JPSC घोटाला: CID का बड़ा एक्शन, पांच मुख्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

–90 दिन पूरे होने से पहले कोर्ट में पेश किया आरोप पत्र, व्हाट्सएप पर आंसर-की लीक, खाली ओएमआर भरने और बैकएंड डेटा में हेरफेर के मिले पुख्ता साक्ष्य

राँची।झारखण्ड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर हुई अनियमितता और ओएमआर शीट हेराफेरी मामले में सीआईडी ने अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। सीआईडी ने मामले में गिरफ्तार तत्कालीन उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, परीक्षा संचालन एजेंसी टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह उर्फ आरवी सिंह, मार्केटिंग मैनेजर व किंगपिन अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी, एजेंसी कर्मी मो. उस्मान और मो. एबाद के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और झारखण्ड प्रतियोगी परीक्षा अधिनियम, 2023 के तहत आरोप पत्र समर्पित किया है। 22 जुलाई को न्यायिक हिरासत में भेजे गए इन आरोपियों को 90 दिन पूरे होने पर डिफ़ॉल्ट जमानत का लाभ न मिल सके, इसे देखते हुए जांच एजेंसी ने समय सीमा के भीतर पुख्ता तकनीकी, फॉरेंसिक और दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ चार्जशीट पेश कर दी है।चार्जशीट में सभी आरोपियों की सुनियोजित भूमिका और आपराधिक षड्यंत्र का विस्तृत ब्योरा दर्ज किया गया है।

व्हाट्सएप पर भेजी आंसर-की, एवज में एजेंसी ने कराए हवाई सफर

श्वेता कुमारी गुप्ता (तत्कालीन उप-परीक्षा नियंत्रक): चार्जशीट के अनुसार, श्वेता कुमारी गुप्ता ने अप्रैल 2026 में आयोजित सिविल सेवा पीटी परीक्षा की गोपनीय आंसर-की आधिकारिक रूप से जारी होने से पहले ही अपने मोबाइल से व्हाट्सएप के जरिए एजेंसी कर्मी मो. उस्मान को भेजी थी। दूसरे विभाग में तबादला होने के बाद भी वह आयोग में पद पर बनी रहीं और गोपनीय प्रक्रियाओं को संचालित करती रहीं। इसके एवज में टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के कर्मियों द्वारा जनवरी से जून 2026 के बीच उनके और परिजनों के लिए रांची से दिल्ली व बेंगलुरु के हवाई टिकट बुक कराए गए। सीडीआर से सिंडिकेट के साथ लगातार बातचीत और उनके नियंत्रण वाले परिसर से संवेदनशील परीक्षा सामग्री बरामदगी के साक्ष्य मिले हैं।

खाली ओएमआर भरवाने और सर्वर में हेरफेर का मास्टरमाइंड

रामवीर सिंह उर्फ आरवी सिंह (निदेशक, टीडीपीएल): ओएमआर शीट घोटाले का मास्टरमाइंड है। जांच में सामने आया कि उसने चुनिंदा अभ्यर्थियों को केवल ज्ञात प्रश्न हल करने और शेष ओएमआर शीट खाली छोड़ने की हिदायत दी थी, जिन्हें बाद में स्कैनिंग के दौरान भरकर अंक बढ़ाए गए। इसके अलावा मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं को बदलने, पीडीएफ एडिटिंग और बैकएंड सर्वर में सीधे हस्तक्षेप के जरिए अंक बढ़ाने की साजिश में इसकी मुख्य भूमिका रही। 14वीं जेपीएससी पीटी के दौरान 36 अभ्यर्थियों से सीधे संपर्क की पुष्टि सीडीआर से हुई है। जेएसएससी से तीन साल के लिए ब्लैकलिस्टेड होने के बावजूद बिना टेंडर नॉमिनेशन पर काम हासिल करने और कंपनी के बैंक खाते से अवैध रकम अपनी पत्नी मीनू सिंह व अन्य खातों में ट्रांसफर करने के वित्तीय साक्ष्य चार्जशीट का हिस्सा बनाए गए हैं।

खुद फर्जी सफलता लेकर खोला था परीक्षा पास कराने का दफ्तर

अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी (मार्केटिंग मैनेजर, टीडीपीएल व किंगपिन): संगठित सिंडिकेट का मुख्य संचालक है। एजेंसी का कर्मी रहते हुए इसने सीजीएल 2023, पीजीटीटीसीई, एसीएफ, एफआरओ और एफएसओ जैसी कई परीक्षाओं में खुद फर्जी तरीके से सफलता हासिल की। अभ्यर्थियों को अपना चयन दिखाकर झांसे में लेता था और पीटी के लिए 5 लाख तथा अंतिम चयन के लिए 10 से 25 लाख रुपए तक वसूलता था। 14वीं जेपीएससी में बिचौलिए के जरिए 11 अभ्यर्थियों से 10-10 लाख रुपए लेने के साक्ष्य मिले हैं। वसूली की गारंटी के तौर पर अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक प्रमाण पत्र, हस्ताक्षरित ब्लैंक चेक, खाली स्टांप और सादे कागज जब्त किए गए। लालपुर में अपने साले के नाम पर फ्लैट लेकर एजेंसी का अवैध दफ्तर संचालित करने और कंपनी निदेशकों के होटल का बिल अपने खाते से भरने के साक्ष्य भी अदालत में पेश किए गए हैं।

आंसर-की हासिल करने और कॉपियां बाहर भेजने का मुख्य मोहरा

मो. उस्मान (कर्मी, टीडीपीएल): तत्कालीन उप-परीक्षा नियंत्रक से गोपनीय आंसर-की सीधे अपने मोबाइल पर हासिल करने और जेपीएससी दफ्तर से फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर (एफआरओ) मेन्स 2026 की उत्तर पुस्तिकाओं का संवेदनशील डेटा बाहर निजी कंप्यूटरों पर भेजने का मुख्य आरोपी। उस्मान की ईमेल आईडी और ट्रैवल पोर्टल के जरिए उप-परीक्षा नियंत्रक के लिए एयर टिकट बुक कराए गए थे। स्कैनिंग प्रक्रिया के दौरान ओएमआर शीट के बंडलों से छेड़छाड़ और डेटा में फेरबदल की साजिश में इसकी सीधी संलिप्तता पाई गई है।

गोपनीय कॉपियां बाहर ले जाकर बैकएंड डेटा में हेरफेर

मो. एबाद (कर्मी, टीडीपीएल): आयोग से गोपनीय परीक्षा सामग्री, विशेषकर एफआरओ मेन्स परीक्षा 2026 की उत्तर पुस्तिकाओं को पेन ड्राइव व हार्ड डिस्क के जरिए अवैध रूप से बाहर निकालने और लालपुर स्थित निजी परिसर के सिस्टम में फीड करने का काम करता था। एजेंसी के स्थानीय सर्वर और कंप्यूटरों पर उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल डेटा में हेरफेर करने तथा ‘सेटिंग’ वाले अभ्यर्थियों के अंकों को बैकएंड में प्रोसेस करने के तकनीकी साक्ष्य सीआईडी ने चार्जशीट में शामिल किए हैं।

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