गैंगस्टर राहुल सिंह का खूनी कारोबार: 40 हजार महीने पर शूटर रख कारोबारियों पर चलवाता था गोली, हर फायरिंग के लिए 20-25 हजार रुपये अलग..
–लेवी के पैसों से चलता था गिरोह का खर्च; नयासराय में पुलिस मुठभेड़ के बाद दो कथित शूटर गिरफ्तार, शाहिद अंसारी के घुटने में लगी गोली, चार जिलों में फैले नेटवर्क का खुलासा।
राँची।राजधानी राँची के विधानसभा थाना क्षेत्र अंतर्गत नयासराय ईदगाह टोली में पुलिस और कुख्यात राहुल सिंह गिरोह के शूटरों के बीच हुई मुठभेड़ की पूरी कहानी सामने आई है। इस मामले में विधानसभा थाने में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार पेट्रोल पंप पर ताबड़तोड़ गोलीबारी और रंगदारी वसूली के कई मामलों में वांछित दो शातिर अपराधी पुलिस की घेराबंदी तोड़कर भागने की फिराक में थे। पुलिस को देखते ही अपराधियों ने जानलेवा फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने आत्मरक्षार्थ जवाबी गोलीबारी की, जिसमें मुख्य शूटर शाहिद अंसारी पैर में गोली लगने से घायल होकर गिर पड़ा, जबकि उसके दूसरे साथी शमशाद अंसारी को जवानों ने कड़े संघर्ष व हाथापाई के बाद दबोच लिया। दोनों के पास से हथियार, कारतूस, लूटी गई मोटरसाइकिल, नकदी और अन्य सामान बरामद किए गए हैं।
घटनाक्रम की शुरुआत 27 अक्टूबर की दोपहर उस समय हुई जब कांके थाना प्रभारी पुलिस निरीक्षक कुणाल कुमार को एक बेहद पुख्ता खुफिया सूचना मिली। सूचना यह थी कि बीते 11 अक्टूबर की रात करीब 9:30 बजे कांके थाना क्षेत्र स्थित मनसूरी पेट्रोल पंप पर दहशत फैलाने के लिए की गई फायरिंग में प्रयुक्त बिना नंबर प्लेट की काले रंग की पल्सर एनएस-200 (NS 200) बाइक पर दो संदिग्ध सवार हैं। वे दोनों रिंग रोड के रास्ते रातू रोड से नयासराय की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। सूचना मिलते ही कांके थाना प्रभारी ने फौरन वायरलेस सेट पर अलर्ट जारी किया और आसपास के सभी थानों को इलाके की सघन घेराबंदी करने का आग्रह किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिले के वरीय पुलिस पदाधिकारियों को अवगत कराया गया। वरीय अधिकारियों ने तत्काल हटिया के वरीय पुलिस उपाधीक्षक नीरज कुमार के नेतृत्व में विशेष अभियान दल का गठन किया और आसपास के सभी थाना प्रभारियों को अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए फील्ड में उतार दिया।
अलर्ट जारी होते ही विधानसभा थाना प्रभारी दिनेश ठाकुर अपने सहयोगी पुअनि आनंद कुमार पंडित और सशस्त्र बलों के साथ गश्त तेज करते हुए नयासराय की ओर बढ़े। इसी दौरान पुंदाग थाना प्रभारी, पुअनि मिथुन कुमार और पुंदाग ओपी का सशस्त्र बल भी सक्रिय होकर जोड़ा मंदिर की दिशा से घेराबंदी में जुट गया। कांके थाना प्रभारी कुणाल कुमार भी अपनी टीम के साथ संभावित रास्तों पर लगातार सुराग तलाश रहे थे। शहर के तीन थानों की पुलिस एक साथ अपराधियों के भागने की संभावित दिशा में जाल बिछा चुकी थी।
दोपहर करीब 3:20 बजे विधानसभा थाना की टीम खोजबीन करते हुए जैसे ही नयासराय रेलवे फाटक के पास पहुंची, अचानक रेलवे क्रॉसिंग पार कर विधानसभा की तरफ आ रही काले रंग की बिना नंबर वाली पल्सर बाइक दिखाई दी। बाइक पर दो युवक सवार थे, जिनका हुलिया वायरलेस पर प्रसारित विवरण से हूबहू मिल रहा था। पुलिस टीम ने बिना एक पल गंवाए उनका पीछा शुरू किया और वायरलेस पर साथी टीमों को लोकेशन साझा की। पुलिस की गाड़ी को तेजी से पीछे आते देख दोनों अपराधियों के होश उड़ गए। मुख्य सड़क पर खुद को घिरता देख बाइक चालक ने बचने के लिए गाड़ी को नयासराय ईदगाह टोली की संकरी गलियों की तरफ मोड़ दिया और रफ्तार बढ़ा दी।
खंडहर में मोर्चाबंदी और पुलिस पर अंधाधुंध फायरिंग
ईदगाह टोली में आगे बढ़ते ही पुलिस टीमों ने दोनों तरफ से बाइक सवारों की घेराबंदी कर दी। जब दोनों बदमाशों को लगा कि बच निकलना नामुमकिन है, तो उन्होंने ईदगाह टोली स्थित एक चारदीवारी वाले खंडहरनुमा मकान के पास बाइक पटक दी। इसके बाद दोनों अपराधी जान से मारने की नीयत से सीधे पुलिस पार्टी पर फायरिंग करते हुए खंडहर की तरफ भागे। इसी बीच पुंदाग ओपी प्रभारी भी अपनी टीम और जवानों के साथ मौके पर पहुंच गए। पुलिस अधिकारियों ने लाउड आवाज में चिल्लाकर चेतावनी दी— “हमलोग पुलिस पार्टी हैं, चारों तरफ से घिर चुके हो, आत्मसमर्पण कर दो ” लेकिन अपराधियों पर इसका कोई असर नहीं हुआ। एक अपराधी भागते हुए सीधे पुलिस दल को निशाना बनाकर गोलियां बरसाता रहा, जबकि दूसरा खंडहरनुमा दीवार की आड़ लेकर लगातार ट्रिगर दबा रहा था। गोलियों की तड़तड़ाहट सुनकर पास में मौजूद कांके थाना प्रभारी भी सशस्त्र बल के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे।
आत्मरक्षार्थ जवाबी कार्रवाई: 9 एमएम पिस्टल से चेतावनी और एनकाउंटर
चारों तरफ से गोलियां चल रही थीं और पुलिसकर्मियों की जान पर सीधा खतरा बन आया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विधानसभा थाना प्रभारी दिनेश ठाकुर ने अपनी सरकारी 9 एमएम पिस्टल से हवाई फायरिंग कर बदमाशों को अंतिम चेतावनी दी। इसके बावजूद जब अपराधियों की ओर से फायरिंग बंद नहीं हुई, तो पुलिस बल ने आत्मरक्षार्थ सटीक जवाबी फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली लगते ही एक अपराधी खंडहर के बाहर ही लड़खड़ाकर गिर पड़ा और उसके हाथ से पिस्टल छूट गई। इसी दौरान दूसरी तरफ से घेराबंदी कर रहे पुलिस पदाधिकारियों और जवानों ने अदम्य साहस दिखाते हुए दीवार की आड़ में छिपे दूसरे अपराधी पर धावा बोल दिया। उसने पकड़े जाने के दौरान पुलिस जवानों से तीखी हाथापाई की, लेकिन जवानों ने उसे मजबूती से काबू कर लिया। संघर्ष के दौरान उसका लोडेड हथियार भी जमीन पर गिर गया।
घायल अपराधी को प्राथमिक उपचार, रिम्स रेफर
जमीन पर गिरे पहले अपराधी के पास जब पुलिस टीम पहुंची, तो देखा कि उसके दाहिने पैर में घुटने के पास गोली लगी थी और खून बह रहा था। मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए पुलिस पदाधिकारियों ने मौके पर ही उसे प्राथमिक उपचार दिया और तुरंत फोन कर एम्बुलेंस बुलवाई। पूछताछ में घायल अपराधी ने अपना नाम शाहिद अंसारी (24 वर्ष), पिता आलम अंसारी, तथा पकड़े गए दूसरे साथी ने अपना नाम शमशाद अंसारी (20 वर्ष), पिता इदरीश अंसारी बताया। दोनों मूल रूप से लोहरदगा जिले के कुटमू, अलीनगर के रहने वाले हैं। सूचना पाकर वरीय अधिकारी मौके पर पहुंचे और निर्देश दिया कि घायल को तुरंत बेहतर इलाज के लिए अस्पताल भेजा जाए। एम्बुलेंस पहुंचते ही घायल शाहिद अंसारी को स०अ०नि० मो० फिरोज और हवलदार सिंदू सिंह की सख्त निगरानी में राँची स्थित रिम्स भेजा गया।
संगठित अपराध का खूनी मॉडल
गिरफ्तार शूटर शमशाद अंसारी ने पूछताछ में गिरोह के वित्तीय तंत्र की परतें खोलीं। उसने बताया कि राहुल सिंह अपने शूटर्स को सीधे आर्थिक सुरक्षा मुहैया कराता था। प्रत्येक शूटर को संगठन में बने रहने के लिए 40,000 रुपये प्रति माह फिक्स वेतन दिया जाता था। किसी भी पेट्रोल पंप, प्रतिष्ठान या कारोबारी पर गोलीबारी करने के एवज में प्रति घटना 20,000 से 25,000 रुपये अलग से नकद दिए जाते थे। शमशाद की जेब से तलाशी के दौरान जो 7,500 रुपये नकद बरामद हुए, उसके बारे में उसने बताया कि यह रकम राहुल सिंह द्वारा व्यापारियों से वसूली गई लेवी का ही हिस्सा थी। घटना से ठीक एक दिन पहले यह पैसा गिरोह के सक्रिय सदस्य राजेंद्र महली के माध्यम से दोनों शूटरों को दैनिक खर्च और लॉजिस्टिक्स के लिए भेजा गया था।
चार जिलों में फैला आतंकी जाल: गुमला से लातेहार तक वारदातें
पकड़े गए दोनों शूटर लोहरदगा जिले के कुटमू (अलीनगर) के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि उनका गिरोह अंतर-जिला स्तर पर संगठित होकर काम कर रहा था। सिंडिकेट के सदस्य मुख्य रूप से चार जिलों राँची, लोहरदगा, गुमला और लातेहार के पेट्रोल पंपों को टारगेट करते थे। इस सिंडिकेट में शाहिद और शमशाद के अलावा कई अन्य शातिर अपराधी सक्रिय भूमिका में जुड़े हुए हैं। राहुल पूरे गिरोह का मुख्य सरगना, जो रंगदारी और हत्या के टारगेट तय करता है। राजेंद्र महली (निवासी तीगरा लोहरा, लालपुर, लोहरदगा) हथियारों और लेवी के पैसे को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने वाला प्रमुख रणनीतिकार था। दीपक लोहरा (निवासी हुटाप, चंदाव, लातेहार) फायरिंग और लूट की घटनाओं में शामिल शूटर है। नितेश उरांव उर्फ मनीष तिर्की (निवासी हेडजोड़ी, गुमला) गिरोह का सक्रिय सदस्य है, जिसे पुलिस ने कुछ दिन पूर्व ही गिरफ्तार कर जेल भेजा है। इन सभी ने मिलकर गुमला, लोहरदगा, लातेहार और कांके के पेट्रोल पंपों पर पूर्व में फायरिंग कर व्यापारियों में दहशत पैदा की थी।
अंधेरे में मंगाया गया जनरेटर, एफएसएल टीम ने जुटाए बैलिस्टिक साक्ष्य
मंगलवार को घटना स्थल पर शाम होते ही अंधेरा छाने लगा, जिससे साक्ष्य संकलन में परेशानी होने लगी। पुलिस लाइन राँची से तत्काल छोटा जनरेटर मंगवाकर पूरे खंडहर और आसपास के क्षेत्र में रोशनी की व्यवस्था की गई। शाम करीब 7:00 बजे फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की तीन सदस्यीय विशेष टीम।डॉ. नीतीश कुमार गुरु, डॉ. चितोष पाल और डॉ. खुशबू कुमारी मौके पर पहुंची। एफएसएल विशेषज्ञों ने ई-साक्ष्य नियमावली के तहत वैज्ञानिक जांच शुरू की। दोनों अपराधियों के हाथों से गन शॉट रेजिड्यू सुरक्षित करने के लिए हाथों को प्लास्टिक से सील किया गया और हाथ का धावन (वॉश) लिया गया ताकि यह साबित हो सके कि उन्होंने हथियार से गोलियां चलाई थीं। जांच के दौरान टीम ने घटनास्थल से पुलिस द्वारा आत्मरक्षार्थ चलाई गई सरकारी 9 एमएम पिस्टल का खोखा, घायल शाहिद अंसारी द्वारा इस्तेमाल की गई देसी पिस्टल और एक खाली खोखा, शमशाद अंसारी के पास से जमीन पर गिरी 7.62 एमएम की लोडेड देसी पिस्टल (जिसके चेंबर में एक जिंदा गोली, मैगजीन में एक जिंदा गोली और एक खाली खोखा बरामद हुआ), जमीन पर बिखरे खून के नमूने विधिवत जब्त किए।

