JPSC घोटाले की ‘होटल डायरी’: स्टेशन रोड के कमरों से तय होती थी उम्मीदवारों की किस्मत

राँची।झारखण्ड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित धांधली की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है,राजधानी राँची के कुछ होटलों की भूमिका भी जांच के केंद्र में आती दिख रही है। CID की पूछताछ में मुख्य आरोपी अभय तिवारी से जुड़े कथित खुलासों के मुताबिक, स्टेशन रोड के होटल सिर्फ ठहरने की जगह नहीं, बल्कि कथित ‘सेटिंग’ और सौदेबाजी के अड्डे बन गए थे।
जांच से जुड़े दावों के अनुसार, स्टेशन रोड स्थित ‘स्वीट एंड स्पाइस’ और ‘प्रकाश रेसिडेंसी’ के कमरों में बैठकर उम्मीदवारों के चयन, पैसों के लेन-देन और कथित तौर पर परीक्षा से जुड़ी रणनीति पर चर्चा होती थी। यानी जिन कमरों में आम तौर पर यात्री रात गुजारते हैं, वहीं कथित तौर पर प्रतियोगी परीक्षाओं में युवाओं के भविष्य का सौदा तय होने का आरोप सामने आया है।
होटल से शुरू हुआ नेटवर्क, परीक्षा तंत्र तक पहुँचा
बताया जा रहा है कि अभय तिवारी ने पहले होटल कारोबार में कदम रखा और बाद में ‘जेएसआर एजेंसी’ नाम से मैनपावर सप्लाई का कारोबार खड़ा किया। इसी कारोबारी नेटवर्क के जरिए उसकी पहुंच परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी टीडीपीएल के अधिकारियों तक बनने का दावा जांच में सामने आया है।
CID के अनुसार, कथित नेटवर्क की गतिविधियां राँची तक सीमित नहीं थीं। दिल्ली, कोडरमा और झारखण्ड के कई जिलों तक संपर्कों का जाल फैला होने की बात सामने आई है। आरोप है कि होटल के कमरों में होने वाली बैठकों से लेकर अभ्यर्थियों से संपर्क और कथित रकम की वसूली तक एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।
‘कमरे में बैठक, बाहर उम्मीदवार’
इस पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू कथित तौर पर उम्मीदवारों की सूची तैयार करने से जुड़ा है। जांच में सामने आए दावों के मुताबिक, कुछ उम्मीदवारों को पास कराने की कथित सेटिंग पहले तय होती और उसके बाद परीक्षा प्रक्रिया में उन्हें लाभ पहुंचाने की कोशिश की जाती थी।FRO और ACF बहाली को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। पूछताछ में 19 उम्मीदवारों के सफल होने और केवल एक के असफल रहने का दावा किया गया है। जांच एजेंसी इस कथित पैटर्न को भी पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली से जोड़कर देख रही है।
इंटरव्यू पैनल तक पहुंचाने का भी आरोप
11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा को लेकर पूछताछ में कथित तौर पर यह बात भी सामने आई कि पहले से संपर्क वाले अभ्यर्थियों को विशेष इंटरव्यू पैनल तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाती थी। आयोग के तत्कालीन पदाधिकारियों और सदस्यों की भूमिका को लेकर भी जांच में सवाल उठाए गए हैं।वहीं, CDPO परीक्षा में प्रति अभ्यर्थी कथित तौर पर 10 लाख रुपये तक की वसूली के आरोप ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
श्वेता गुप्ता के बयान ने बढ़ाई सनसनी
मामले में तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता के कथित बयान को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके अनुसार, तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते के दबाव में परीक्षा परिणाम जारी किया गया था। दावा है कि वह परिणाम जारी करने के पक्ष में नहीं थीं, लेकिन उन पर परिणाम घोषित करने का दबाव बनाया गया।
होटल क्यों बना जांच का अहम सिरा?
पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर जांच में सामने आए आरोप सही साबित होते हैं, तो क्या राँची के होटल कथित परीक्षा सिंडिकेट की ‘ऑपरेशनल साइट’ बन चुके थे?
होटल का कमरा जहाँ न कोई परीक्षा होती है, न कोई सरकारी फाइल खुलती है अगर वहीं उम्मीदवार, रकम, बिचौलिये और कथित प्रभावशाली लोगों के बीच सौदे तय होते थे, तो यह सिर्फ परीक्षा में धांधली का मामला नहीं, बल्कि एक समानांतर भर्ती तंत्र खड़ा किए जाने का आरोप है।
अब जांच की नजर उन होटलों की बुकिंग, कमरों में हुई मुलाकातों, CCTV फुटेज, भुगतान के रिकॉर्ड और वहां आने-जाने वाले लोगों पर भी टिक सकती है। क्योंकि अगर आरोपों में दम है, तो JPSC घोटाले की कहानी परीक्षा केंद्रों से ज्यादा उन होटल कमरों में लिखी गई हो सकती है, जहां उम्मीदवारों की किस्मत के कथित सौदे होते थे।

