बिहार: अस्पताल के बेड पर माँ तड़पती रही, आवारा कुत्ते नवजात बच्चे को नोच नोच कर खाते रहे

एक माँ ने बच्चे को तो जन्म दिया लेकिन बच्चे के जन्म के साथ ही सरकारी अस्पताल में पहले से मौजूद आवारा कुत्ते बच्चे को लेकर भाग निकले और देखते ही देखते बच्चे को नोच-नोच कर खा गए।

सीवान। बिहार में राज्य सरकार चिकित्सा व्यवस्था सुधारने के कितने भी दावे करती हो लेकिन आए दिन पोल खुल ही जाती है।आपको जानकर हैरानी होगी कि बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के गृह जिले में अस्पताल के ये हालात हैं कि कुत्ते बड़ी आसानी से नवजात बच्चे को लेकर भाग जाते हैं। सोचिए कि किसी के घर एक चिराग ने जन्म लिया और कुछ ही घंटे बाद किसी जानवर का निवाला बन गया। उस मां पर क्या बीतेगी जिसका बच्चा अभी दुनिया में आया ही था कि आते ही अलविदा भी कह गया।

सिवान के गुठनी अस्पताल की घटना

सीवान जिले के सरकारी अस्पताल में घुसकर आवारा कुत्ता मां के पास से नवजात को लेकर भाग गया और देखते ही देखते बच्चे को अपना निवाला बना लिया। मां अस्पताल में तड़पती रही और बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई। अब आप सोच सकते हैं कि सरकारी अस्पताल में किस तरह की व्यवस्था है, जहां पर जन्म लेने वाला एक नवजात बच्चा भी सुरक्षित नहीं है। यह पूरा मामला सीवान जिले के गुठनी सरकारी अस्पताल का है, जहां पर प्रसव के तुरंत बाद नवजात को कुत्ते उठा ले गए।

सुशासन: सरकारी अस्पताल में भी प्रसव के लिए पैसे?

इस घटना की जानकारी होते ही अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। एक तरफ पीड़ित महिला के परिजनों का कहना है कि जच्चा-बच्चा की सुरक्षा की गारंटी लेते हुए प्रसव के लिए एएनएम की ओर से एक हजार रुपये भी लिए गए। लोगों की मानें तो इस अस्पताल में एक हजार रुपये प्रसव पर निर्धारित कर दिया गया है।

खुला सुशासन की ढोल का पोल

वहीं, एएनएम इस मामले से साफ इंकार कर रही है। अस्पताल के ऊपर यह आरोप लग रहा है कि यहां न जन्म देने वाला और न जन्म लेने वाला ही सुरक्षित है. भले ही सरकार सुशासन की ढोल पीटते रहे लेकिन इस तरह की होने वाली घटनाएं सरकार के सारे पोल खोल कर रख देती हैं। फिलहाल इस घटना के बाद से कोई भी स्वास्थ्य विभाग का अधिकारी कुछ भी कहने से कतरा रहे हैं। वहीं, बच्चे को जन्म देने वाली मां का रो-रो कर बुरा हाल है और बार-बार न्याय की मांग कर रही है।