रेलवे-डाक विभाग में नौकरी का झांसा, 1.30 करोड़ की ठगी का आरोप; बोकारो से आरोपी को उठा ले गई हरियाणा पुलिस…

-रेलवे और डाक विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर 1.30 करोड़ रुपये ठगने का आरोप, फर्जी नियुक्ति पत्र, मेडिकल जांच और प्रशिक्षण के जरिए बेरोजगारों को जाल में फंसाने का दावा; झारखण्ड से हरियाणा तक फैले नेटवर्क की जांच तेज

बोकारो/राँची। सरकारी नौकरी पाने का सपना देख रहे बेरोजगार युवाओं और उनके परिवारों को कथित तौर पर ठगी का शिकार बनाने वाले अंतरराज्यीय नेटवर्क के खिलाफ हरियाणा पुलिस ने झारखण्ड में कार्रवाई की है। हरियाणा पुलिस ने बीते दिनों बोकारो के चीरा चास इलाके से बहादुर कुमार महतो उर्फ समीर को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर रेलवे, डाक विभाग और अन्य सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले कथित गिरोह से जुड़े होने का आरोप है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस आरोपी को हरियाणा ले गई, जहां उससे पूछताछ की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आरोपी को एक सप्ताह की पुलिस रिमांड पर लिया गया है।

इस मामले में गुरुग्राम के राजेंद्र पार्क थाना में वर्ष 2024 में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ता बाला देवी ने आरोप लगाया है कि सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर उनके परिवार, रिश्तेदारों, पड़ोसियों और परिचितों से कुल 1 करोड़ 30 लाख 89 हजार 696 रुपये की ठगी की गई। शिकायत में 23 आरोपियों के नामों का उल्लेख है। आरोप है कि लोगों को सरकारी विभागों में नियुक्ति दिलाने का भरोसा देकर उनसे रकम वसूली गई और विश्वास बनाए रखने के लिए कथित तौर पर फर्जी नियुक्ति पत्र, मेडिकल जांच तथा प्रशिक्षण जैसी प्रक्रियाओं का सहारा लिया गया।

चीरा चास में सुबह-सुबह छापेमारी, आरोपी गिरफ्तार
मिली जानकारी के मुताबिक, हरियाणा पुलिस की टीम पहले राँची पहुँची फिर बोकारो पहुँची।पुलिस ने 18 तारीख की सुबह करीब आठ बजे बोकारो जिले के चीरा चास थाना क्षेत्र स्थित भालसुंदा बस्ती में छापेमारी की। इसी दौरान आरोपी बहादुर कुमार महतो उर्फ समीर को गिरफ्तार किया गया। आरोपी के पिता का नाम भुवन चंद्र महतो बताया गया है। उसका पता भालसुंदा बस्ती, वार्ड संख्या-7, चीरा चास, बोकारो बताया गया है। जानकारी के अनुसार, वह पहले राँची के चुटिया थाना क्षेत्र के नायक टोली में भी किराये के मकान में रहता था।

गिरफ्तारी के बाद हरियाणा पुलिस आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर अपने साथ ले गई। इसके बाद उसे एक सप्ताह की पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस का मुख्य फोकस कथित गिरोह के अन्य सदस्यों की भूमिका, पीड़ितों से वसूली गई रकम के लेन-देन और फर्जी नियुक्ति दस्तावेज तैयार करने के तरीके का पता लगाना है।

गुरुग्राम में दर्ज FIR से खुला ठगी का मामला
इस कार्रवाई का संबंध हरियाणा के गुरुग्राम जिले के राजेंद्र पार्क थाना में दर्ज प्राथमिकी संख्या 336/2024, दिनांक 4 सितंबर 2024 से है। उपलब्ध एफआईआर के अनुसार, मामला भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120-B, 419, 420, 467, 468 और 471 के तहत दर्ज किया गया था। इन धाराओं में आपराधिक साजिश, प्रतिरूपण के जरिए धोखाधड़ी, धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़े आरोप शामिल हैं।

शिकायतकर्ता बाला देवी, निवासी सूरत नगर फेज-1, गुरुग्राम, ने पुलिस को बताया कि जनवरी 2021 में राहुल सिंह नाम के व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया था। कथित तौर पर उसने बड़े अधिकारियों और नेताओं से संपर्क होने का दावा करते हुए युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा दिया।शिकायत के अनुसार, इसी भरोसे के आधार पर बाला देवी को लखनऊ बुलाया गया। वहां होटल आशीर्वाद, चारबाग में अलग-अलग शहरों और राज्यों से आए कई युवक-युवतियां मौजूद थे। आरोप है कि नौकरी की उम्मीद में पहुंचे इन लोगों से सरकारी नियुक्ति दिलाने के नाम पर बातचीत की गई और बाद में रकम की मांग की गई।

भतीजे की नौकरी के नाम पर बनाया गया भरोसा
शिकायत में बाला देवी ने आरोप लगाया है कि गिरोह के सदस्यों ने सबसे पहले उनके भतीजे प्रशांत को डाक विभाग में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया। इसके लिए प्रशांत को लखनऊ बुलाया गया और उससे जरूरी दस्तावेज लिए गए तथा कुछ फॉर्म पर हस्ताक्षर कराए गए।शिकायतकर्ता का दावा है कि प्रशांत को लखनऊ के जीपीओ में नौकरी मिलने की बात कही गई। कुछ समय तक उसे नकद वेतन भी दिया गया, जिससे परिवार का भरोसा बढ़ा। बाद में कथित तौर पर उसे नौकरी से हटा दिया गया और उसकी नियुक्ति को लेकर कोई ठोस समाधान नहीं दिया गया।

बाला देवी के अनुसार, इसी घटनाक्रम के बाद उनकी बेटी और होने वाले दामाद को भी सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया। आरोप है कि उनके दामाद रोहित के नाम पर डाक विभाग और रेलवे से संबंधित नियुक्ति पत्र भेजे गए। शिकायत में 26 मई 2021 को डाक विभाग से संबंधित नियुक्ति पत्र और 29 जून 2021 को रेलवे सेवा से संबंधित पत्र मिलने का उल्लेख है।
परिवार को उम्मीद थी कि युवाओं को सरकारी नौकरी मिल जाएगी। लेकिन शिकायतकर्ता का आरोप है कि नियुक्ति पत्र मिलने के बावजूद वास्तविक नियुक्ति नहीं हुई। अभ्यर्थियों को अलग-अलग जगहों पर बुलाया जाता रहा, पहचान पत्र और कागजात दिए गए, लेकिन उन्हें नियमित नौकरी नहीं मिली।
फर्जी नियुक्ति पत्र, मेडिकल जांच और प्रशिक्षण का आरोप
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जब पीड़ितों का भरोसा कमजोर पड़ने लगा, तो कथित गिरोह के सदस्यों ने उन्हें फिर से विश्वास में लेने के लिए नए तरीके अपनाए। कभी दूसरे व्यक्ति से बातचीत कराई गई, तो कभी जल्दी नियुक्ति कराने का आश्वासन देकर अतिरिक्त रकम मांगी गई।

बाला देवी ने आरोप लगाया है कि 2022 के दौरान नई दिल्ली स्थित रेलवे अस्पताल में कुछ कर्मचारियों से कथित सांठगांठ कर अभ्यर्थियों की मेडिकल जांच कराई गई। शिकायत के मुताबिक, हवाई जहाज के टिकट भी भेजे गए और कुछ अभ्यर्थियों को खड़गपुर में रेलवे टिकट कलेक्टर के प्रशिक्षण से संबंधित प्रक्रिया में शामिल कराया गया।इसके बाद कथित तौर पर नई दिल्ली के बड़ौदा हाउस और अन्य रेलवे कार्यालयों से संबंधित नियुक्ति पत्र दिए गए। अभ्यर्थियों को रिपोर्टिंग के लिए बुलाने, दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने और अंगूठे के निशान लेने की बात भी शिकायत में कही गई है।इन प्रक्रियाओं का उद्देश्य लोगों को यह विश्वास दिलाना था कि उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि संबंधित विभागों के रिकॉर्ड और पुलिस जांच से ही हो सकेगी।

रकम वापस मांगने पर धमकी देने का आरोप
बाला देवी ने शिकायत में कहा है कि जब नौकरी नहीं मिली और पीड़ितों ने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू की, तो कथित तौर पर उनसे और पैसे मांगे जाने लगे। आरोप है कि उन्हें बताया गया कि यदि अतिरिक्त रकम नहीं दी गई, तो पहले दी गई राशि भी वापस नहीं मिलेगी।शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने, अपहरण करने तथा उनके पति की नौकरी को नुकसान पहुंचाने की धमकियां दी गईं। कथित तौर पर आरोपियों ने बड़े अधिकारियों से संपर्क होने और विभिन्न विभागों में अपनी पहुंच होने की बात कहकर पीड़ितों पर दबाव बनाया।शिकायत में दावा किया गया है कि लगातार आर्थिक दबाव और नौकरी मिलने की उम्मीद में बाला देवी ने अपना प्लॉट तक बेच दिया। इसके बावजूद परिवार के सदस्यों और अन्य पीड़ितों को नौकरी नहीं मिली और उनकी रकम भी वापस नहीं हुई।
इन आरोपों के आधार पर शिकायतकर्ता ने पुलिस से ठगी, जालसाजी, ब्लैकमेलिंग और धमकी देने के मामले में कार्रवाई करने के साथ अपनी रकम वापस दिलाने तथा परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।

23 आरोपियों के नाम, कई राज्यों तक नेटवर्क होने का दावा
इस मामले की शिकायत में कुल 23 आरोपियों और कथित सहयोगियों के नामों का उल्लेख किया गया है। इनमें उत्तर प्रदेश, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, बिहार और अन्य स्थानों से जुड़े व्यक्तियों के नाम शामिल हैं।शिकायत में राहुल सिंह, गौरव सिंह, आनंद कुमार, पवन वर्मा, आकांक्षा श्रीवास्तव, राज कुमार सरोज,बहादुर सिंह महतो उर्फ समीर, प्रदीप कुमार सोनी, रितेश कुमार, टिंकू करमाली, एस.के. अग्रवाल, तुल्सी ग्रुप, ऋषभ गुप्ता, अरविंद कुमार गुप्ता, वीरेंद्र सिंह, निखिल लांबा, आलोक मिश्रा, शिवा प्रसाद दास, स्नेहा मिश्रा, अशोक कुमार, इंद्रजीत, राजेंद्र तिवारी तथा लखनऊ के एक होटल के मैनेजर और स्टाफ का उल्लेख किया गया है।शिकायतकर्ता ने कुछ व्यक्तियों पर रेलवे और डाक विभाग से संबंधित पदों या संपर्कों का हवाला देकर नौकरी दिलाने का भरोसा देने का आरोप लगाया है। हालांकि, एफआईआर में नाम आने मात्र से किसी व्यक्ति का अपराध साबित नहीं होता। प्रत्येक आरोपी की भूमिका और आरोपों की सत्यता जांच के अधीन है।

करीब 1.31 करोड़ रुपये की ठगी का दावा
शिकायत के अनुसार, बाला देवी के परिवार के अलावा उनके रिश्तेदारों, पड़ोसियों और परिचितों ने भी सरकारी नौकरी की उम्मीद में रकम दी थी। सभी पीड़ितों से कथित तौर पर अलग-अलग समय और माध्यमों से पैसे लिए गए।शिकायतकर्ता ने कुल 1,30,89,696 रुपये की ठगी का दावा किया है। यह राशि शिकायत में बताए गए कथित नुकसान पर आधारित है; पुलिस जांच में पीड़ितों की संख्या, प्रत्येक व्यक्ति से ली गई रकम और वास्तविक वित्तीय लेन-देन का सत्यापन किया जाना बाकी है।
मामले में बैंक खातों, पैसों के हस्तांतरण, कथित नियुक्ति पत्रों, मेडिकल जांच और प्रशिक्षण से संबंधित दस्तावेजों की जांच अहम हो सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि ठगी की रकम कहां-कहां भेजी गई और कथित नेटवर्क में अलग-अलग लोगों की क्या भूमिका थी।

हैदराबाद पुलिस की पूर्व कार्रवाई का भी दावा
सूत्रों के हवाले से यह दावा किया जा रहा है कि बहादुर कुमार महतो उर्फ समीर को इससे पहले हैदराबाद पुलिस ने भी ठगी के एक मामले में राँची के चुटिया से गिरफ्तार कर चुकी है। फिलहाल हरियाणा पुलिस की कार्रवाई के बाद इस मामले में पूछताछ और जांच का दायरा बढ़ने की उम्मीद है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर सकती है कि कथित गिरोह में कौन-कौन लोग शामिल थे, फर्जी नियुक्ति पत्र कहां तैयार किए गए, सरकारी विभागों के नाम और दस्तावेजों का इस्तेमाल कैसे हुआ तथा पीड़ितों से वसूली गई रकम किन खातों में पहुंची।

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