पावर प्लांट के नाम पर 290 करोड़ का कर्ज, रकम 100 शेल कंपनियों में गायब…कोहिनूर ग्रुप पर ईडी का बड़ा प्रहार…

राँची/जमशेदपुर। झारखण्ड के 290 करोड़ रुपये के बैंक लोन घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार सुबह बड़ा प्रहार किया। चांडिल के कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े कथित बैंक ऋण घोटाले की जांच में ईडी की टीम ने पश्चिम बंगाल में एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी कर सनसनी फैला दी। हावड़ा, हुगली के उत्तरपाड़ा, लेक टाउन और आसनसोल में कोहिनूर ग्रुप के चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) और उसके सहयोगियों के ठिकाने जांच एजेंसी के निशाने पर रहे। छापेमारी के दौरान टीम ने वित्तीय दस्तावेज, हार्ड डिस्क और कई डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं। अब ईडी इन दस्तावेजों के जरिए 290 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी और मनी लॉन्ड्रिंग के नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

मामले की जड़ सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल थाना क्षेत्र के कुचिडीह गांव में स्थित कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ी है। आरोप है कि कंपनी ने 66 मेगावाट क्षमता का थर्मल पावर प्लांट स्थापित करने के नाम पर बैंकों से करीब 290 करोड़ रुपये का कर्ज लिया, लेकिन जिस परियोजना के लिए इतनी बड़ी रकम स्वीकृत कराई गई, वह जमीन पर पूरी नहीं हो सकी। जांच में आरोप सामने आया कि बैंक से मिली रकम को प्लांट में लगाने के बजाय सुनियोजित तरीके से ग्रुप की 100 से अधिक शेल कंपनियों के खातों में ट्रांसफर किया गया। इसके बाद इस रकम का इस्तेमाल प्रमोटरों और उनके परिजनों के नाम पर निजी संपत्तियां खरीदने तथा व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं पर खर्च करने में किए जाने का आरोप है।

पावर प्लांट के नाम पर लिया कर्ज, 100 से अधिक शेल कंपनियों में घुमाई रकम

कोहिनूर ग्रुप ने वर्ष 2005 में झारखण्ड सरकार के साथ एमओयू किया था। इसके तहत स्पंज आयरन, टीएमटी बार और पावर प्लांट स्थापित करने की योजना थी। चांडिल के कुचिडीह में जमीन लेकर परियोजना का ढांचा खड़ा किया गया। इसी परियोजना के आधार पर वर्ष 2008 से 2013 के बीच बैंक ऑफ बड़ौदा की अगुवाई वाले बैंकों के कंसोर्टियम से करीब 290 करोड़ रुपये की क्रेडिट सुविधा मंजूर कराई गई। आरोप है कि परियोजना के नाम पर करोड़ों रुपये लेने के बावजूद कंपनी निर्धारित समय में पावर प्लांट चालू नहीं कर सकी। समय सीमा बढ़ाने के बाद भी वर्ष 2016 तक प्लांट अधूरा रहा। इससे पहले ही वर्ष 2015 में बैंकों ने कंपनी के खाते को एनपीए घोषित कर दिया।

प्रमोटरों की संपत्तियों तक पहुंची जांच, हर महीने 26 लाख रुपये किराये का दावा

जांच में यह भी सामने आया कि कथित वित्तीय फर्जीवाड़े के जरिए कोहिनूर ग्रुप के प्रमोटर विजय बोथरा, प्रशांत बोथरा और उनके परिजनों के नाम पर कोलकाता और आसपास के इलाकों में कई संपत्तियां खरीदी गईं। इन संपत्तियों से करीब 26 लाख रुपये प्रतिमाह किराया मिलने की बात सामने आई है। ईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि बैंक से ली गई रकम किन-किन खातों से होकर इन संपत्तियों तक पहुंची और इसमें किन लोगों की क्या भूमिका रही।

बैंकों को 290 करोड़ के कर्ज में भारी नुकसान, अब ईडी खंगाल रही मनी ट्रेल

वर्ष 2018 में कंपनी के खिलाफ एनसीएलटी में दिवालिया प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद वर्ष 2019 में लिक्विडेशन की प्रक्रिया के दौरान बैंकों को महज सात करोड़ रुपये ही वापस मिल सके। यानी बैंकों को 97.5 फीसदी से अधिक रकम का नुकसान उठाना पड़ा। आज स्थिति यह है कि आदित्यपुर के आशियाना ट्रेड सेंटर स्थित कंपनी का कार्यालय और चांडिल का पावर प्लांट वर्षों से बंद पड़ा है।

अब ईडी की ताजा छापेमारी ने इस पुराने बैंक ऋण घोटाले को फिर सुर्खियों में ला दिया है। सीए और सहयोगियों के ठिकानों से मिले दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद कई अहम खुलासे होने की संभावना है। एजेंसी का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि 290 करोड़ रुपये की रकम कहां-कहां ट्रांसफर हुई, शेल कंपनियों का संचालन कौन कर रहा था और कथित मनी लॉन्ड्रिंग में किन लोगों की भूमिका रही।

 

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