मेरठ नीला ड्रम बहुचर्चित हत्याकांड: पत्नी मुस्कान और प्रेमी साहिल को फांसी, 126 सुनवाई और 22 गवाहों के बाद अदालत का बड़ा फैसला
मेरठ। उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाई। मर्चेंट नेवी से जुड़े रहे सौरभ की नृशंस हत्या और शव को नीले ड्रम में सीमेंट से छिपाने के मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। जिला जज अरविंद कुमार मिश्र की अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष ने इस अपराध को ‘दुर्लभतम से दुर्लभ’ श्रेणी का बताते हुए कठोरतम सजा की मांग की थी।
लंदन से लौटा था सौरभ, घर में रची गई हत्या की साजिश
यह सनसनीखेज मामला मार्च 2025 का है। सौरभ राजपूत विदेश से लौटकर मेरठ आया था। आरोप था कि उसकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी ने अपने प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ मिलकर उसकी हत्या की साजिश रची। पुलिस जांच में सामने आए घटनाक्रम के मुताबिक, सौरभ की हत्या करने के बाद उसके शव के टुकड़े किए गए और उन्हें एक नीले प्लास्टिक के ड्रम में रखकर सीमेंट और बालू से ढक दिया गया।शव को इस तरह छिपाने की कोशिश की गई कि हत्या का राज सामने न आए। लेकिन मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस जांच आगे बढ़ी और मुस्कान तथा साहिल की भूमिका सामने आई। इस वारदात की बर्बरता और शव को ठिकाने लगाने के तरीके ने लोगों को स्तब्ध कर दिया था।
हत्या के बाद घूमने निकलने की बात ने भी चौंकाया
इस हत्याकांड की चर्चा इसलिए भी देशभर में हुई, क्योंकि जांच से जुड़े घटनाक्रम में हत्या के बाद मुस्कान और साहिल के हिमाचल प्रदेश घूमने जाने की बात सामने आई थी। जिस पति की हत्या का आरोप पत्नी पर लगा, उसी घटना के बाद सामान्य जिंदगी की तरह घूमने जाने की खबरों ने लोगों को हैरान कर दिया।हालांकि, मामले के अलग-अलग पहलुओं को अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों और अभियोजन की दलीलों के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
126 सुनवाई, 22 गवाहों की गवाही से मजबूत हुआ अभियोजन पक्ष
इस मामले में अदालत की सुनवाई लंबी चली। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 13 महीने तक चले मुकदमे में 126 सुनवाई हुईं और अभियोजन पक्ष ने 22 गवाह पेश किए। इनमें परिस्थितिजन्य साक्ष्य, चिकित्सकीय और फॉरेंसिक साक्ष्य तथा घटनाक्रम से जुड़े लोगों की गवाही अहम रही। 30 सितंबर 2026 को अदालत ने मुस्कान और साहिल को हत्या के मामले में दोषी करार दिया था। इसके बाद 14 अक्टूबर को सजा के सवाल पर सुनवाई हुई और दोनों को मृत्युदंड सुनाया गया।
सौरभ की माँ और भाई ने मांगी थी फांसी
फैसले से पहले सौरभ की माँ रेणू और भाई बबलू ने अदालत से दोनों दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग की थी। परिवार के लिए यह सिर्फ एक कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि सौरभ को खोने के बाद न्याय पाने का लंबा इंतजार भी था।बुधवार को सजा सुनाए जाने के दौरान सुरक्षा कारणों से दोनों दोषियों को जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत की कार्यवाही में शामिल किया गया। फैसले के बाद पीड़ित परिवार की भावनाएं एक बार फिर सामने आईं।
अब आगे क्या होगा?
अदालत से मृत्युदंड मिलने का अर्थ यह नहीं है कि सजा तुरंत लागू हो जाएगी। भारतीय कानून के तहत सत्र न्यायालय द्वारा दी गई मौत की सजा को संबंधित उच्च न्यायालय की पुष्टि की प्रक्रिया से गुजरना होता है। दोषियों को कानून के तहत उपलब्ध अपील और अन्य वैधानिक उपायों का अधिकार भी रहता है।मेरठ के नीला ड्रम हत्याकांड में आया यह फैसला सौरभ राजपूत के परिवार के लिए अहम न्यायिक पड़ाव है। अब आगे की कानूनी प्रक्रिया यह तय करेगी कि मृत्युदंड पर अंतिम मुहर कब और किस तरह लगती है।

