JPSC 11वीं-13वीं परीक्षा रद्द करने के सरकार के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक, करीब 200 अफसरों को बड़ी राहत-

-सोनम कुमारी और सौरभ सिंह की याचिका पर हुई सुनवाई, सरकार से जवाब तलब; 15 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
राँची। झारखण्ड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को झारखण्ड हाईकोर्ट में बड़ा झटका लगा है। गुरुवार को मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस दीपक रोशन की बेंच ने सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसके तहत 11वीं, 12वीं और 13वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को रद्द किया गया था।अदालत ने राज्य सरकार को इस मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी। हाईकोर्ट के इस आदेश से परीक्षा में चयनित होकर नियुक्ति पा चुके उन अधिकारियों को बड़ी राहत मिली है, जिनकी नियुक्तियां सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले के बाद संकट में पड़ गई थीं।
सोनम कुमारी समेत अभ्यर्थियों ने दी थी सरकार के फैसले को चुनौती
सरकार के फैसले के खिलाफ सौरभ सिंह और सोनम कुमारी की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ताओं ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा और सरकार द्वारा पूरी परीक्षा को रद्द करने के निर्णय पर सवाल उठाया।मामले में खास तौर पर डिप्टी कलेक्टर सोनम कुमारी की याचिका महत्वपूर्ण है। सोनम कुमारी का चयन 11वीं से 13वीं जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से हुआ था। चयन के बाद उन्होंने बिहार के गया जिले में शिक्षक की नौकरी छोड़कर झारखण्ड में योगदान दिया था। राज्य सरकार की ओर से उन्हें 24 नवंबर 2025 को नियुक्ति पत्र दिया गया था और उन्होंने डिप्टी कलेक्टर के पद पर योगदान किया था।इसके बाद वह अपने पद पर कार्यरत थीं और प्रशिक्षण एवं प्रोबेशन की प्रक्रिया से गुजर रही थीं। लेकिन सरकार की ओर से परीक्षा रद्द किए जाने के बाद उनकी नियुक्ति पर भी संकट खड़ा हो गया।
सरकार के आदेश से करीब 200 उप समाहर्ताओं की नौकरी पर आया संकट
सरकार द्वारा 11वीं से 13वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा रद्द किए जाने का सबसे बड़ा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ा, जो इसी परीक्षा के आधार पर चयनित होकर विभिन्न प्रशासनिक पदों पर नियुक्त हो चुके थे।बताया जा रहा है कि करीब 200 उप समाहर्ता (डिप्टी कलेक्टर) इस प्रक्रिया से प्रभावित हुए हैं। इनमें से कई अधिकारियों का प्रशिक्षण चल रहा था। श्रीकृष्ण लोक प्रशासन प्रशिक्षण संस्थान में प्रशिक्षण के बाद उन्हें जिलों में प्रोबेशन के दौरान व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए भेजा गया था।सरकार के परीक्षा रद्द करने के आदेश के बाद इन अधिकारियों के सामने नौकरी को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई। तकनीकी रूप से उनकी नियुक्ति का आधार ही परीक्षा परिणाम था और परीक्षा रद्द होने के साथ उनकी सेवा भी सवालों के घेरे में आ गई।
देवघर और बासुकीनाथ में तैनात प्रोबेशनर भी हटे
परीक्षा रद्द होने का असर सिर्फ प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहा। कानून-व्यवस्था की ड्यूटी में लगाए गए प्रोबेशनर अधिकारियों को भी वापस हटाना पड़ा।देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में विधि-व्यवस्था की जिम्मेदारी के लिए करीब 40 प्रोबेशन उप समाहर्ताओं को प्रतिनियुक्त किया गया था। वहीं, दुमका जिले के बासुकीनाथ में भी करीब 23 प्रोबेशन उप समाहर्ताओं को दंडाधिकारी के रूप में लगाया गया था।नियुक्ति रद्द होने की स्थिति पैदा होने के बाद इन अधिकारियों को ड्यूटी से हटा दिया गया। इससे प्रशासनिक स्तर पर भी इसका असर देखने को मिला।
कोर्ट में सरकार के फैसले पर उठे गंभीर सवाल
सुनवाई के दौरान अदालत ने परीक्षा में कथित गड़बड़ी और उसके आधार पर पूरी परीक्षा रद्द किए जाने के मुद्दे पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने कहा कि यदि परीक्षा देने वाले 70 प्रतिशत लोग भी गलत तरीके से आए हैं, तब भी सरकार उन्हें सीधे नहीं निकाल सकती।अदालत की इस टिप्पणी को उन अभ्यर्थियों और चयनित अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो पूरी परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले से प्रभावित हुए हैं।
अदालत ने इस मामले को जल्द निपटाने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन का निर्देश भी दिया है। इससे संकेत है कि न्यायालय मामले की सुनवाई को लंबा खींचने के बजाय जल्द से जल्द कानूनी स्थिति स्पष्ट करना चाहता है।
अब सरकार को देना होगा जवाब
हाईकोर्ट ने फिलहाल सरकार के परीक्षा रद्द करने के आदेश पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। यानी अब सरकार को अदालत के सामने यह स्पष्ट करना होगा कि आखिर किन परिस्थितियों और किस आधार पर 11वीं से 13वीं जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा को रद्द करने का निर्णय लिया गया।
15 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर मामले की दिशा और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
फैसले से हजारों अभ्यर्थियों और चयनित अधिकारियों की नजर हाईकोर्ट पर
JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा को लेकर पहले से ही अभ्यर्थियों के बीच काफी असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। परीक्षा के माध्यम से चयनित अभ्यर्थियों ने नियुक्ति मिलने के बाद अपनी पिछली नौकरियां छोड़ीं, कई ने अन्य अवसरों को छोड़कर झारखंड सरकार की सेवा ज्वाइन की और प्रशिक्षण प्रक्रिया में शामिल हुए।ऐसे में पूरी परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले ने न सिर्फ नवनियुक्त अधिकारियों बल्कि परीक्षा में शामिल हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य पर भी सवाल खड़ा कर दिया था।
गुरुवार को हाईकोर्ट की ओर से सरकार के आदेश पर रोक लगाए जाने के बाद फिलहाल चयनित अधिकारियों को बड़ी कानूनी राहत मिली है। हालांकि, अंतिम स्थिति अभी अदालत के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगी।

