JSSC-CGL पेपर मामला : दिल्ली से गिरफ्तार सोमांश प्रकाश व राहुल कुमार के विरुद्ध मिले पेपर लीक के सबूत, परीक्षा संचालन से जुड़े होने का उठाया फायदा, पेपर लीक कर लाभ लेने का आरोप

 

-वेबेल की सहयोगी संस्था आईसीएन के है दोनो कर्मचारी, 5 दिन की सीआईडी रिमांड पर, पूछताछ शुरू

राँची।झारखण्ड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की झारखण्ड स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2023 के कथित पेपर लीक मामले में सीआईडी की जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। दिल्ली से पिछले दिनों गिरफ्तार किए गए सोमांश प्रकाश और राहुल कुमार के खिलाफ जांच में सीआईडी को पुख्ता सबूत मिले हैं। दोनों आरोपी परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी मेसर्स वेबेल टेक्नोलॉजी की सहयोगी संस्था आईसीएन के कर्मचारी हैं। सीआईडी का आरोप है कि परीक्षा संचालन से जुड़े होने का लाभ उठाकर दोनों ने पेपर लीक किया और इसके एवज में लाभान्वित हुए। दोनों आरोपियों को गुरुवार को न्यायिक हिरासत में राँची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा भेजा गया था। इसके बाद सीआईडी ने दोनों से पूछताछ के लिए पांच दिनों की रिमांड मांगी। सीआईडी की विशेष अदालत ने आवेदन पर सुनवाई के बाद रिमांड की अनुमति दे दी। शुक्रवार शाम दोनों आरोपियों को पांच दिनों की सीआईडी रिमांड पर लिया गया और उनसे पूछताछ शुरू कर दी गई है।

वेबेल और आईसीएन के बीच कड़ी का काम करते थे दोनों

जांच में सीआईडी को जानकारी मिली है कि वेबेल टेक्नोलॉजी ने जेएसएससी सीजीएल परीक्षा के संचालन में अपनी सहयोगी संस्था आईसीएन की मदद ली थी। गिरफ्तार सोमांश प्रकाश और राहुल कुमार इसी संस्था के कर्मचारी हैं। सीआईडी के अनुसार, दोनों वेबेल और आईसीएन के बीच कड़ी के रूप में काम करते थे। आरोप है कि परीक्षा संचालन से जुड़ी जिम्मेदारी और व्यवस्था की जानकारी का लाभ उठाकर दोनों ने पेपर लीक किया। इसके बदले उन्हें लाभ भी मिला। सीआईडी को इन आरोपों से संबंधित पुख्ता सबूत मिलने के बाद दोनों की गिरफ्तारी की गई।

1 जनवरी 2025 को दर्ज हुई थी प्राथमिकी

जेएसएससी के माध्यम से 21 और 22 सितंबर 2024 को झारखण्ड स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2023 आयोजित की गई थी। परीक्षा में कथित पेपर लीक के मामले में सीआईडी ने 1 जनवरी 2025 को सीआईडी थाना कांड संख्या 01/2025 के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद से ही सीआईडी मामले की जांच कर रही है। जांच के दौरान सीआईडी पहले भी इस मामले से जुड़े आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें कथित मास्टरमाइंड अभय कुमार तिवारी के भाई अक्षय तिवारी और उसकी पत्नी सुषमा कुमारी शामिल हैं।

20 माह बाद बदला सीआईडी के जांच का एंगल, अबतक अभ्यर्थियों को प्रश्न-उत्तर रटवाने के आरोप में ही चल रही थी सीआईडी की जांच

सीआईडी की जांच का एंगल 20 माह बाद बदला है। सीआईडी की अब तक की जांच में यह सामने आया है कि जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में पेपर लीक नहीं हुआ था बल्कि कुछ आरोपियों ने प्रश्न उत्तर अभ्यर्थियों को अलग अलग जगह ले जाकर राटवाये थे। जांच एजेंसी के अनुसार, कई अभ्यर्थियों को दलालों और एजेंटों ने परीक्षा संचालन एजेंसी की कथित मिलीभगत से रुपये लेकर प्रश्न और उत्तर रटवाए गए। इन अभ्यर्थियों को परीक्षा में पास कराने का भी आरोप है। इससे संबंधित पुख्ता सबूत मिलने के बाद सीआईडी ने पिछले साल 11 आरोपियों को गिरफ़्तार कर जेल भी भेजा था। अब जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है और मामले में नया मोड़ आ रहा है। हाल में हुई दोनों गिरफ्तारियों को इसी जांच की अगली कड़ी माना जा रहा है। अब सीआईडी यह जानने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों की भूमिका किस स्तर तक थी और पेपर लीक की पूरी कड़ी में कौन-कौन लोग शामिल थे।

दोनों आरोपी बिहार के, दिल्ली में साथ रह रहे थे

गिरफ्तार सोमांश प्रकाश मूल रूप से बिहार के रोहतास जिले के विक्रमगंज थाना क्षेत्र के माडर्न आईटीआईएएस कॉलेज के समीप असकामिनी नगर का रहने वाला है। वह वर्तमान में दिल्ली में रह रहा था। दूसरा आरोपी राहुल कुमार मूल रूप से बिहार के वैशाली जिले के महुआ थाना क्षेत्र के चांदसराय का निवासी है। वह भी दिल्ली में सोमांश प्रकाश के साथ उसके आवास पर रह रहा था। सीआईडी ने दोनों को दिल्ली से गिरफ्तार किया था।

मास्टरमाइंड मिथिलेश सिंह की तलाश तेज

इधर, जेएसएससी सीजीएल परीक्षा के संचालन से जुड़ी एजेंसी मेसर्स वेबेल टेक्नोलॉजी के लिए काम करने वाले और कथित पेपर लीक मामले के मास्टरमाइंड मिथिलेश सिंह की तलाश भी तेज कर दी गई है। सीआईडी ने उसकी तलाश में दिल्ली, बिहार और बंगाल के कई ठिकानों पर छापेमारी की है, लेकिन अब तक उसका पता नहीं चल सका है। सीआईडी के अनुसार, यदि मिथिलेश सिंह जल्द जांच एजेंसी के सामने नहीं आता है, तो उसके खिलाफ राँची स्थित सीआईडी की विशेष अदालत से गिरफ्तारी वारंट लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके बाद उसकी विधिवत गिरफ्तारी का प्रयास किया जाएगा।

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