JPSC विवाद के बीच अभय तिवारी का पुराना कनेक्शन आया सामने, JSSC-CGL पेपर लीक में भी दर्ज है नाम

 

राँची।14वीं JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर जांच के घेरे में आए अभय कुमार तिवारी को लेकर अब एक और अहम जानकारी सामने आई है। जांच से जुड़े दस्तावेजों के मुताबिक, अभय कुमार तिवारी का नाम जनवरी 2024 में सामने आए JSSC-CGL पेपर लीक मामले में भी आरोपी के तौर पर दर्ज किया गया था। इस मामले में नामकुम थाना कांड संख्या 45/2024 के तहत प्राथमिकी दर्ज हुई थी।

ई-मेल से सामने आया था पेपर लीक का संकेत
मामला 28 जनवरी 2024 को आयोजित प्रतियोगिता परीक्षा की तीसरी पाली से जुड़ा है। प्राथमिकी के अनुसार, आयोग की आधिकारिक ई-मेल आईडी पर दो ई-मेल भेजे गए थे। इनमें से शाम से पहले प्राप्त एक ई-मेल में सामान्य ज्ञान की तीसरी पाली के प्रश्नों के उत्तर-विकल्प चार पन्नों में क्रमवार दिए गए थे।
परीक्षा समाप्त होने के बाद आयोग ने ई-मेल में भेजे गए उत्तरों का मूल प्रश्न-पत्र से मिलान किया। जांच में बड़ी संख्या में प्रश्नों के उत्तर हूबहू मिलते पाए गए। इसके बाद आयोग ने 28 जनवरी को ही तीसरी पाली की परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया।

पेपर लीक की प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
प्राथमिकी में परीक्षा संचालन की व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया है। आवेदन से लेकर प्रश्न-पत्र तैयार करने, प्रिंटिंग, पैकिंग, सीलबंदी और परिणाम तैयार करने तक की प्रक्रिया आउटसोर्सिंग एजेंसियों के जरिए कराई जाती थी।परीक्षा सामग्री 22 और 23 जनवरी को सीलबंद हालत में राँची जिला कोषागार में जमा कराई गई थी। इसके बाद 23 और 24 जनवरी को इसे संबंधित जिलों के अधिकृत दंडाधिकारियों को सौंपा गया। परीक्षा से करीब दो घंटे पहले प्रश्न-पत्र परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाए जाने और परीक्षा शुरू होने से 15 मिनट पहले अभ्यर्थियों एवं संबंधित अधिकारियों की मौजूदगी में सील खोलने की व्यवस्था थी।

अब JPSC मामले के साथ जुड़ा पुराना मामला
JPSC परीक्षा विवाद की जांच के दौरान अभय तिवारी की भूमिका सामने आने के बाद अब JSSC-CGL पेपर लीक मामले में उनके नामजद आरोपी होने की जानकारी भी चर्चा में है। JSSC-CGL परीक्षा 2024 के पेपर लीक मामले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। मामले की जांच के बाद सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने मास्टरमाइंड अभय कुमार तिवारी को नामजद अभियुक्त बनाते हुए मामला दर्ज कर किया था। नामकुम थाना में केस नंबर 45/2024 दर्ज किया गया था। आरोपी पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 467, 468, 420 और 120B, झारखण्ड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम और निवारण) अधिनियम, 2023 की धारा 12 और आईटी एक्ट (IT Act), 2000 की धारा 66 भी जोड़ी गई थी।

इस नए तथ्य के सामने आने के बाद जांच एजेंसियों के सामने यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या दोनों परीक्षा मामलों के बीच कोई कड़ी है और परीक्षा से जुड़ी गोपनीय सूचनाएं हासिल करने में अभय तिवारी की क्या भूमिका रही थी। फिलहाल इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।

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