दुमका में खौफनाक वारदात:पति पर अवैध संबंध का शक,माँ ने अपने बेटे और जेठानी के लाल को मार डाला, कुएं से मिले दोनों के शव; आरोपी गिरफ्तार

दुमका। पति पर किसी दूसरी महिला से अवैध संबंध होने का शक, मन में पनपता संदेह और पारिवारिक तनाव… आरोप है कि इसी आग में एक महिला ने ऐसा खौफनाक कदम उठा लिया, जिसने दो परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लीं। जिन बच्चों को माँ की गोद में सबसे सुरक्षित होना चाहिए था, उन्हीं की हत्या के आरोप में अब माँ सलाखों के पीछे है। झारखण्ड के दुमका में सामने आए इस दोहरे हत्याकांड ने रिश्तों, ममता और इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी महिला पर अपने ही मासूम बेटे आरव और जेठानी के बेटे आयुष की हत्या करने का आरोप है। दोनों बच्चों के शव गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट थाना क्षेत्र के सलगा टांड गांव के जंगल में स्थित एक कुएं से बरामद किए गए हैं।

इस सनसनीखेज मामले में शुक्रवार को दुमका के पुलिस अधीक्षक पीतांबर सिंह खेरवार ने प्रेस वार्ता कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक, पति के कथित अवैध संबंध को लेकर शक और तनाव इस घटना की वजह बने। आरोपी महिला को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। हालांकि, इस मामले का हर पहलू पुलिस जांच के दायरे में है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर दो मासूम बच्चों से ऐसी क्या दुश्मनी थी कि उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी?

एसपी पीतांबर सिंह खेरवार ने प्रेस वार्ता में बताई वजह
दुमका के पुलिस अधीक्षक पीतांबर सिंह खेरवार ने शुक्रवार को समाहरणालय स्थित एसपी कक्ष में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान मामले की जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में आरोपी महिला ने अपना अपराध स्वीकार किया है।एसपी के मुताबिक, महिला को अपने पति के किसी अन्य महिला के साथ कथित अवैध संबंध होने का शक था। इसी बात को लेकर वह तनाव में रहती थी और पुलिस की प्रारंभिक जांच में इसी पारिवारिक तनाव को घटना की वजह माना जा रहा है।पुलिस ने आरोपी महिला को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। मामले में आगे की जांच जारी है, ताकि घटना से जुड़े सभी पहलुओं और परिस्थितियों को स्पष्ट किया जा सके।

दुर्गापूजा का मेला घूमने निकला परिवार, किसी को नहीं था अनहोनी का अंदेशा

घटना 19 अक्टूबर की है। पाकुड़ जिले के महेशपुर थाना क्षेत्र के बलियाडंगाल निवासी विक्रम सिंह अपनी कार से अपने भतीजे आयुष और दो भतीजियों को लेकर गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट थाना क्षेत्र स्थित अपने ससुराल सलगा टांड पहुंचे थे। वहां से पत्नी राखी कुमारी और अपने बेटे आरव को साथ लेकर पूरा परिवार दुर्गापूजा का मेला घूमने दुमका पहुंचा।परिवार के लोग साथ थे। बच्चों के लिए मेला घूमना खुशियों से भरा पल होना चाहिए था। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर बाद यही सफर ऐसी त्रासदी में बदल जाएगा, जिसका दर्द दोनों परिवारों को जिंदगी भर सालता रहेगा।

दुमका में घूमने के बाद विक्रम सिंह नगर थाना के समीप स्थित एक पेट्रोल पंप पर कार में ईंधन भरवाने पहुंचे। इसी दौरान राखी कुमारी अपने बेटे आरव और भतीजे आयुष को लेकर वहां से निकली। उसने कहा कि वह मंदिर में प्रणाम करके वापस लौट आएगी। विक्रम अपनी दोनों भतीजियों के साथ पेट्रोल पंप पर ही इंतजार करते रहे।लेकिन वक्त बीतता गया और राखी दोनों बच्चों के साथ वापस नहीं लौटी।

पत्नी का फोन नहीं उठा, व्हाट्सऐप चैट ने बढ़ाई पति की बेचैनी

काफी देर तक इंतजार करने के बाद विक्रम ने पत्नी को फोन किया। लेकिन राखी ने कॉल रिसीव नहीं किया। इसके बाद पति-पत्नी के बीच व्हाट्सऐप पर बातचीत शुरू हुई। बताया जाता है कि बातचीत के दौरान मिले संदेशों से विक्रम को किसी अनहोनी की आशंका होने लगी।पत्नी और दोनों बच्चों का कोई पता नहीं चलने पर उसकी चिंता बढ़ती गई। आखिरकार वह सीधे नगर थाना पहुंचा और पुलिस को लिखित शिकायत दी। इसके बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की।

मोबाइल लोकेशन के आधार पर राखी की मौजूदगी गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट थाना क्षेत्र के सलगा टांड गांव में सामने आई। विक्रम और परिजन वहां पहुंचे, लेकिन राखी और दोनों बच्चों का कोई सुराग नहीं मिला। परिवार की बेचैनी बढ़ती जा रही थी और पुलिस के सामने भी यह सवाल था कि आखिर महिला बच्चों को लेकर कहां चली गई?

तीन दिन बाद गांव में दिखी राखी, पूछताछ में खुलने लगीं परतें

19 अक्टूबर को बच्चों के साथ निकली राखी की तलाश जारी थी। इसी बीच 22 अक्टूबर को वह सलगा टांड गांव में घूमती हुई दिखाई दी। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की।
पुलिस के अनुसार, शुरुआती पूछताछ में महिला ने अलग-अलग बातें बताईं और जांच को भटकाने की कोशिश की। कभी वह अपनी मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने जैसी बातें करती तो कभी अंधविश्वास से जुड़ी बातें सामने रखती। हालांकि, पुलिस पूछताछ के दौरान मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी रही।इसके बाद जांच में ऐसा मोड़ आया, जिसने पूरे मामले को सनसनीखेज बना दिया। पुलिस के अनुसार, आरोपी महिला की निशानदेही पर गांव के जंगल में स्थित एक कुएं की तलाशी ली गई।

जंगल के कुएं में मिले दो मासूमों के शव, थम गईं सबकी सांसें

कुएं से दो बच्चों के शव बरामद होने की खबर फैलते ही इलाके में सनसनी फैल गई। गुरुवार, 22 अक्टूबर की शाम पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद दोनों शवों को बाहर निकाला। मृतकों की पहचान राखी के बेटे आरव और उसके भतीजे आयुष के रूप में हुई।जिस महिला के साथ दोनों बच्चे घर से निकले थे, उसी पर उनकी हत्या का आरोप सामने आया। मेले की खुशियों के बीच शुरू हुआ यह सफर दो मासूमों की मौत पर खत्म हुआ। परिवार के लोग स्तब्ध रह गए और गांव में मातम पसर गया।

कोरोना काल में पिता को खो चुका था आयुष, अब जिंदगी ने फिर छीन ली खुशियां

इस घटना में आयुष की मौत की कहानी और भी दर्दनाक है। परिजनों के मुताबिक, कोरोना काल में ही उसके पिता की मौत हो गई थी। परिवार के लोगों ने उसे संभालने और बेहतर भविष्य देने की उम्मीदें संजो रखी थीं। लेकिन अब उसकी जिंदगी भी असमय खत्म हो गई।दूसरी ओर, आरव की मौत ने उसके पिता विक्रम सिंह को गहरे सदमे में डाल दिया है। जिस बच्चे को वह अपने साथ दुर्गापूजा का मेला घुमाने निकले थे, उसी के शव की बरामदगी की खबर ने परिवार को तोड़कर रख दिया।दोनों बच्चों का किसी भी कथित वैवाहिक विवाद से कोई लेना-देना नहीं था। वे न तो किसी विवाद का हिस्सा थे और न ही अपने लिए सुरक्षा और प्यार मांगने के अलावा किसी चीज के जिम्मेदार। इसके बावजूद उन्हें अपनी जिंदगी गंवानी पड़ी।

तीन महीने की बेटी की मौत पर भी उठे सवाल, परिजन चाहते हैं जांच

मामले में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। परिजनों के मुताबिक, कुछ वर्ष पहले राखी की तीन महीने की बेटी की भी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। अब दो बच्चों की मौत के मामले के सामने आने के बाद परिजन उस पुरानी घटना को लेकर भी संदेह जता रहे हैं।परिजनों ने उस मामले की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। हालांकि, तीन महीने की बच्ची की मौत में किसी अपराध की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए उस घटना को मौजूदा दोहरे हत्याकांड से जोड़कर देखना अभी जल्दबाजी होगी। पुलिस जांच में यदि कोई तथ्य सामने आता है, तभी उसकी वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

शक की आग में दो बचपन खत्म, दो परिवारों के आंगन सूने
दुमका की यह घटना कई सवाल छोड़ गई है। पति-पत्नी के बीच शक, तनाव या विवाद हो सकता है, लेकिन उसकी कीमत मासूम बच्चों को क्यों चुकानी पड़ी? जिन बच्चों को परिवार के बड़े लोगों से सुरक्षा मिलनी चाहिए थी, वे ही कथित पारिवारिक तनाव की सबसे बड़ी कीमत चुका बैठे।एक बच्चा पहले ही पिता का साया खो चुका था, जबकि दूसरे की जिंदगी अभी शुरू ही हुई थी। आज दोनों परिवारों के सामने बच्चों की यादें हैं, गहरा सदमा है और ऐसे सवाल हैं, जिनका कोई आसान जवाब नहीं।

फिलहाल पुलिस की जांच और कानूनी प्रक्रिया से इस मामले की पूरी सच्चाई सामने आने की उम्मीद है। साथ ही, परिजन उस पुरानी संदिग्ध मौत की भी जांच चाहते हैं। इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब रिश्तों में शक हावी हो जाता है, तो सबसे पहले उन मासूम जिंदगियों को क्यों निशाना बनना पड़ता है, जिनका किसी विवाद में कोई दोष ही नहीं होता?

error: Content is protected !!