दसवीं के दो नाबालिगों ने कर ली शादी, ग्राम सभा ने समझाकर लिया बड़ा फैसला; 18 साल की उम्र तक अलग रहकर पूरी करेंगे पढ़ाई

 

चाईबासा।झारखण्ड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के मझगांव प्रखंड के घोड़ाबंधा गांव में बाल विवाह का एक मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों, पंचायत प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने मिलकर बच्चों के भविष्य को लेकर अहम पहल की। दसवीं कक्षा में पढ़ने वाले एक नाबालिग छात्र और दूसरी पंचायत की नाबालिग छात्रा प्रेम प्रसंग में शादी कर साथ रहने लगे थे। मामले की जानकारी मिलने पर बाल अधिकार सुरक्षा मंच, पंचायत प्रतिनिधियों और सामाजिक संस्था एस्पायर ने हस्तक्षेप किया। इसके बाद विशेष ग्राम सभा बुलाकर दोनों परिवारों को समझाया गया। ग्राम सभा में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि दोनों बच्चों की उम्र 18 वर्ष पूरी होने तक वे अलग-अलग रहेंगे और अपनी पढ़ाई जारी रखेंगे। पंचायत में यह भी कहा गया कि बालिग होने के बाद, दोनों की सहमति और कानून के दायरे में, वे पति-पत्नी के रूप में साथ रहने का निर्णय ले सकते हैं।

प्रेम प्रसंग में घर छोड़कर शादी करने का मामला

जानकारी के अनुसार, घोड़ाबंधा गांव का एक नाबालिग छात्र और खड़पोस पंचायत के पोंडुवाबुरू गांव की नाबालिग छात्रा अपने-अपने विद्यालय में दसवीं कक्षा के विद्यार्थी हैं। दोनों के बीच प्रेम प्रसंग था। इसी क्रम में दोनों ने शादी कर ली और साथ रहने लगे। जब इसकी जानकारी बाल अधिकार सुरक्षा मंच, प्रखंड विकास पदाधिकारी और सामाजिक संस्था एस्पायर तक पहुंची, तो मामले को गंभीरता से लिया गया। संबंधित लोगों ने दोनों परिवारों से संपर्क कर बातचीत शुरू की, ताकि बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए समाधान निकाला जा सके।

ग्राम सभा में परिवारों को समझाया गया

मामले को लेकर घोड़ाबंधा गांव में विशेष ग्राम सभा आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता स्थानीय ग्रामीण मुंडा सोनाराम हेंब्रम ने की। बैठक में दोनों परिवारों को एक साथ बैठाकर पूरे मामले पर चर्चा की गई। परिवारों को बताया गया कि कम उम्र में शादी करने से बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और मानसिक विकास पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। साथ ही, बाल विवाह से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी भी दी गई।

बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि बच्चों की उम्र अभी पढ़ाई करने, अपने भविष्य को संवारने और जीवन के प्रति समझ विकसित करने की है। ऐसे में उन्हें वैवाहिक जिम्मेदारियों में बांधने के बजाय शिक्षा पूरी करने का अवसर दिया जाना चाहिए। समझाइश के बाद दोनों परिवार ग्राम सभा के निर्णय पर सहमत हो गए।

18 साल तक अलग रहेंगे, पढ़ाई पर रहेगा पूरा ध्यान

ग्राम सभा ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि दोनों बच्चे 18 वर्ष की उम्र पूरी होने तक अलग-अलग रहेंगे। इस अवधि में दोनों अपनी-अपनी पढ़ाई जारी रखेंगे और परिवार उनकी शिक्षा में किसी प्रकार की बाधा नहीं डालेंगे। बच्चों पर साथ रहने या शादी को लेकर कोई दबाव नहीं बनाया जाएगा।

बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि 18 वर्ष की उम्र पूरी होने के बाद ही वे कानून के अनुसार अपने भविष्य और रिश्ते को लेकर निर्णय ले सकते हैं। हालांकि, केवल उम्र पूरी होना अपने आप में शादी या साथ रहने की कानूनी अनुमति नहीं है; विवाह के लिए लागू कानूनी शर्तों का पालन जरूरी होगा।

गांव को बाल विवाह मुक्त बनाने का संकल्प

ग्राम सभा में केवल इस मामले के समाधान तक सीमित रहने के बजाय भविष्य में बाल विवाह की रोकथाम को लेकर भी चर्चा हुई। पंचायत स्तर पर ऐसे मामलों पर नजर रखने और किसी भी संदिग्ध घटना की जानकारी तत्काल बाल अधिकार सुरक्षा मंच, पंचायत प्रतिनिधियों और प्रशासन को देने का निर्णय लिया गया।

ग्रामीणों ने संकल्प लिया कि गांव में बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी। बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीतियों को रोकने के लिए परिवारों को जागरूक किया जाएगा, ताकि कम उम्र में बच्चों का भविष्य प्रभावित न हो।

ये लोग रहे मौजूद

इस पहल में मझगांव प्रखंड बाल अधिकार सुरक्षा मंच के अध्यक्ष मनोज हेंब्रम, घोड़ाबंधा पंचायत के मुखिया विवेकानंद पूर्ति, खड़पोस पंचायत के मुखिया प्रताप चातार, मझगांव मुखिया प्रतिनिधि सह जेकेएलएफ सदस्य मोहम्मद फैयाज, त्रिलोक हेंब्रम, घनश्याम चातार, ब्लॉक कोऑर्डिनेटर नारायण मर्ति, अब्दुल अकिन, एम. चिश्ती, जामदार हेंब्रम, चंद्र मोहन चातार और पूर्ण चंद्र लागुरी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

सामाजिक संदेश:इस मामले में ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों की पहल का उद्देश्य बच्चों को दंडित करना नहीं, बल्कि उन्हें शिक्षा पूरी करने और सुरक्षित भविष्य बनाने का अवसर देना रहा। बाल विवाह की रोकथाम में परिवार, पंचायत और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी महत्वपूर्ण है।

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