठाएंगे।

जिस विवाद से शुरू हुआ पूरा मामला
पूरा विवाद बरवाअड्डा थाना क्षेत्र की बड़ापिछरी पंचायत से जुड़े एक मामले के बाद शुरू हुआ। पंचायत की मुखिया यशोदा देवी ने गणेश दास नामक व्यक्ति पर कथित तौर पर उनके फर्जी हस्ताक्षर और मुहर का इस्तेमाल कर जाति प्रमाण पत्र, आवासीय प्रमाण पत्र और वंशावली तैयार कराने का आरोप लगाया था।शिकायत के आधार पर बरवाअड्डा थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने गणेश दास को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की थी। इसके बाद शुक्रवार को विधायक जयराम महतो अपने समर्थकों के साथ बरवाअड्डा थाना पहुंचे।थाना परिसर में दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति बन गई और समर्थकों के बीच झड़प की नौबत आ गई। पुलिस ने किसी तरह स्थिति को नियंत्रित किया। इसके बाद शनिवार को दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई।वहीं, सोमवार को सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने के आरोप में विधायक जयराम महतो समेत 10 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई।

अब वायरल ऑडियो, पुलिस एसोसिएशन के विरोध, विधायक की सफाई और उनके द्वारा लगाए गए आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया है। ऑडियो में वास्तव में छेड़छाड़ हुई है या नहीं, यह तकनीकी अथवा फोरेंसिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल पुलिस और विधायक के बीच बढ़ता यह विवाद धनबाद में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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