हाईकोर्ट के जज के साथ कोर्ट रूम में बकझक करने वाले अधिवक्ता ने हाईकोर्ट से माफी मांगी, फैसला सुरक्षित
राँची।झारखण्ड हाईकोर्ट के जज के साथ कोर्ट रूम में बकझक करने वाले अधिवक्ता महेश तिवारी ने मंगलवार को हाईकोर्ट की पूर्णपीठ के समक्ष अपने व्यवहार के लिए माफी मांगी। इसके बाद चीफ जस्टिस एमएस सोनक, जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद, जस्टिस आर मुखोपाध्याय, जस्टिस आनंद सेन और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया। जज के साथ गलत आचरण करने के आरोप में हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए वकील पर आपराधिक अवमानना का मामला दर्ज कर सुनवाई के लिए पूर्णपीठ का गठन किया था और वकील से जवाब मांगा था। इसके बाद वकील ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद वकील को हाईकोर्ट जाने को कहा था। शीर्ष अदालत ने कहा था कि यदि अधिवक्ता इस मामले में माफी मांगते हैं तो हाईकोर्ट को सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिए। इसी टिप्पणी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने याचिका निष्पादित कर दी थी।
पूर्व की सुनवाई के दौरान नोकझोंक से संबंधित वीडियो भी अदालत में दिखाया गया था। उस समय चीफ जस्टिस द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में अधिवक्ता महेश तिवारी ने कहा था कि उन्होंने जो भी शब्द कहे, वह पूरी तरह होश-हवास में कहे और उन्हें इस पर कोई पछतावा नहीं है। इस पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए अधिवक्ता को अवमानना का नोटिस जारी किया था और तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था।
उल्लेखनीय है कि यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ था, जब झारखण्ड हाईकोर्ट में जस्टिस राजेश कुमार की अदालत में सुनवाई के दौरान अधिवक्ता महेश तिवारी की न्यायाधीश से तीखी और आपत्तिजनक बहस हो गई थी। इसी घटना को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने पूर्णपीठ का गठन कर मामले की सुनवाई की।

