दुमका की दरिंदगी पर गैंगस्टर राहुल सिंह का अल्टीमेटम! गैंग के सदस्यों से आरोपी को खोजने को कहा, हथियार उठाने और गोली मारने की धमकी
दुमका/राँची।झारखण्ड के दुमका में 14 वर्षीय छात्रा की हत्या की घटना के बाद अब इस मामले को लेकर आपराधिक जगत से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। गैंगस्टर राहुल सिंह के नाम से सोशल मीडिया पर जारी एक पोस्ट में घटना पर आक्रोश जताते हुए पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग की गई है। हालांकि, पोस्ट में न्याय की मांग के साथ-साथ हथियार उठाने, खुद अपनी सुरक्षा करने और आरोपी को गोली मारने जैसी बातें भी कही गई हैं। इससे मामला अब कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग के नजरिये से भी गंभीर हो गया है।
राहुल सिंह के नाम से जारी पोस्ट में सबसे पहले ‘दुमका की बेटी को न्याय दो’ का नारा दिया गया है। पोस्ट में 14 वर्षीय बच्ची के साथ हुई घटना को इंसानियत को झकझोरने वाला बताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच, दोषी के खिलाफ कार्रवाई और बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है। पीड़िता और उसके परिवार के प्रति संवेदना भी जताई गई है।

लेकिन पोस्ट का अगला हिस्सा अधिक गंभीर है। इसमें झारखण्ड की बेटियों और बहनों से हथियार रखने तथा उससे संपर्क करने की अपील की गई है। पोस्ट में हथियार उपलब्ध कराने की बात कहते हुए दावा किया गया है कि सरकार और पुलिस प्रशासन सुरक्षा नहीं दे पाएंगे, इसलिए लोगों को अपनी सुरक्षा खुद करनी चाहिए। इतना ही नहीं, आरोपी के सामने आने पर उसे गोली मारने जैसी बात भी लिखी गई है।
गैंग के सदस्यों से आरोपी की पहचान करने की अपील
सोशल मीडिया पोस्ट में राहुल सिंह ने अपने गैंग के सदस्यों और आसपास के युवकों से भी आरोपी के बारे में जानकारी जुटाने की अपील की है। पोस्ट में कहा गया है कि यदि आरोपी का पता चलता है, तो इसकी सूचना उन्हें दी जाए। साथ ही, ‘न्याय कैसे होता है, बताएंगे’ जैसी बात लिखकर अपने तरीके से कार्रवाई करने का संकेत दिया गया है।
इस बयान को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या किसी आपराधिक गिरोह की ओर से न्याय के नाम पर कानून अपने हाथ में लेने की कोशिश की जा रही है? हालांकि, सोशल मीडिया पोस्ट में कही गई बातों और किसी वास्तविक कार्रवाई के बीच अंतर है। फिलहाल, पोस्ट के आधार पर किसी संभावित कार्रवाई या आरोपी की तलाश में गिरोह की सक्रियता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
पुलिस के सामने चुनौती, हथियार उठाने की अपील गंभीर
दुमका की घटना ने पहले ही महिला और बाल सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में सोशल मीडिया पर हथियार उठाने और आरोपी को गोली मारने की अपील से स्थिति और संवेदनशील हो सकती है। इस तरह के संदेश लोगों में आक्रोश भड़काने के साथ कानून अपने हाथ में लेने की प्रवृत्ति को भी बढ़ावा दे सकते हैं।
पुलिस के लिए ऐसी पोस्ट की सत्यता, उसे जारी करने वाले व्यक्ति की पहचान, संदेश के प्रसार और किसी संभावित आपराधिक गतिविधि की आशंका की जांच करना महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि पोस्ट के जरिए हिंसा के लिए उकसाने या हथियार उपलब्ध कराने की वास्तविक कोशिश की जाती है, तो तथ्यों और लागू कानून के आधार पर कार्रवाई का सवाल उठ सकता है।
न्याय की मांग और निजी सजा में फर्क
दुमका की 14 वर्षीय छात्रा को न्याय मिलना और दोषियों के खिलाफ कानून के मुताबिक सख्त कार्रवाई होना जरूरी है। लेकिन किसी आरोपी को बिना कानूनी प्रक्रिया के गोली मारने की अपील न्याय की प्रक्रिया से अलग है और इससे नई आपराधिक घटनाओं का खतरा पैदा हो सकता है।अब देखना होगा कि इस सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर पुलिस क्या रुख अपनाती है और क्या मामले में किसी तरह की जांच या कार्रवाई की जाती है। फिलहाल, दुमका की घटना के बाद गैंगस्टर राहुल सिंह के नाम से जारी इस पोस्ट ने न्याय की मांग के साथ-साथ कानून-व्यवस्था और पुलिस की जवाबदेही को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है।

